सिलक्यारा टनल की लागत बढ़ी, काम की रफ्तार धीमी

Update: 2026-07-09 14:14 GMT

उत्तरकाशी। उत्तराखंड के यमुनोत्री हाईवे पर निर्माणाधीन सिलक्यारा-पोलगांव सड़क सुरंग का काम तय गति से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। राज्य की सबसे लंबी करीब 4.50 किलोमीटर लंबी इस सुरंग को अगले नौ माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह लक्ष्य हासिल करना बड़ी चुनौती माना जा रहा है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी चारधाम ऑलवेदर रोड परियोजना के तहत बनाई जा रही इस सुरंग का निर्माण वर्ष 2019 में शुरू हुआ था। इसे चार साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन कई कारणों से इसकी समयसीमा लगातार बढ़ती गई। अब तक परियोजना की लागत भी बढ़कर करीब 1384 करोड़ रुपये पहुंच चुकी है।

निर्माण कार्य की मौजूदा स्थिति के अनुसार, सुरंग में अभी करीब 20 प्रतिशत काम बाकी है। सुरंग की लाइनिंग का काम जारी है, जबकि इसे डबल लेन में बांटने के लिए बीच में बनाई जा रही दीवार का निर्माण भी अभी पूरा नहीं हुआ है। इसके अलावा इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल कार्यों के लिए विशेषज्ञ टीम भी मौके पर पहुंच चुकी है। सुरंग निर्माण में देरी का सबसे बड़ा कारण वर्ष 2023 में हुआ हादसा रहा। उस समय सिलक्यारा मुहाने पर मलबा आने से सुरंग के अंदर 41 श्रमिक फंस गए थे। उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए 17 दिनों तक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया था। इस घटना ने पूरे देश और विदेश में सुर्खियां बटोरी थीं।

हादसे के बाद सुरंग निर्माण का काम कई महीनों तक प्रभावित रहा। दोबारा काम शुरू करने से पहले सुरंग में जमा पानी निकालने के लिए डि-वाटरिंग की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी। इसके बाद निर्माण कार्य फिर से शुरू किया गया। अप्रैल 2025 में इस परियोजना में बड़ी सफलता मिली थी, जब सुरंग का ब्रेक-थ्रू यानी आर-पार निर्माण कार्य पूरा हुआ। इसके बाद उम्मीद जताई गई थी कि जल्द ही सुरंग को यातायात के लिए खोल दिया जाएगा। हालांकि, अभी बचे हुए निर्माण कार्यों को देखते हुए इसमें और समय लगने की संभावना है।

अधिकारियों और विशेषज्ञों के अनुसार, शेष निर्माण कार्यों को पूरा करने में करीब एक वर्ष से डेढ़ वर्ष तक का समय लग सकता है। ऐसे में नौ माह के निर्धारित लक्ष्य को पूरा करना मुश्किल नजर आ रहा है। सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग चारधाम यात्रा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण परियोजना है। इसके पूरा होने के बाद यमुनोत्री धाम जाने वाले यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित सड़क सुविधा मिलेगी। साथ ही पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा का समय भी कम होगा।

फिलहाल निर्माण एजेंसी का पूरा ध्यान बचे हुए कार्यों को तेजी से पूरा करने पर है। इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और सुरक्षा संबंधी कामों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि सुरंग को जल्द से जल्द उपयोग के लिए तैयार किया जा सके।

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