मायावती ने योगी सरकार का जताया आभार, भदोही फिर बना संत रविदास नगर

Update: 2026-07-31 14:13 GMT

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जिले के नाम को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भदोही जिले का नाम फिर से संत रविदास नगर किए जाने की घोषणा के बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने योगी सरकार के फैसले का स्वागत किया है। मायावती ने इस कदम के लिए राज्य सरकार का आभार जताते हुए समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि सपा सरकार ने संकीर्ण जातिवादी मानसिकता के चलते जिले का नाम बदला था।

बसपा प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने बीएसपी सरकार द्वारा बनाए गए संत रविदास नगर जिले को फिर से उसी नाम से स्थापित किया है, जिसके लिए पार्टी राज्य सरकार की आभारी है। उन्होंने कहा कि बसपा सरकार के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और आम जनता की सुविधा के लिए कई नए जिले, तहसील, विकासखंड और पुलिस जोन बनाए गए थे।

मायावती ने अपने बयान में कहा कि बसपा सरकार ने कई जिलों के नाम दलित, पिछड़े वर्गों और समाज के महान संतों, गुरुओं तथा महापुरुषों के नाम पर रखे थे। इनमें संत रविदास नगर, छत्रपति शाहूजी महाराज नगर और भीम नगर जैसे जिले शामिल थे। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकार ने सत्ता में आने के बाद इन जिलों के नाम बदल दिए, जो उनकी जातिवादी सोच और संकीर्ण राजनीति को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि लोगों को ऐसे फैसले लंबे समय तक याद रहते हैं। मायावती ने दावा किया कि बसपा सरकारों ने हमेशा प्रशासनिक सुधार और जनहित को प्राथमिकता दी है। नए जिलों के गठन का उद्देश्य लोगों को बेहतर प्रशासनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना था।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर वाराणसी दौरे के दौरान भदोही जिले का नाम दोबारा संत रविदास नगर किए जाने की घोषणा की थी। इस फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। जहां भाजपा समर्थकों ने इसे संत रविदास के सम्मान से जोड़कर देखा, वहीं विपक्षी दलों ने भी अपने-अपने नजरिए से प्रतिक्रिया दी।

मायावती ने अपने बयान में कासगंज क्षेत्र का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बसपा सरकार ने ब्रज क्षेत्र के विकास को ध्यान में रखते हुए कासगंज को जिला मुख्यालय का दर्जा दिया था और इसे मान्यवर कांशीराम के नाम पर नया जिला बनाया गया था। लेकिन बाद में सपा सरकार ने इसका नाम बदल दिया। मायावती ने मांग की कि उत्तर प्रदेश सरकार संत रविदास नगर की तरह ही मान्यवर कांशीराम और अन्य महापुरुषों के नाम पर बनाए गए जिलों के पुराने नाम भी बहाल करे।

बसपा प्रमुख ने कहा कि यदि सरकार ऐसा कदम उठाती है तो यह उचित होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मान्यवर कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस से पहले या उसी दिन ऐसे जिलों के नाम बहाल किए जाते हैं तो बसपा इसके लिए आभारी होगी।

इस पूरे मामले ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर नाम परिवर्तन और महापुरुषों के सम्मान को लेकर बहस शुरू कर दी है। संत रविदास नगर नाम की वापसी को बसपा अपने पुराने फैसले की बहाली के रूप में देख रही है, जबकि भाजपा इसे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान से जोड़ रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और चर्चा का विषय बन सकता है।

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