आगरा: राजामंडी रेलवे स्टेशन के पास स्थित मां चामुंडा देवी मंदिर शहर के प्रसिद्ध देवी मंदिरों में शामिल है। स्थानीय श्रद्धालु इसे करीब 250 वर्ष पुराना मानते हैं। मंदिर से ब्रिटिश काल में रेलवे लाइन बिछाने और उसे हटाने का प्रयास असफल होने की कथा जुड़ी है। हालांकि, मंदिर की स्थापना की सटीक तारीख तथा इस घटनाक्रम की स्वतंत्र अभिलेखीय पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं होती। इसलिए इन विवरणों को स्थानीय परंपरा और मान्यता के रूप में समझना चाहिए। 
टीले पर देवी की प्रतिमा मिलने की मान्यता
प्रचलित कथा के अनुसार, इस क्षेत्र में पहले टीले थे और देवी की प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई थी। बाद में आबादी बढ़ने के साथ श्रद्धालुओं ने मंदिर बनवाया। मंदिर में चामुंडा देवी सहित नौ देवियां स्थापित हैं। अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी यहां मौजूद हैं। नवरात्र में इस स्थान पर पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है। 
रेलवे लाइन से जुड़ी कहानी
स्थानीय विवरणों के मुताबिक, अंग्रेजी शासन में रेल पटरी बिछाने के दौरान मंदिर हटाने का प्रयास हुआ था। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर नहीं हट सका और पटरी को मोड़ देकर निकाला गया। यह कहानी मंदिर की पहचान का हिस्सा है, लेकिन इसके आधार पर किसी चमत्कार को प्रमाणित ऐतिहासिक घटना नहीं कहा जा सकता। 
दर्शन के लिए पहुंचते हैं स्थानीय लोग और यात्री
मंदिर के एक ओर न्यू राजामंडी कॉलोनी और दूसरी ओर रेलवे स्टेशन है। स्थानीय विवरणों में कॉलोनी और स्टेशन की ओर से मंदिर तक पहुंचने के रास्तों का उल्लेख मिलता है। महंत के अनुसार, नवरात्र में दर्शन और फूलों की सजावट के लिए श्रद्धालु आते हैं। नियमित यात्रियों का भी मंदिर से जुड़ाव बताया जाता है।
Tags: