लखनऊ : लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) में सामने आए चर्चित घूसकांड के बाद विजिलेंस की जांच अब तेजी से आगे बढ़ रही है। मामले में जांच का दायरा बढ़ाते हुए विजिलेंस ने एलडीए के 11 इंजीनियरों और एक पीसीएस अधिकारी के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू की है। जांच एजेंसी अब संबंधित अधिकारियों के कार्यकाल, फैसलों, शिकायतों के निस्तारण और अवैध निर्माणों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही है। अधिकारियों पर अवैध निर्माणों को कथित संरक्षण देने, शिकायतों को प्रभावित करने और दलालों के माध्यम से काम कराने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।
जांच के दायरे में शामिल 12 अधिकारियों में एक अभियंता सेवानिवृत्त हो चुका है, जबकि बाकी अधिकारी फिलहाल सेवा में हैं। विजिलेंस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन अधिकारियों की भूमिका कथित घूसखोरी और अवैध निर्माण से जुड़े मामलों में किस स्तर तक रही। बुधवार को विजिलेंस की टीम एलडीए मुख्यालय पहुंची और करीब ढाई घंटे तक वहां दस्तावेजों की जांच की। टीम ने संबंधित अधिकारियों और अभियंताओं से जुड़े कई रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए और उन मामलों की जानकारी जुटाई, जिनमें अनियमितता के आरोप सामने आए हैं।
विजिलेंस की जांच मुख्य रूप से उन मामलों पर केंद्रित है, जिनमें अवैध निर्माणों को संरक्षण देने या कार्रवाई से बचाने के आरोप हैं। इसके अलावा आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया की भी समीक्षा की जा रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि किन शिकायतों में अधिकारियों ने नियमों के मुताबिक कार्रवाई की और किन मामलों में कथित तौर पर शिकायतों को प्रभावित किया गया।
जांच के दौरान विजिलेंस के हाथ कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य लगने की भी बात सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, कुछ अभियंताओं की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी जांच एजेंसी को मिली हैं। इन रिकॉर्डिंग में कथित तौर पर अभियंताओं की दलालों, शिकायतकर्ताओं और कुछ ऐसे लोगों से बातचीत दर्ज है, जो खुद को पत्रकार बताते थे। अब इन रिकॉर्डिंग की सत्यता और बातचीत के संदर्भ की जांच की जा रही है। अगर रिकॉर्डिंग और अन्य दस्तावेजों से आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
विजिलेंस की जांच केवल एलडीए के अधिकारियों और अभियंताओं तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसी ने आईजीआरएस पोर्टल पर अवैध निर्माण से जुड़ी सबसे अधिक शिकायतें दर्ज कराने वाले 18 कथित पत्रकारों की भूमिका को भी जांच के दायरे में लिया है। विजिलेंस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन लोगों द्वारा की गई शिकायतें वास्तव में जनहित से जुड़ी थीं या इनके पीछे किसी प्रकार का दबाव बनाने या व्यक्तिगत लाभ हासिल करने की कोशिश थी।
जांच एजेंसी शिकायतों के पैटर्न और उनके निस्तारण के तरीके को भी देख रही है। यदि किसी व्यक्ति ने लगातार एक ही क्षेत्र या निर्माण से जुड़ी शिकायतें दर्ज कीं और बाद में संबंधित अधिकारियों या कथित बिचौलियों से उसका संपर्क सामने आता है, तो उस कड़ी की भी जांच की जा सकती है। विजिलेंस इस बात का पता लगाने में जुटी है कि शिकायतों के जरिए किसी तरह का दबाव बनाया गया था या नहीं।
हाल ही में हुए चर्चित अग्निकांड के बाद निलंबित किए गए एलडीए के कुछ अभियंता भी अब विजिलेंस की नजर में हैं। इन अधिकारियों से जुड़े मामलों की फाइलें और उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों की समीक्षा की जा रही है। अवैध निर्माणों को लेकर उनकी भूमिका, निरीक्षण रिपोर्ट और कार्रवाई से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
विजिलेंस अब तक सामने आए दस्तावेजों, ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्यों को आपस में जोड़कर पूरे मामले की कड़ियां तलाश रही है। जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि एलडीए में कथित भ्रष्टाचार केवल कुछ अधिकारियों तक सीमित था या इसके पीछे अधिकारियों, दलालों और शिकायतकर्ताओं के बीच कोई व्यापक नेटवर्क काम कर रहा था।
एलडीए में घूसकांड सामने आने के बाद इस कार्रवाई को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। फिलहाल विजिलेंस दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर और अधिकारियों या अन्य लोगों के नाम सामने आने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।