मुरादाबाद एजुकेशन अपडेट: पारंपरिक डिग्रियों में घटे दाखिले, ट्रेंड में आए प्रोफेशनल कोर्स
मुरादाबाद। मुरादाबाद मंडल के उच्च शिक्षण संस्थानों में इस सत्र में एक बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक ट्रेंड सामने आया है। गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय से संबद्ध मुरादाबाद मंडल के करीब 370 कॉलेजों में स्नातक (ग्रेजुएशन) स्तर के पारंपरिक पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या में भारी कमी आई है। इस वर्ष प्रवेश पंजीकरण में पिछले साल के मुकाबले 41.7 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि छात्र अब बीए, बीएससी और बीकॉम जैसे पारंपरिक ढर्रे के कोर्स छोड़कर व्यावसायिक (प्रोफेशनल) और एकीकृत (इंटीग्रेटेड) पाठ्यक्रमों को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।
पिछले साल के मुकाबले 50 हजार कम हुए पंजीकरण
विश्वविद्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मुरादाबाद मंडल के कॉलेजों में स्नातक स्तर पर प्रवेश के लिए इस साल पंजीकरण की प्रक्रिया 1 मई से शुरू की गई थी। अब तक केवल 70 हजार छात्रों ने ही प्रवेश के लिए अपना ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। यदि पिछले वर्ष के आंकड़ों पर नजर डालें, तो इसी समान अवधि में करीब 1.20 लाख छात्रों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से लगभग 93 हजार छात्रों ने फीस जमा कर अपनी दाखिला प्रक्रिया पूरी की थी।
इस बार स्थिति बेहद निराशाजनक है; अब तक विश्वविद्यालय के पोर्टल के अनुसार केवल 62 हजार छात्र ही फीस जमा कर अंतिम रूप से प्रवेश ले पाए हैं। यानी पिछले साल की तुलना में इस बार सीधे तौर पर 50 हजार (41.7%) कम पंजीकरण हुए हैं।
कॉलेजों में मेरिट सूची बनाना भी हुआ मुश्किल
विश्वविद्यालय द्वारा तय शेड्यूल के मुताबिक, प्रवेश पंजीकरण की अंतिम तिथि 15 जुलाई निर्धारित की गई है। अंतिम तिथि समाप्त होने में अब महज दो दिन का समय शेष रह गया है। मंडल के अधिकांश निजी और एडेड कॉलेजों की स्थिति यह है कि उनके यहाँ उपलब्ध कुल सीटों के अनुपात में न्यूनतम आवेदन भी नहीं आए हैं। ऐसे में कॉलेजों के सामने यह संकट खड़ा हो गया है कि वे बिना पर्याप्त आवेदनों के पहली मेरिट सूची कैसे तैयार करें। अधिकांश कॉलेजों में सीधे 'आओ और पाओ' की तर्ज पर सीधे दाखिले की नौबत आ गई है, क्योंकि सीटें भरना ही उनके लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
हिंदू कॉलेज अपवाद: केवल यहीं उमड़ी छात्रों की भीड़
इस भारी मंदी और गिरावट के बीच मुरादाबाद का प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज एकमात्र अपवाद बनकर उभरा है। शहर के इस इकलौते कॉलेज में पारंपरिक कोर्सेज का दबदबा बरकरार दिख रहा है। हिंदू कॉलेज में बीए (कला संकाय), बीएससी बायोलॉजी और बीकॉम की कुल सीटों के मुकाबले कहीं अधिक छात्रों ने आवेदन किया है। यही वजह है कि पूरे मुरादाबाद मंडल में केवल हिंदू कॉलेज ही ऐसा संस्थान होगा, जहाँ दाखिले के लिए पहली मेरिट सूची जारी की जाएगी और छात्रों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। इसके उलट, शहर और ग्रामीण इलाकों के बाकी सभी कॉलेजों में सीटें खाली रहने का डर सता रहा है।
क्यों बदल रहा है छात्रों का रुझान?
शिक्षा जगत से जुड़े जानकारों का कहना है कि आज का युवा केवल डिग्री हासिल करने के बजाय रोजगारपरक शिक्षा को ज्यादा तरजीह दे रहा है। 3 साल या 4 साल के साधारण स्नातक कोर्स करने के बाद भी रोजगार न मिलने के कारण छात्रों का रुझान अब ऐसे कोर्सेज की तरफ बढ़ा है जो सीधे जॉब मार्केट से जुड़े हैं। यही वजह है कि पारंपरिक बीए या बीएससी की सीटें खाली रह जा रही हैं और छात्र कंप्यूटर एप्लीकेशन, मैनेजमेंट, डेटा साइंस और अन्य प्रोफेशनल डिप्लोमा या इंटीग्रेटेड कोर्स की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं। अब देखना होगा कि क्या अंतिम दो दिनों में आवेदनों की संख्या में कुछ सुधार होता है या फिर कॉलेजों को खाली सीटों के साथ ही नया सत्र शुरू करना पड़ेगा।