देहरादून : शुक्रवार को हुई तेज बारिश ने शहर की व्यवस्थाओं की एक बार फिर पोल खोल दी। जलभराव के बीच सड़क और नाली का अंतर खत्म हो गया, जिसका खामियाजा एक 21 वर्षीय युवक को अपनी जान गंवाकर भुगतना पड़ा। बारिश के पानी में डूबी खुली नाली दिखाई नहीं दी और युवक उसमें गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि मानसून के दौरान नागरिक सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। हर साल बारिश के मौसम में जलभराव, खुले नाले और खराब ड्रेनेज व्यवस्था की समस्याएं सामने आती हैं, लेकिन इसके बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल पाता।
जलभराव बना जानलेवा
शुक्रवार को हुई बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में पानी भर गया था। सड़कों पर जमा पानी के कारण कई जगहों पर नालियां और गड्ढे दिखाई नहीं दे रहे थे। इसी दौरान 21 वर्षीय युवक हादसे का शिकार हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बारिश के पानी के कारण नाली का खुला हिस्सा नजर नहीं आ रहा था। युवक को इसकी जानकारी नहीं थी और वह पानी भरे रास्ते से गुजरते समय नाली में गिर गया। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि नाली को ढक दिया गया होता या आसपास चेतावनी के संकेत लगाए गए होते तो शायद युवक की जान बच सकती थी।
सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि बारिश के दौरान खुले नालों और खतरनाक स्थानों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए जाते। मानसून से पहले नगर निकाय और संबंधित विभाग अक्सर तैयारियों के दावे करते हैं, लेकिन जमीनी स्थिति कई बार इसके उलट नजर आती है।
शहर में कई स्थानों पर नालियां खुली हुई हैं। बारिश के समय इनमें पानी भर जाने से खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे स्थानों पर न तो पर्याप्त बैरिकेडिंग होती है और न ही लोगों को सतर्क करने के लिए संकेत लगाए जाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को केवल हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से तैयारी करनी चाहिए। खुले नालों को सुरक्षित करना, जल निकासी व्यवस्था सुधारना और संवेदनशील स्थानों की पहचान करना जरूरी है।
हर मानसून में दोहराती है समस्या
बारिश के मौसम में जलभराव और खुले नालों की समस्या कोई नई बात नहीं है। हर साल मानसून आते ही शहरों में ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आती हैं। कई जगहों पर पानी निकासी की समस्या के कारण सड़कें तालाब में बदल जाती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून से पहले नालियों की सफाई के साथ-साथ उनकी सुरक्षा जांच भी जरूरी है। केवल सफाई अभियान चलाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि खुले नाले लोगों के लिए खतरा न बनें।
जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही जरूरी
युवक की मौत के बाद अब प्रशासन और नगर निकाय की जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाओं को केवल दुर्भाग्यपूर्ण हादसा बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यदि किसी स्थान पर खुली नाली या जलभराव के कारण खतरा है तो वहां पहले से सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए। बारिश के दौरान नागरिकों की सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था भी जरूरी है।
लापरवाही की कीमत न चुकाएं नागरिक
इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि मानसून के दौरान छोटी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। लेकिन सवाल यह भी है कि नागरिकों को हर बार अपनी सुरक्षा खुद क्यों सुनिश्चित करनी पड़े, जबकि शहर की मूलभूत व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की है।
21 वर्षीय युवक की मौत ने शहर की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जरूरत है कि जिम्मेदार एजेंसियां इस घटना से सबक लें और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं।
बारिश हर साल आती है, लेकिन उससे जुड़ी समस्याएं भी हर साल क्यों दोहराई जाती हैं, यह सवाल अब जवाब मांग रहा है।