हापुड़/मेरठ। सरकारी दफ्तरों में आम लोगों के काम आसान बनाने के लिए नियम और प्रक्रियाएं तय हैं, लेकिन कई जगहों पर काम कराने के लिए लोगों को अब भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आरोप हैं कि कई विभागों में अधिकारी तक पहुंचने से पहले लोगों को निजी सहायकों, कथित बिचौलियों और भरोसेमंद लोगों के जरिए गुजरना पड़ता है। यही लोग फरियादियों से बातचीत कर काम कराने का भरोसा देते हैं और इसके बदले सुविधा शुल्क की मांग करते हैं।
हाल ही में मेरठ में बिजली कनेक्शन जारी करने के नाम पर रिश्वत लेने का मामला सामने आया, जहां एंटी करप्शन संगठन ने ऊर्जा निगम के जूनियर इंजीनियर समेत तीन लोगों को रंगेहाथ गिरफ्तार किया। आरोप है कि नया बिजली कनेक्शन देने के बदले 12 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। कार्रवाई के बाद एक बार फिर सरकारी विभागों में सक्रिय कथित रिश्वत नेटवर्क पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, एंटी करप्शन टीम ने कार्रवाई करते हुए ऊर्जा निगम के जूनियर इंजीनियर, उनके निजी सहायक और एक लाइनमैन को पकड़ा। टीम ने शिकायत के आधार पर जाल बिछाया और रिश्वत की रकम लेते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक तहसील, राजस्व, बिजली विभाग, आरटीओ, नगर पालिका और अन्य कई सरकारी विभागों में निजी सहायकों और बिचौलियों की सक्रियता को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। कई मामलों में आरोप लगाया जाता है कि ये लोग फरियादियों से सीधे संपर्क करते हैं, उनकी समस्या सुनते हैं और जल्द काम कराने के नाम पर रकम तय करते हैं।
सबसे बड़ी परेशानी यह है कि ऐसे लोग कई बार सरकारी कर्मचारी नहीं होते हैं, लेकिन कार्यालयों में अधिकारियों के आसपास सक्रिय रहते हैं। आम नागरिक इन्हें विभाग से जुड़ा व्यक्ति समझकर अपनी समस्याएं बताते हैं। इसके बाद काम जल्दी कराने के नाम पर पैसे की मांग की जाती है।
भ्रष्टाचार विरोधी संगठनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि कार्रवाई के दौरान रिश्वत लेते हुए व्यक्ति तो पकड़ा जाता है, लेकिन पूरे नेटवर्क तक पहुंचना कई बार मुश्किल हो जाता है। कई मामलों में अधिकारी यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास करते हैं कि पकड़ा गया व्यक्ति उनका कर्मचारी नहीं था।
सरकारी विभागों में रिश्वत की शिकायतें कई क्षेत्रों से आती रही हैं। ऊर्जा निगम में नए बिजली कनेक्शन, मीटर बदलने, लोड बढ़ाने और बिल संशोधन जैसे कार्यों में सुविधा शुल्क मांगने की शिकायतें सामने आती हैं। वहीं तहसील और राजस्व विभाग में नामांतरण, आय-जाति प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र और जमीन संबंधी कार्यों में बिचौलियों की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
रजिस्ट्रार कार्यालय में दस्तावेजों के पंजीकरण, नगर पालिका में भवन मानचित्र, जल-सीवर कनेक्शन और लाइसेंस से जुड़े कामों में भी कथित दलालों की सक्रियता की शिकायतें मिलती रही हैं। विकास और पंचायत विभाग तथा आपूर्ति विभाग में भी योजनाओं के भुगतान और प्रमाणन कार्यों में सुविधा शुल्क लेने के आरोप लगते रहे हैं।
पिछले कुछ वर्षों में रिश्वतखोरी के कई मामले सामने आए हैं। इनमें चकबंदी विभाग के लेखपाल, शिक्षा विभाग के कर्मचारी, लोक निर्माण विभाग के जेई, उद्यान विभाग के अधिकारी और जीएसटी विभाग के कर्मचारियों पर रिश्वत लेने के आरोप में कार्रवाई की गई।
प्रशासन का कहना है कि भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी विभागों की समय-समय पर समीक्षा की जाती है और शिकायत मिलने पर जांच कर कार्रवाई की जाती है। अधिकारियों का कहना है कि आम लोग भी रिश्वत मांगने की स्थिति में संबंधित विभाग या एंटी करप्शन संगठन को सूचना दें, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।
सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल प्रक्रियाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर बिचौलियों की भूमिका खत्म करना अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। हालिया कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सरकारी कामों को आसान बनाने के लिए बने सिस्टम में भ्रष्टाचार की गुंजाइश कैसे खत्म की जाए।