देहरादून। उत्तराखंड में क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को देहरादून स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित उत्तराखंड प्रमुख संगठन के सम्मेलन में पंचायत प्रतिनिधियों के हित में महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र पंचायत प्रमुखों, ज्येष्ठ उपप्रमुखों, कनिष्ठ उपप्रमुखों और क्षेत्र पंचायत सदस्यों के मानदेय एवं भत्तों में बढ़ोतरी की घोषणा की। इसके साथ ही क्षेत्र पंचायतों को विकास कार्यों के लिए मिलने वाली 25 लाख रुपये की निधि दोबारा शुरू करने का भी ऐलान किया। मुख्यमंत्री की इन घोषणाओं से प्रदेश के पंचायत प्रतिनिधियों में लंबे समय से बनी उम्मीदों को नई गति मिली है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सम्मेलन में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास में पंचायती राज संस्थाओं का विशेष योगदान होता है। क्षेत्र पंचायतें गांवों की आवश्यकताओं को समझने और विकास कार्यों को स्थानीय स्तर पर आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे में पंचायत प्रतिनिधियों को आवश्यक संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध कराना ग्रामीण विकास के लिए जरूरी है।
उत्तराखंड प्रमुख संगठन के सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं और मांगों को प्रमुखता से उठाया गया। इनमें मानदेय और भत्तों में वृद्धि के साथ विकास कार्यों के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने का मुद्दा भी शामिल रहा। मुख्यमंत्री ने इन मांगों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
क्षेत्र पंचायत प्रमुखों, ज्येष्ठ और कनिष्ठ उपप्रमुखों तथा क्षेत्र पंचायत सदस्यों के मानदेय में
बढ़ोतरी
की घोषणा को पंचायत प्रतिनिधियों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पंचायत प्रतिनिधियों को अपने क्षेत्रों में विकास योजनाओं की निगरानी, स्थानीय समस्याओं के समाधान और प्रशासनिक बैठकों में भागीदारी जैसी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। ऐसे में मानदेय और भत्तों में वृद्धि से उन्हें अपने दायित्वों के निर्वहन में आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद मानदेय और भत्तों की नई दरें क्या होंगी, इसका विस्तृत विवरण सामने आना बाकी है। संबंधित विभाग की ओर से आदेश जारी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि किस पद के प्रतिनिधि को कितनी बढ़ोतरी का लाभ मिलेगा और नई व्यवस्था कब से लागू होगी।
मुख्यमंत्री की दूसरी बड़ी घोषणा क्षेत्र पंचायतों को विकास कार्यों के लिए मिलने वाली 25 लाख रुपये की निधि को दोबारा शुरू करने से संबंधित है। यह निधि पूर्व में बंद हो गई थी। अब इसे पुनः प्रारंभ करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे क्षेत्र पंचायतों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विकास कार्य कराने के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे। हालांकि, निधि जारी करने की समयसीमा और विस्तृत नियमों की जानकारी संबंधित सरकारी आदेश के बाद स्पष्ट होगी।
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उत्तराखंड में पंचायत प्रतिनिधि लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। राज्य में 13 जिला पंचायतें, 95 क्षेत्र पंचायतें और 7,813 ग्राम पंचायतें हैं। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार क्षेत्र पंचायत प्रमुख को छह हजार रुपये, ज्येष्ठ एवं कनिष्ठ उपप्रमुखों को 1,500 रुपये और क्षेत्र पंचायत सदस्यों को 500 रुपये मासिक मानदेय मिलता है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद इन दरों में संशोधन की उम्मीद बढ़ गई है।
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मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की विकासखंड स्तरीय समिति में क्षेत्र पंचायत प्रमुखों को शामिल करने की भी घोषणा की। इस निर्णय से ग्रामीण आजीविका, स्वयं सहायता समूहों और रोजगार से संबंधित योजनाओं में ब्लॉक प्रमुखों की भागीदारी बढ़ सकेगी। स्थानीय जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्रों की आवश्यकताओं और समस्याओं को समिति के समक्ष रख सकेंगे।
इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों को नगर निगम, नगर पालिका या अन्य नगरीय निकायों में शामिल करने की प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि किसी ग्रामीण क्षेत्र को नगरीय क्षेत्र में शामिल करने से पहले संबंधित ग्राम पंचायत से विचार-विमर्श किया जाएगा। इससे स्थानीय लोगों की आवश्यकताओं और पंचायत प्रतिनिधियों के सुझावों को निर्णय प्रक्रिया में स्थान मिल सकेगा।
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मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि सरकार और जनता के बीच महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाओं के विकास में उनकी अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि स्थानीय समस्याओं की जानकारी पंचायत प्रतिनिधियों को बेहतर ढंग से होती है। इसलिए ग्रामीण विकास से जुड़े निर्णयों में उनकी सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार अंत्योदय की भावना से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। इसके लिए पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर काम करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि छठे राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के आधार पर स्थानीय निकायों की राज्य के कर राजस्व में हिस्सेदारी 10.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इसके लिए अनुपूरक बजट में 721 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इससे स्थानीय निकायों को विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
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मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार होमस्टे, ग्रामीण पर्यटन, कृषि, बागवानी, पशुपालन और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित कर रही है। इन गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
धामी ने दावा किया कि प्रदेश में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि गांवों में आजीविका के अवसर बढ़ने से लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार के विकल्प मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से इन प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
उन्होंने पंचायतों को मिलने वाली धनराशि के पारदर्शी उपयोग पर विशेष जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्य निर्धारित समय पर पूरे किए जाने चाहिए और निर्माण की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से सरकारी योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने तथा पात्र व्यक्तियों को उनका लाभ दिलाने का आह्वान किया।
सम्मेलन में ब्लॉक प्रमुख संगठन उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष राजीव कंडारी, महासचिव गणेश चंदोला, संरक्षक हरीश बिष्ट, ज्योति ग्रोवर सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए पंचायत प्रतिनिधि मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री की घोषणाओं से क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों के समाधान की उम्मीद बढ़ी है। मानदेय और भत्तों में वृद्धि से जनप्रतिनिधियों को आर्थिक राहत मिलने की संभावना है, जबकि 25 लाख रुपये की क्षेत्र पंचायत निधि बहाल होने से स्थानीय विकास कार्यों को गति मिल सकती है।
अब पंचायत प्रतिनिधियों की नजर संबंधित विभागों की आगामी कार्रवाई और सरकारी आदेशों पर रहेगी। मानदेय की संशोधित दरें, निधि जारी करने की प्रक्रिया और अन्य घोषणाओं के क्रियान्वयन का स्वरूप स्पष्ट होने के बाद ही इनके वास्तविक लाभ का आकलन किया जा सकेगा।
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