मायावती ने छोटे भतीजे ईशान आनंद को दी बड़ी जिम्मेदारी, बनाए गए बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने बुधवार को पार्टी संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक (नेशनल कोऑर्डिनेटर) नियुक्त किया। लखनऊ में आयोजित पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक में राष्ट्रीय नेताओं, वरिष्ठ पदाधिकारियों और अब तक घोषित उम्मीदवारों की मौजूदगी में ईशान की नई जिम्मेदारी का ऐलान किया गया। इससे पहले यह जिम्मेदारी मायावती के बड़े भतीजे आकाश आनंद के पास थी।
नई जिम्मेदारी मिलने के साथ ईशान आनंद बसपा के राष्ट्रीय संगठन में प्रमुख पद पर आ गए हैं। बैठक में उन्होंने मायावती के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इसके बाद वह बैठक की पहली पंक्ति में वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठे नजर आए।
ईशान की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब बसपा उत्तर प्रदेश समेत आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी हुई है और पार्टी संगठन में हाल के दिनों में कई बदलाव किए गए हैं।
ईशान आनंद को बनाया नेशनल कोऑर्डिनेटर
मायावती ने बुधवार को लखनऊ स्थित बसपा मुख्यालय में राष्ट्रीय स्तर की बैठक बुलाई थी। इसमें पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारी, विभिन्न राज्यों के नेता और चुनावी तैयारियों से जुड़े पदाधिकारी शामिल हुए।
इसी बैठक के दौरान ईशान आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाए जाने का फैसला सार्वजनिक किया गया। इस पद के जरिए ईशान राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के संगठनात्मक कार्यों में भूमिका निभाएंगे।
ईशान इससे पहले भी बसपा की संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। सितंबर की शुरुआत में उन्हें मुख्य सेक्टर कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि कुछ दिनों बाद मायावती ने उनसे यह जिम्मेदारी वापस ले ली थी। इसके बाद 20 सितंबर को मायावती ने ईशान को फिर संगठन में आगे बढ़ाने की बात कही थी।
आकाश आनंद के पास थी यह जिम्मेदारी
ईशान आनंद से पहले मायावती के बड़े भतीजे आकाश आनंद बसपा में राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। पार्टी में आकाश की भूमिका को लेकर पिछले कुछ वर्षों में कई बार बदलाव किए गए।
सितंबर की शुरुआत में मायावती ने आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारियों से हटा दिया था। इसके बाद पारिवारिक और संगठनात्मक विवादों के बीच उन्हें पार्टी से भी अलग कर दिया गया।
आकाश को हटाए जाने के बाद बसपा के शीर्ष संगठन में राष्ट्रीय संयोजक के पद को लेकर चर्चा चल रही थी। अब ईशान आनंद को यह जिम्मेदारी देकर मायावती ने स्थिति स्पष्ट कर दी है।
परिवारवाद को लेकर भी पार्टी ने स्पष्ट किया रुख
ईशान आनंद की नियुक्ति के साथ बसपा ने पार्टी में परिवार के सदस्यों की भूमिका को लेकर अपना पक्ष भी रखा है। मायावती पहले भी इस विषय पर पार्टी संस्थापक कांशीराम के सिद्धांतों का उल्लेख करती रही हैं।
बसपा नेतृत्व का कहना है कि मायावती के भाई-बहन या उनके करीबी परिवार के सदस्य अगर बिना किसी व्यक्तिगत लाभ या राजनीतिक पद की अपेक्षा के संगठन के लिए काम करना चाहते हैं तो वे पार्टी में रहकर सहयोग कर सकते हैं।
इससे पहले मायावती ने कहा था कि पार्टी और बहुजन आंदोलन के हितों को पारिवारिक संबंधों से ऊपर रखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि परिवार के सदस्यों की संगठन में भूमिका उनके काम और पार्टी के प्रति निष्ठा के आधार पर तय होगी।
कुछ दिनों में कई बार बदली स्थिति
ईशान आनंद की संगठनात्मक भूमिका में सितंबर महीने के दौरान तेजी से बदलाव देखने को मिला है। 7 सितंबर को उन्हें पार्टी में मुख्य सेक्टर कोऑर्डिनेटर बनाया गया था। उन्हें उत्तर भारत के कई राज्यों की संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़ी जिम्मेदारी दी गई थी।
