देहरादून। उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने राज्य के विकास, शिक्षा, रोजगार, प्रशासनिक सुधार और बुनियादी सुविधाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में गुरुवार, 22 अक्टूबर को सचिवालय में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में 25 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की नियमावली में संशोधन, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए मुफ्त कोचिंग की पारिवारिक आय सीमा बढ़ाना, सड़क और पुल निर्माण की मंजूरी प्रक्रिया सरल करना तथा दिव्यांग विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षाओं में राहत देना शामिल है। इसके अलावा स्टांप शुल्क से जुड़े लंबित मामलों के निस्तारण के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना लागू करने का भी निर्णय लिया गया है।
यूसीसी नियमावली में संशोधन को मिली मंजूरी
कैबिनेट बैठक में समान नागरिक संहिता से जुड़े नियमों में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत समान नागरिक संहिता (संशोधन) नियमावली, उत्तराखंड 2026 को अधिसूचित करने का रास्ता साफ हो गया है।
सरकार के अनुसार, यूसीसी के कुछ प्रावधानों को लागू करने के दौरान व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आई थीं। इसके अलावा नियमावली में कुछ लिपिकीय त्रुटियों की पहचान भी की गई थी। इन समस्याओं को दूर करने के उद्देश्य से संशोधन का निर्णय लिया गया है।
इस फैसले के बाद संबंधित प्रावधानों के क्रियान्वयन को अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य कानूनी प्रक्रियाओं में आने वाली परेशानियों को कम करना है।
मुफ्त कोचिंग के लिए आय सीमा 2 लाख से बढ़कर 8 लाख
धामी सरकार ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को बड़ी राहत दी है। समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित निशुल्क कोचिंग योजना के लिए परिवार की वार्षिक आय सीमा दो लाख रुपये से बढ़ाकर आठ लाख रुपये कर दी गई है।
इस निर्णय से अब अधिक संख्या में पात्र विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सरकारी सहायता प्राप्त कर सकेंगे।
पहले दो लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले परिवारों के विद्यार्थी आय संबंधी पात्रता पूरी नहीं कर पाते थे। अब बढ़ी हुई आय सीमा के कारण ऐसे कई विद्यार्थियों को योजना का लाभ लेने का अवसर मिलेगा।
सरकार का मानना है कि इस कदम से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले और सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं को आर्थिक मदद मिलेगी।
सड़क और पुल निर्माण के लिए अब एकमुश्त मंजूरी
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क और पुल निर्माण को गति देने के लिए लोक निर्माण विभाग की स्वीकृति प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है।
अब सड़क निर्माण के दूसरे चरण में पहाड़ कटान, सुरक्षा दीवार, पुलिया, नाली और अन्य संबंधित कार्यों के लिए अलग-अलग मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी। सभी कार्यों को एक ही चरण में स्वीकृति दी जा सकेगी।
पुरानी व्यवस्था में अलग-अलग चरणों में मंजूरी मिलने के कारण कई बार निर्माण कार्य प्रभावित होते थे। खासकर पहाड़ काटने के बाद सुरक्षा संबंधी कार्यों में देरी होने से सड़क को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती थी।
नई व्यवस्था से निर्माण समय कम होने और आवश्यक सुरक्षात्मक कार्य जल्दी पूरे होने की उम्मीद है।
दिव्यांग विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा में 5 प्रतिशत की छूट
कैबिनेट ने उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की परीक्षाओं में दिव्यांग विद्यार्थियों को उत्तीर्ण अंकों में पांच प्रतिशत की छूट देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
नई व्यवस्था के अनुसार, पात्र दिव्यांग विद्यार्थी 28 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर उत्तीर्ण माने जाएंगे।
इस निर्णय से विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों को राहत मिलेगी। सरकार का उद्देश्य दिव्यांग विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर उपलब्ध कराना और उन्हें आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना है।
इसके लिए संबंधित परीक्षा नियमों में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।
3600 लंबित स्टांप मामलों के निस्तारण का रास्ता साफ
राज्य सरकार ने स्टांप शुल्क से संबंधित लंबित मामलों के समाधान के लिए वन टाइम सेटलमेंट यानी एकमुश्त समाधान योजना लागू करने का निर्णय लिया है।
जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में स्टांप कलेक्टर और राजस्व परिषद के न्यायालयों में लगभग 3,600 मामले लंबित हैं।
इस योजना का उद्देश्य इन मामलों का तेजी से निस्तारण करना, राजस्व वसूली बढ़ाना और संबंधित पक्षों को ब्याज तथा अर्थदंड की देनदारी में राहत प्रदान करना है।
सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से लंबित मामलों की संख्या कम होगी और लोगों को लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया का सामना नहीं करना पड़ेगा।
खेल और पर्यटन क्षेत्र को भी मिलेगा बढ़ावा
कैबिनेट ने राज्य में साहसिक पर्यटन के विकास के लिए उत्तराखंड एडवेंचर टूरिज्म कॉरपोरेशन लिमिटेड के गठन को मंजूरी दी है।
इस निगम के माध्यम से साहसिक और पर्यावरणीय पर्यटन गतिविधियों को सुरक्षित तथा व्यवस्थित तरीके से विकसित किया जाएगा।
इसके अलावा एक जिला, एक खेल योजना के तहत 14 मुख्य खेल प्रशिक्षकों की नियुक्ति का निर्णय लिया गया है। इनमें प्रत्येक जिले में एक प्रशिक्षक और एक प्रशिक्षक खेल निदेशालय में नियुक्त होगा।
मुख्य प्रशिक्षकों को तीन वर्ष के अनुबंध पर नियुक्त किया जाएगा और प्रतिमाह 1.45 लाख रुपये मानदेय मिलेगा।
राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर पुरस्कार प्राप्त खिलाड़ियों को उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कई फैसले
राज्य के सभी 13 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों के पुनर्गठन का भी निर्णय लिया गया है। इसके तहत प्रत्येक संस्थान में स्वीकृत पदों की संख्या 48 से घटाकर 44 की जाएगी।
प्रधानमंत्री पोषण योजना के अंतर्गत हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जिलों में केंद्रीयकृत रसोई स्थापित करने के लिए भूमि आवंटन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
इसके साथ ही महिला कल्याण से जुड़ी भरण-पोषण अनुदान योजना का नाम बदलकर मुख्यमंत्री एकल नारी सम्मान योजना करने का निर्णय लिया गया है।
आगामी विधानसभा सत्र में पेश होंगे महत्वपूर्ण विधेयक
कैबिनेट ने उत्तराखंड माल और सेवा कर संशोधन अध्यादेश, 2026 को विधेयक के रूप में आगामी विधानसभा सत्र में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है।
इसके अलावा उत्तराखंड सिविल विधि संशोधन विधेयक और अन्य प्रशासनिक प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई है।
राज्य सरकार का कहना है कि इन निर्णयों से प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने, सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक लोगों तक पहुंचाने और विकास परियोजनाओं में तेजी लाने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में शिक्षा, सड़क निर्माण, राजस्व, पर्यटन और सामाजिक कल्याण से जुड़े फैसलों को विशेष महत्व दिया गया है।
अब इन फैसलों के क्रियान्वयन पर संबंधित विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। सरकार की ओर से अधिसूचनाएं और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी होने के बाद पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।