प्रयागराज में अभी और बढ़ेगा जलस्तर।

Update: 2026-07-12 10:03 GMT

प्रयागराज: देश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज में मानसून की भारी बारिश के बाद बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। प्रयागराज और इसके आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बरसात के चलते गंगा, यमुना, टोंस और बेलन सहित अन्य प्रमुख नदियों का जलस्तर बेहद तेजी से बढ़ने लगा है। नदियों के इस बढ़ते जलस्तर के कारण संगम नगरी के निचले और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। इसके साथ ही प्रसिद्ध संगम घाटों पर धार्मिक अनुष्ठान कराने वाले तीर्थ पुरोहितों, घाटियों और नाव चलाने वाले नाविकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नदियों के इस रौद्र रूप को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं।

ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, गंगा के जलस्तर में जहां 13 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, वहीं यमुना नदी का पानी 36 सेंटीमीटर तक बढ़ चुका है। गंगा-यमुना के इस संयुक्त उफान के साथ-साथ क्षेत्र की अन्य पहाड़ी नदियों जैसे टोंस, बेलन, टुड़ियारी और गोरमा में भी पानी का दबाव तेजी से बढ़ रहा है। पानी बढ़ने के कारण संगम समेत प्रयागराज के विभिन्न प्रमुख घाट जलमग्न होने की कगार पर पहुँच गए हैं। स्थिति को भांपते हुए नाविकों ने अपनी नावों को सुरक्षित स्थानों पर बांधना शुरू कर दिया है ताकि तेज़ धारा में नावें बह न जाएं। वहीं दूसरी तरफ, तीर्थ पुरोहितों द्वारा घाटों पर लगाए गए अपने तख्त, चौकियां और पूजा-सामग्री के टेंटों को हटाकर ऊंचे स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है। अचानक आई इस तब्दीली से संगम पर आने वाले श्रद्धालुओं को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रयागराज की एडीएम वित्त एवं राजस्व विनीता सिंह ने स्थिति की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है, जिसे देखते हुए प्रशासन की ओर से पूरी सतर्कता और निगरानी बढ़ा दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाढ़ और जलभराव की किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और प्रांतीय आर्म्ड कांस्टेबुलरी (PAC) के विशेष बाढ़ राहत दलों को संगम तथा अन्य संवेदनशील घाटों पर तैनात कर दिया गया है। ये टीमें 24 घंटे घाटों पर गश्त कर रही हैं और जलस्तर की पल-पल की रिपोर्ट ले रही हैं।

प्रशासन द्वारा नदी के किनारे बसे निचले और तटीय इलाकों के निवासियों के लिए विशेष अलर्ट जारी किया गया है। लोगों से अपील की गई है कि वे नदियों के पास जाने से बचें और जलस्तर में और अधिक वृद्धि होने की स्थिति में प्रशासन द्वारा बनाए गए सुरक्षित आश्रय स्थलों पर जाने के लिए तैयार रहें। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, यदि आने वाले कुछ दिनों में पहाड़ी और मैदानी इलाकों में बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा, तो नदियों के जलस्तर में और भारी उछाल आ सकता है, जिससे तटीय बस्तियों में पानी घुसने का खतरा वास्तविक रूप ले सकता है। फिलहाल, राहत और बचाव दल किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए मुस्तैद हैं।

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