उत्तराखंड : सीमांत जिले पिथौरागढ़ में पिछले 24 घंटे से लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। जिले के कई हिस्सों में कभी हल्की तो कभी तेज वर्षा जारी रहने से सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। भारी बारिश के कारण कई स्थानों पर मलबा आने और सड़कें बंद होने की स्थिति पैदा हो गई है। प्रशासन ने बंद मार्गों को खोलने के लिए मशीनरी और कर्मचारियों को तैनात किया है।
बारिश का सबसे अधिक असर जिले के सीमांत और पहाड़ी क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। चीन सीमा तक जाने वाले महत्वपूर्ण मार्ग भी प्रभावित हुए हैं, जिससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्रों की आवाजाही पर भी असर पड़ा है।
तवाघाट-तवाघाट हाईवे बंद
भारी वर्षा के कारण टनकपुर-तवाघाट हाईवे तवाघाट के निकट बंद हो गया है। सड़क पर मलबा आने से यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। यह मार्ग जिले के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसके माध्यम से सीमांत क्षेत्रों तक पहुंच बनाई जाती है।
हाईवे बंद होने से कई वाहन रास्ते में फंस गए हैं। यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से सड़क खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण राहत कार्यों में भी दिक्कतें आ रही हैं।
चीन सीमा को जोड़ने वाले मार्ग प्रभावित
बारिश का असर चीन सीमा तक जाने वाले मार्गों पर भी पड़ा है। तवाघाट-लिपुलेख मार्ग, जो भारत-चीन सीमा क्षेत्र तक पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण है, प्रभावित हुआ है। इसके अलावा मुनस्यारी-धापा-मिलम मार्ग भी बंद हो गया है।
सीमांत क्षेत्रों के लिए ये सड़कें रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इन मार्गों के बंद होने से स्थानीय ग्रामीणों, व्यापारियों और सुरक्षा बलों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
22 मार्गों पर यातायात ठप
जिले में बारिश और भूस्खलन के कारण कुल 22 सड़कें बंद हो गई हैं। इनमें थल-मुनस्यारी मार्ग भी शामिल है। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के कारण जगह-जगह मलबा गिरने और सड़क कटने की घटनाएं सामने आ रही हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें बंद होने से लोगों को जरूरी सामान, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य सुविधाओं तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। प्रशासन ने संबंधित विभागों को जल्द से जल्द सभी बंद मार्गों को खोलने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन और विभाग अलर्ट
मौसम की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। सड़क खोलने के लिए जेसीबी और अन्य मशीनों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया है। लोक निर्माण विभाग और सीमा सड़क संगठन के कर्मचारी लगातार काम कर रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता के आधार पर मुख्य मार्गों को खोला जा रहा है, ताकि जरूरी सेवाओं की आवाजाही बहाल हो सके। हालांकि, बारिश लगातार जारी रहने से चुनौती बनी हुई है।
पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ा खतरा
मानसून के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़क बंद होने की घटनाएं आम हो जाती हैं। पिथौरागढ़ जैसे सीमांत जिले में इसका असर ज्यादा देखने को मिलता है, क्योंकि यहां कई सड़कें ऊंचे और दुर्गम पहाड़ी इलाकों से होकर गुजरती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बारिश से पहाड़ियों की मिट्टी कमजोर हो जाती है, जिससे मलबा गिरने और सड़क टूटने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मौसम में वाहन चालकों और यात्रियों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
यात्रियों से सावधानी बरतने की अपील
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि मौसम की स्थिति को देखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचें। विशेष रूप से बंद या संवेदनशील मार्गों पर जाने से पहले संबंधित विभागों से जानकारी लेने की सलाह दी गई है।
पुलिस और प्रशासन की टीमें भी संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बनाए हुए हैं। लोगों को नदी-नालों और भूस्खलन संभावित इलाकों से दूर रहने को कहा गया है।
सीमांत क्षेत्रों के लोगों की बढ़ी परेशानी
सड़कें बंद होने से सीमांत गांवों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इन क्षेत्रों में सड़क संपर्क ही जीवनरेखा माना जाता है। राशन, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए लोगों को इन्हीं मार्गों पर निर्भर रहना पड़ता है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द सभी बंद सड़कों को खोलने की मांग की है, ताकि सामान्य जनजीवन पटरी पर लौट सके।
बारिश जारी रहने से चुनौती बरकरार
मौसम विभाग की ओर से आने वाले दिनों में भी बारिश की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में प्रशासन के सामने बंद मार्गों को खोलने के साथ-साथ नए भूस्खलन वाले स्थानों पर नजर रखने की चुनौती बनी हुई है।
फिलहाल पिथौरागढ़ जिले में राहत और बचाव कार्य जारी हैं। प्रशासन की प्राथमिकता सभी प्रमुख मार्गों को जल्द बहाल करना है, ताकि सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को राहत मिल सके।