मुजफ्फरनगर : बरसात का मौसम जहां किसानों और आम लोगों के लिए राहत लेकर आता है, वहीं मुजफ्फरनगर के मोरना और भोपा क्षेत्र में यह मौसम एक गंभीर खतरे का कारण भी बन जाता है। बारिश के दौरान खेतों, घरों और आबादी वाले इलाकों में सांप निकलने की घटनाएं तेजी से बढ़ जाती हैं। यही वजह है कि पिछले कई वर्षों में क्षेत्र में सर्पदंश के कारण कई लोगों की मौत हो चुकी है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने ग्रामीणों में डर का माहौल पैदा कर दिया है।
मोरना और भोपा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में बरसात के दिनों में सांपों का खतरा अधिक बढ़ जाता है। खेतों में पानी भरने, बिलों में जलभराव और झाड़ियों में नमी बढ़ने के कारण सांप सुरक्षित स्थान की तलाश में बाहर निकल आते हैं। कई बार ये सांप घरों, पशुशालाओं, लकड़ी के ढेर, चारे और खेतों में पहुंच जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अक्सर सुबह और रात के समय इनका सामना करना पड़ता है।
पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्र में सर्पदंश की कई दर्दनाक घटनाएं सामने आई हैं। 20 सितंबर 2025 को मोरना कस्बे में मोहित उर्फ टिंकू की सांप के काटने से मौत हो गई थी। वहीं 31 जुलाई 2025 को गांव भुवापुर निवासी रामी नामक महिला ने भी सर्पदंश के कारण दम तोड़ दिया था। इन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था।
साल 2024 में भी सर्पदंश की कई घटनाओं में लोगों की जान गई। 20 अक्टूबर 2024 को भोपा क्षेत्र में टीटू वाल्मीकि की सांप के काटने से मौत हो गई थी। इससे पहले 9 सितंबर 2024 को भोपा निवासी अजय वालिया भी सर्पदंश का शिकार हुए थे। इसी वर्ष 31 जुलाई को गांव रहकड़ा निवासी सोनू की मौत सांप के काटने से हुई थी। वहीं 15 जुलाई 2024 को गांव फिरोजपुर निवासी किसान बाबू की भी सर्पदंश के कारण जान चली गई थी।
सर्पदंश की घटनाएं केवल हाल के वर्षों तक सीमित नहीं हैं। वर्ष 2023 में भी गांव बिहारगढ़ निवासी युवक नितिन की सांप के काटने से मौत हो गई थी। वहीं वर्ष 2019 में गांव छछरौली निवासी आसिफ की भी सर्पदंश के कारण जान चली गई थी। लगातार हो रही इन घटनाओं से साफ है कि क्षेत्र में सर्पदंश एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बरसात के मौसम में सांपों के बाहर निकलने की मुख्य वजह उनके प्राकृतिक ठिकानों में पानी भर जाना है। खेतों और जंगलों में रहने वाले सांप सूखी जगह की तलाश में आबादी की ओर आ जाते हैं। धान, गन्ना और अन्य फसलों में काम करने वाले किसानों और मजदूरों के लिए खतरा ज्यादा रहता है। रात के समय बिना रोशनी के खेतों या घर के आसपास जाना भी जोखिम भरा हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सांप के काटने के बाद पीड़ित को तुरंत अस्पताल पहुंचाना चाहिए। झाड़-फूंक और घरेलू उपायों में समय गंवाने से स्थिति गंभीर हो सकती है। सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध एंटी-वेनम इंजेक्शन समय पर मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है। इसलिए सर्पदंश की घटना के बाद जल्द से जल्द चिकित्सा सहायता लेना बेहद जरूरी है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि बरसात के मौसम में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी-वेनम दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को सांपों से बचाव, सावधानी और प्राथमिक उपचार की जानकारी दी जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते प्रभावी कदम उठाए और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करे तो हर वर्ष होने वाली इन दर्दनाक मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है। बरसात के मौसम में सावधानी, जागरूकता और समय पर इलाज ही सर्पदंश से बचाव का सबसे बड़ा उपाय है।