लखनऊ : उत्तर प्रदेश में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार श्रम कानूनों और औद्योगिक ढांचे में बड़े बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रही है। सरकार का जोर ऐसा कारोबारी माहौल तैयार करने पर है, जिसमें उद्योगों को नियमों के अनुपालन में आसानी हो और निवेशकों को अनावश्यक सरकारी प्रक्रियाओं से राहत मिल सके। इसी कड़ी में प्रदेश में चार नई श्रम संहिताओं के लिए नियम तैयार किए जा रहे हैं। नई व्यवस्था में कई मामलों में सजा के बजाय जुर्माने का प्रावधान करने के साथ-साथ स्टार्टअप को विभागीय जांच से राहत देने की पहल की गई है।
राज्य सरकार के स्तर पर तैयार की जा रही नई श्रम व्यवस्था का उद्देश्य उद्योगों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाना और उद्यमियों को श्रम विभाग के कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने से राहत देना है। खास तौर पर स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें शुरुआती वर्षों में विभागीय निरीक्षण और जांच की प्रक्रिया से राहत देने का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार नए स्टार्टअप को करीब 10 साल तक नियमित विभागीय जांच का सामना नहीं करना पड़ेगा।
स्टार्टअप शुरू करने वाले उद्यमियों को नियमित निरीक्षण से छूट पाने के लिए स्वप्रमाणन की प्रक्रिया अपनानी होगी। निवेश मित्र पोर्टल पर स्टार्टअप का दर्जा मिलने या स्वप्रमाणन से संबंधित आवेदन प्रदर्शित होते ही संबंधित इकाई को निरीक्षण से राहत मिल सकेगी। यह सुविधा गैर-खतरनाक श्रेणी के कारखानों, प्रतिष्ठानों और इनक्यूबेटर को देने की बात कही गई है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं होगा कि किसी भी परिस्थिति में जांच नहीं की जा सकेगी। यदि किसी इकाई के खिलाफ गंभीर शिकायत सामने आती है या कोई दुर्घटना होती है तो निरीक्षण किया जा सकेगा। इसके लिए श्रमायुक्त की अनुमति लेना जरूरी होगा। इस व्यवस्था से एक तरफ कारोबारियों को राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं गंभीर मामलों में निगरानी का रास्ता भी खुला रहेगा।
श्रम कानूनों में बदलाव के साथ प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी को लेकर भी नई व्यवस्था तैयार की जा रही है। राज्य कैबिनेट ने नई मजदूरी संहिता को मंजूरी दे दी है। इसमें अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन की गारंटी सुनिश्चित करने की बात कही गई है। बाकी तीन श्रम संहिताओं की नियमावलियों को भी जल्द कैबिनेट से मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
सरकार की औद्योगिक रणनीति केवल श्रम सुधारों तक सीमित नहीं है। प्रदेश में बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट भी तैयार किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में हरदोई हाईवे पर करीब एक हजार एकड़ में पीएम मित्र पार्क विकसित किया जा रहा है। इसे उत्तर प्रदेश का प्रमुख टेक्सटाइल हब बनाने की योजना है, जहां उत्पादन के साथ-साथ लैब, प्रशिक्षण और स्किल डेवलपमेंट सेंटर जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।
इस टेक्सटाइल पार्क में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग के अनुसार वस्त्र तैयार करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। यहां ब्रांडिंग की सुविधा के साथ प्रशिक्षण केंद्र और प्रयोगशालाएं भी स्थापित की जाएंगी। परियोजना में करीब 10 हजार करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है। सरकार के मुताबिक टेक्सटाइल उद्योग कृषि के बाद बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराने वाले क्षेत्रों में शामिल है।
करीब 1947 करोड़ रुपये की लागत से विकसित हो रहे पीएम मित्र पार्क में अब तक लगभग 374 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। यहां उद्यमियों को प्लग एंड प्ले औद्योगिक प्लॉट और शेड उपलब्ध कराने की योजना है, जिससे कंपनियां बुनियादी ढांचे के लिए लंबा इंतजार किए बिना उत्पादन शुरू कर सकें। इसके अलावा वेयरहाउस, श्रमिक आवास, सामाजिक सुरक्षा और अन्य कारोबारी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए पार्क में अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र, जल संचयन व्यवस्था और सोलर प्लांट जैसी सुविधाएं स्थापित की जाएंगी। पार्क के आसपास ग्रीन बेल्ट विकसित करने की भी योजना है। परियोजना से जुड़े सड़क निर्माण कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। लखनऊ-हरदोई हाईवे से जोड़ने के लिए छह लेन की ग्रीनफील्ड सड़क बनाई जा रही है। करीब 14.28 किलोमीटर लंबी इस सड़क का निर्माण भी पार्क की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा।
टेक्सटाइल पार्क की करीब 24.09 किलोमीटर लंबी बाउंड्रीवाल का लगभग 91 प्रतिशत काम पूरा होने की जानकारी दी गई है। कार्यालय भवन और गेट कॉम्प्लेक्स का काम भी पूरा होने की ओर है। परियोजना के लिए केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी तय की गई है, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार 51 प्रतिशत और केंद्र सरकार 49 प्रतिशत खर्च वहन कर रही है।
सरकार का अनुमान है कि पीएम मित्र पार्क के पूरी तरह विकसित होने के बाद करीब एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। इससे दूसरे राज्यों, खासकर मुंबई, सूरत और अहमदाबाद जैसे प्रमुख टेक्सटाइल केंद्रों में काम करने वाले उत्तर प्रदेश के श्रमिकों को अपने गृह राज्य में रोजगार के अवसर मिलने की संभावना है।
खादी ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान के अनुसार, प्रदेश में औद्योगिक आधारभूत ढांचे को तेजी से तैयार किया जा रहा है और परियोजना से जुड़े ज्यादातर काम पूरे किए जा चुके हैं। सरकार का दावा है कि श्रम सुधारों और बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट के जरिए उत्तर प्रदेश में निवेश का माहौल मजबूत करने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
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