हरिद्वार। योग गुरु बाबा रामदेव ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश की शिक्षा व्यवस्था, सरकारी भर्ती प्रक्रिया, युवा आंदोलन और मौजूदा राजनीतिक माहौल को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने परीक्षा के पेपर लीक होने, छोटे स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और सरकारी नौकरियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं पर चिंता जताई। रामदेव ने चेतावनी दी कि व्यवस्था में समय रहते सुधार नहीं किया गया तो उन्हें शिक्षा और भर्ती से जुड़े मुद्दों को लेकर दोबारा आंदोलन करना पड़ सकता है।
बाबा रामदेव ने शनिवार को हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने युवाओं की ओर से उठाई जा रही शिक्षा और रोजगार संबंधी मांगों का समर्थन किया, लेकिन आंदोलन के नाम पर हिंसा और अराजकता को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठाना युवाओं का अधिकार है, पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना या हिंसा करना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
जेन-जी को लेकर रामदेव ने कहा कि पूरी युवा पीढ़ी को एक ही नजरिए से देखना उचित नहीं है। बड़ी संख्या में युवा शिक्षा, तकनीक, खेल, उद्यमिता और सामाजिक कार्यों में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने कुछ युवाओं में बढ़ रही नशे और दूसरी गलत आदतों पर चिंता जताई। रामदेव ने कहा कि कुछ युवा हिंसक गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं, जबकि कुछ बीड़ी, सिगरेट और शराब की ओर आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने युवाओं से बुरी आदतों को छोड़कर सकारात्मक कार्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताते हुए रामदेव ने दावा किया कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के कई विद्यालयों में शिक्षक, पुस्तकें, बिजली, पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इसके कारण विद्यार्थी छोटे स्कूलों को छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कहीं पुस्तकें हैं तो पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं और कहीं शिक्षकों की नियुक्ति होने के बावजूद जरूरी संसाधनों का अभाव है।
रामदेव ने परीक्षा प्रणाली में नकल और प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं को युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की मौजूदा उपयोगिता पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिला अधिकांशतः प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं के आधार पर होने लगा है, जिससे विद्यार्थियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। के अनुसार रामदेव ने शिक्षा और भर्ती व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के कारण व्यापक युवा आंदोलन की आशंका जताई।
सरकारी नौकरियों की चयन प्रक्रिया पर भी योग गुरु ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि सरकारी नौकरियों के साक्षात्कार में बड़े स्तर पर पक्षपात और भ्रष्टाचार होता है। रामदेव ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर विचारधारा, जाति, वर्ग, समुदाय और पहचान के आधार पर उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई प्रमाण या आधिकारिक आंकड़ा प्रस्तुत नहीं किया। इसलिए सरकारी भर्ती साक्षात्कारों को लेकर उनकी टिप्पणी को उनके आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
रामदेव ने सरकार से पेपर लीक, भर्ती में कथित गड़बड़ी और स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी से जुड़ी समस्याओं को तत्काल दूर करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अभी भी व्यवस्था सुधारने का समय है। यदि युवाओं की शिकायतों का समाधान नहीं किया गया तो देश में और बड़े प्रदर्शन हो सकते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह आंदोलन की आड़ में अराजकता का समर्थन नहीं करते।
राजनीतिक वातावरण पर टिप्पणी करते हुए रामदेव ने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विरोध स्वाभाविक है, लेकिन राजनीतिक मतभेद को निजी दुश्मनी में नहीं बदलना चाहिए। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से जाति, वर्ग और समुदाय के आधार पर समाज में विभाजन पैदा करने से बचने की अपील की। रामदेव ने प्रधानमंत्री पद की आकांक्षा रखने वाले नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें धैर्य रखना चाहिए और लोकतांत्रिक तरीके से जनता का विश्वास हासिल करना चाहिए।
उन्होंने सत्ता पक्ष से विपक्ष का सम्मान करने और विपक्ष से भी जिम्मेदार भूमिका निभाने की अपील की। रामदेव ने कहा कि देश की प्रगति के लिए स्वस्थ राजनीतिक संवाद, पारदर्शी भर्ती व्यवस्था और मजबूत सरकारी शिक्षा प्रणाली आवश्यक है।