इसके कुछ दिनों बाद मायावती ने ईशान को इस जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया। उस समय उन्होंने स्पष्ट किया था कि पार्टी के हितों से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
इसके बाद 20 सितंबर को मायावती ने ईशान के लिए दोबारा पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी का रास्ता खोला। उन्होंने कहा कि आनंद कुमार के परिवार से ईशान को संगठन में आगे बढ़ाया जाएगा।
तीन दिन बाद 23 सितंबर की बैठक में ईशान को सीधे राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दे दी गई।
मायावती से सीधे जुड़ी रहेगी भूमिका
राष्ट्रीय संयोजक का पद बसपा के संगठनात्मक ढांचे में महत्वपूर्ण माना जाता है। ईशान आनंद की भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर संगठन के कामकाज और विभिन्न राज्यों में पार्टी की गतिविधियों से जुड़ी होगी।
ईशान पहले मुख्य सेक्टर कोऑर्डिनेटर रहते हुए अपने काम की रिपोर्ट सीधे मायावती और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार को देने वाले थे। अब राष्ट्रीय संयोजक बनने के बाद उनकी जिम्मेदारी का दायरा और बढ़ गया है।
पार्टी की आगामी बैठकों और चुनावी कार्यक्रमों में उनकी भूमिका से यह अधिक स्पष्ट होगा कि उन्हें किन राज्यों और संगठनात्मक क्षेत्रों की विशेष जिम्मेदारी दी जाती है।
बैठक में मिशन 2027 पर भी चर्चा
लखनऊ में आयोजित बैठक में ईशान आनंद की नियुक्ति के साथ उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों पर भी चर्चा हुई।
मायावती ने पार्टी नेताओं और पदाधिकारियों से चुनावी तैयारियां तेज करने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने को कहा। उन्होंने पार्टी के सामने उत्तर प्रदेश में पांचवीं बार बसपा की सरकार बनाने का लक्ष्य रखा।
मायावती ने कहा कि चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय हो या चतुष्कोणीय, पार्टी पदाधिकारियों को अपने संगठन और चुनावी तैयारियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
अकेले चुनाव लड़ने की नीति पर जोर
बसपा नेतृत्व ने उत्तर प्रदेश के साथ उत्तराखंड और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भी अपनी रणनीति पर चर्चा की। मायावती ने पार्टी के अपने बलबूते चुनाव लड़ने के रुख को दोहराया।
पार्टी पदाधिकारियों से बूथ स्तर पर संगठन को सक्रिय करने, कार्यकर्ताओं के साथ संवाद बढ़ाने और उम्मीदवारों के चयन पर ध्यान देने को कहा गया।
बसपा के लिए उत्तर प्रदेश सबसे महत्वपूर्ण राज्य है, जहां मायावती चार बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। अब पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में जुटी है।
ईशान पर अब बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी
ईशान आनंद की राष्ट्रीय संयोजक के रूप में नियुक्ति के बाद बसपा में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। हाल के दिनों में आकाश आनंद को हटाने और ईशान की जिम्मेदारियों में बार-बार बदलाव के बाद बुधवार की घोषणा ने पार्टी के शीर्ष संगठन की नई तस्वीर सामने रखी है।
हालांकि ईशान की नियुक्ति को राजनीतिक रूप से किस तरह देखा जाएगा, इस पर अलग-अलग विश्लेषण हो सकते हैं। तथ्य यह है कि बसपा नेतृत्व ने उन्हें राष्ट्रीय संयोजक बनाकर संगठन में प्रमुख जिम्मेदारी सौंपी है।
अब ईशान आनंद के सामने पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में समन्वय और आगामी विधानसभा चुनावों से जुड़ी गतिविधियों में अपनी भूमिका निभाने की जिम्मेदारी होगी। 2027 के चुनाव से पहले बसपा में आगे और कौन से संगठनात्मक बदलाव होते हैं, इस पर भी राजनीतिक नजरें रहेंगी।