हमीरपुर : उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में स्कूल जाने वाली सड़क की बदहाली को लेकर स्कूली बच्चों का आक्रोश सामने आया। कुरारा ब्लॉक की ग्राम पंचायत चंदूपुर से जुड़े करीब आधा दर्जन डेरों को जोड़ने वाली सड़क लंबे समय से खराब बताई जा रही है। इसी समस्या को लेकर छठी से 12वीं कक्षा तक पढ़ने वाले बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मंगलवार को नारेबाजी करते हुए जिला मुख्यालय पहुंचे। बच्चों की मांग थी कि उनके स्कूल तक पहुंचने वाली सड़क की हालत सुधारी जाए, ताकि उन्हें रोजाना आने-जाने में परेशानी न हो।
बच्चे अपनी समस्या जिलाधिकारी के सामने रखना चाहते थे। इसी उद्देश्य से वे कलक्ट्रेट पहुंचे और डीएम कार्यालय में जाकर अपनी बात रखने की कोशिश की। बताया गया कि बच्चों के प्रदर्शन के दौरान करीब चार घंटे तक कलक्ट्रेट परिसर में अफरातफरी की स्थिति बनी रही। बच्चों को समझाने के लिए एडीएम और एसडीएम समेत कई अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राएं अपनी मांग पर अड़े रहे। उनका कहना था कि वे किसी राजनीतिक मांग को लेकर नहीं आए हैं, बल्कि स्कूल जाने के लिए बेहतर सड़क की मांग कर रहे हैं।
बच्चों की कोशिश थी कि उन्हें सीधे जिलाधिकारी से मिलकर अपनी समस्या बताने का अवसर मिले। हालांकि, उन्हें डीएम से मुलाकात नहीं हो सकी। प्रदर्शन के दौरान अधिकारियों और बच्चों के बीच काफी देर तक बातचीत की कोशिश चलती रही। स्थिति को देखते हुए पुलिस बल भी मौके पर तैनात किया गया। इसी दौरान पुलिस और बच्चों के बीच कथित तौर पर तीखी स्थिति पैदा हो गई।
सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में एक इंस्पेक्टर बच्चों को वहां से हटने के लिए कहते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में पुलिसकर्मियों द्वारा बच्चों को बाहर करने की कोशिश भी नजर आती है। रिपोर्ट के मुताबिक इंस्पेक्टर का नाम रामकुमार बताया जा रहा है। आरोप है कि बच्चों को वहां से हटाने के दौरान पुलिसकर्मियों ने सख्त लहजे का इस्तेमाल किया और कुछ बच्चों को धकियाकर बाहर करने का प्रयास किया।
इस दौरान कई बच्चे पुलिस की सख्ती देखकर वहां से हटने लगे, लेकिन कुछ छात्राओं ने अपनी बात रखने का साहस दिखाया। वीडियो में दो बच्चियां जमीन पर बैठकर अपनी मांग पूरी होने तक वहां से नहीं जाने की बात कहती नजर आईं। उनका कहना था कि उन्हें केवल अपने स्कूल तक जाने के लिए सड़क चाहिए। छात्राओं ने अधिकारियों से सड़क बनवाने की मांग करते हुए कहा कि यदि उनकी समस्या का समाधान कर दिया जाए तो वे वहां से चले जाएंगे।
बच्चियों के इस रवैये का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस के व्यवहार को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगीं। कई लोगों ने सवाल उठाया कि बुनियादी सुविधा की मांग करने वाले स्कूली बच्चों के साथ प्रशासन और पुलिस को किस तरह का व्यवहार करना चाहिए। हालांकि, पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रशासन या पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
इस मामले को लेकर सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी सोशल मीडिया पर बच्चों का वीडियो साझा किया और उनके साहस की सराहना की। उन्होंने बच्चों को सलाम करते हुए कहा कि ये छात्र अपने भविष्य और स्कूल तक पहुंचने के लिए सड़क की मांग कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आजादी के करीब 80 साल बाद भी ग्रामीण इलाकों के बच्चों को स्कूल जाने के लिए अच्छी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए प्रदर्शन क्यों करना पड़ रहा है।
दीपके ने अपने संदेश में ग्रामीण भारत के बच्चों और उनके स्कूलों के लिए काम करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने 15 अगस्त के अवसर पर बेहतर शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के लिए संकल्प लेने की बात कही। उनका कहना था कि बच्चों की मांग कोई बड़ी या असामान्य मांग नहीं है, बल्कि स्कूल तक सुरक्षित और सुविधाजनक पहुंच उनका बुनियादी अधिकार होना चाहिए।
सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने भी बच्चों का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया और उनके प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने बच्चों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ते हुए कहा कि लोगों को अपने भविष्य से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग भी की।
हमीरपुर की यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में स्कूली बच्चों द्वारा स्थानीय समस्याओं को लेकर आवाज उठाने के मामले चर्चा में हैं। सड़क, स्कूल और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से स्थानीय लोगों की चिंता का विषय रही हैं। हमीरपुर में बच्चों का कलक्ट्रेट पहुंचना इसी असंतोष का एक उदाहरण माना जा रहा है।
सबसे अहम बात यह है कि प्रदर्शन करने वाले बच्चों की मुख्य मांग स्कूल तक जाने वाली सड़क की मरम्मत और बदहाली दूर करने की थी। अब स्थानीय लोगों और बच्चों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। यदि सड़क की समस्या का समाधान होता है तो बच्चों के प्रदर्शन का उद्देश्य पूरा हो सकता है। वहीं, पुलिस के कथित व्यवहार का वीडियो सामने आने के बाद इस पहलू पर भी प्रशासन से जवाब की उम्मीद की जा रही है।
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