हरिद्वार। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पतंजलि योगपीठ में मीडिया से बातचीत करते हुए योग गुरु स्वामी रामदेव ने युवा पीढ़ी में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जेन-जी (Gen-Z) का एक हिस्सा नशे की गिरफ्त में जा रहा है और कुछ युवा इसे अपनी आजादी समझने लगे हैं।

स्वामी रामदेव ने कहा कि लोकतंत्र में अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना और संघर्ष करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन स्वतंत्रता का अर्थ मनमानी करना नहीं है। उन्होंने कहा कि आजादी के साथ जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों का पालन भी जरूरी है।

स्वतंत्रता और जिम्मेदारी का बताया संबंध

स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत की आजादी लाखों लोगों के बलिदान और संघर्ष का परिणाम है। स्वतंत्रता का मतलब केवल अपनी इच्छाओं को पूरा करना नहीं, बल्कि समाज और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना भी है।

उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए लोकतांत्रिक तरीके और मर्यादा का पालन करना चाहिए।

योग गुरु ने कहा कि युवाओं को यह समझना होगा कि वास्तविक स्वतंत्रता वह है, जो व्यक्ति को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाए और समाज के लिए उपयोगी बनाए।

नशे को आजादी समझने पर जताई चिंता

स्वामी रामदेव ने कहा कि आज कुछ युवा नशे को आधुनिक जीवनशैली और आजादी से जोड़ने लगे हैं। उन्होंने कहा कि यह सोच युवाओं के भविष्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

उन्होंने कहा कि कई लड़के और लड़कियां नशे की आदतों में फंस रहे हैं, जिससे उनका स्वास्थ्य, शिक्षा और करियर प्रभावित हो रहा है।

उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे नशे से दूर रहें और अपनी ऊर्जा को शिक्षा, योग, खेल और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में लगाएं।

युवाओं की शक्ति पर दिया जोर

स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है। यदि युवा सही दिशा में आगे बढ़ेंगे तो देश तेजी से विकास कर सकता है।

उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी क्षमता पहचाननी चाहिए और ऐसी गतिविधियों से बचना चाहिए जो उनके शरीर और मन को कमजोर बनाती हैं।

उन्होंने योग और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि इससे युवाओं में आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच बढ़ती है।

लोकतांत्रिक अधिकारों का किया समर्थन

अपने बयान में स्वामी रामदेव ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में लोगों को अपनी बात रखने और सरकार से सवाल पूछने का अधिकार है।

उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन विरोध और अभिव्यक्ति में भी अनुशासन और जिम्मेदारी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता का सही उपयोग वही है, जिससे व्यक्ति और समाज दोनों का विकास हो।

स्वतंत्रता दिवस पर दिया संदेश

स्वामी रामदेव ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देशवासियों को संदेश देते हुए कहा कि भारत को मजबूत और विकसित बनाने के लिए नागरिकों को अपने कर्तव्यों का पालन करना होगा।

उन्होंने कहा कि आजादी का सम्मान तभी होगा, जब लोग अपने जीवन में अनुशासन, संस्कार और सकारात्मक सोच को अपनाएंगे।

उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे देश के भविष्य को ध्यान में रखते हुए अपने फैसले लें।

योग और अनुशासन को बताया जरूरी

स्वामी रामदेव ने कहा कि योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं बल्कि जीवन को बेहतर बनाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि योग, ध्यान और अनुशासित जीवनशैली युवाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बना सकती है।

उन्होंने कहा कि स्वस्थ युवा ही मजबूत भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

नशामुक्त भारत की जरूरत पर जोर

स्वामी रामदेव ने कहा कि देश को नशामुक्त बनाने के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर प्रयास करना होगा। परिवार, स्कूल और सामाजिक संस्थाओं को युवाओं को सही दिशा दिखाने में भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि नशे की समस्या केवल एक व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे समाज की चुनौती है।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर स्वामी रामदेव का यह बयान युवाओं की जीवनशैली, स्वतंत्रता के सही अर्थ और जिम्मेदार नागरिक बनने के महत्व पर केंद्रित रहा। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी आजादी का उपयोग देश और समाज के बेहतर भविष्य के लिए करें।

Tags: