नैनीताल। उत्तराखंड की सरोवर नगरी नैनीताल में मानसून की तेज बारिश ने एक बार फिर अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। लगातार हो रही बारिश के कारण शहर के कई नाले उफान पर आ गए और सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई। वहीं नैनी झील का जलस्तर भी तेजी से बढ़कर 83.6 फीट तक पहुंच गया है। इस बढ़ोतरी को मानसून के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन के अनुसार जुलाई महीने में अब तक अच्छी बारिश दर्ज की गई है। इस माह करीब 427 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है, जिसके कारण नैनी झील के जलस्तर में 3.5 फीट की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि झील को पूरी तरह भरने के लिए अभी करीब 5.5 फीट और पानी की जरूरत है। नैनी झील का अधिकतम जलस्तर 89 फीट तक माना जाता है।
शनिवार को सुबह करीब सात बजे से शुरू हुई बारिश दोपहर डेढ़ बजे तक लगातार जारी रही। तेज बारिश के कारण शहर के कई इलाकों में पानी भर गया। लोअर मालरोड और मल्लीताल मैदान में जलभराव की स्थिति देखने को मिली। बारिश रुकने के बाद धीरे-धीरे हालात सामान्य हुए और लोगों को राहत मिली।
जुलाई का महीना नैनीताल में मानसून की बारिश के लिहाज से काफी सक्रिय रहा है। हालांकि बीच में कुछ दिनों तक बारिश में कमी आई थी, लेकिन करीब 20 दिनों तक हुई अच्छी बारिश ने झील के जलस्तर को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। लगातार बारिश के कारण झील में पानी की आवक बढ़ी है।
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी मानसून के सक्रिय रहने की संभावना जताई है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और मलबा आने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं, जिससे कई सड़क मार्ग प्रभावित हुए हैं।
शनिवार को बारिश के बाद कई मार्गों पर मलबा आने से यातायात बाधित हुआ। कैंची-हरतपा मार्ग, सेनिटोरियम-सिरोड़ी या कैंची बाइपास, खनस्यू-टांडा मार्ग और स्यूड़ा-कोंता-ककोड़-हरीशताल मार्ग पर आवाजाही प्रभावित हुई। संबंधित विभागों की टीमें इन मार्गों को खोलने में जुटी हैं।
लगातार बारिश का असर पर्यटन गतिविधियों पर भी देखने को मिला। सप्ताहांत होने के बावजूद मौसम खराब रहने के कारण नैनीताल पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या में कुछ कमी दर्ज की गई। हालांकि प्रशासन का कहना है कि पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए लगातार निगरानी रखी जा रही है।
जीआईसी मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार शनिवार को नैनीताल में अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वातावरण में नमी का स्तर भी काफी अधिक रहा। अधिकतम आद्रता 95 प्रतिशत और न्यूनतम 70 प्रतिशत दर्ज की गई। पिछले 24 घंटे में करीब 25 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।
बारिश के कारण शहर में सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। वन विभाग ने माल रोड पर बारिश के कारण झुक चुके पेड़ की टहनियों को काटकर खतरे को टाल दिया। बताया गया कि पेड़ की कुछ टहनियां बिजली की लाइन को छूने लगी थीं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई थी। शनिवार दोपहर बाद वन विभाग की टीम ने मजदूरों की मदद से टहनियों की कटाई कर समस्या का समाधान किया।
प्रशासन का कहना है कि मानसून के दौरान सभी संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। सड़क बंद होने, भूस्खलन या जलभराव जैसी स्थिति से निपटने के लिए संबंधित विभागों को अलर्ट पर रखा गया है। वहीं स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि खराब मौसम में अनावश्यक यात्रा से बचें और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
नैनी झील का बढ़ता जलस्तर जहां शहर के लिए अच्छी खबर माना जा रहा है, वहीं लगातार बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में सावधानी बरतने की जरूरत भी बनी हुई है। प्रशासन और मौसम विभाग आने वाले दिनों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।