तसलीमा नसरीन ने मांगी लेखक सुरक्षा पर बहस, बोलीं- कलम की आजादी की रक्षा जरूरी

Update: 2026-08-01 15:45 GMT
Kolkata कोलकाता। निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन ने लेखकों की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह हमारे समय की दुखद सच्चाई है कि एक लेखक को अपनी ही भाषा के शहर में पुलिस सुरक्षा की जरूरत पड़ रही है। कोलकाता में दिए बयान में तसलीमा नसरीन ने कहा कि किसी लेखक के जीवन की सुरक्षा केवल एक व्यक्ति की सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि यह बोलने के अधिकार, अलग विचार रखने की स्वतंत्रता और कलम की आजादी की रक्षा से जुड़ा विषय है।
उन्होंने कहा कि एक लोकतांत्रिक समाज में लेखकों को बिना डर के अपने विचार रखने का अधिकार होना चाहिए। तसलीमा ने कहा कि विचारों की विविधता और असहमति की आवाज लोकतंत्र की मजबूती का हिस्सा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में ऐसा समय आएगा जब किसी लेखक को अपने विचारों के कारण पुलिस सुरक्षा की आवश्यकता न पड़े। तसलीमा नसरीन लंबे समय से अपने लेखन और विचारों के कारण विवादों में रही हैं। उनके लेखन में सामाजिक मुद्दों, महिलाओं के अधिकारों और धार्मिक कट्टरता जैसे विषय प्रमुख रहे हैं। उनके विचारों को लेकर समय-समय पर विरोध भी सामने आता रहा है।
लेखिका ने कहा कि किसी भी लेखक की सुरक्षा सुनिश्चित करना समाज में अभिव्यक्ति के अधिकार को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि डर के माहौल में रचनात्मकता प्रभावित होती है और स्वतंत्र लेखन के लिए सुरक्षित वातावरण जरूरी है। तसलीमा नसरीन के बयान के बाद एक बार फिर लेखकों की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। साहित्य जगत में लंबे समय से यह मुद्दा उठता रहा है कि लेखकों को बिना किसी दबाव या भय के अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका सपना ऐसा समाज देखने का है जहां लेखक अपनी कलम के जरिए स्वतंत्र रूप से विचार व्यक्त कर सकें और उन्हें सुरक्षा की जरूरत महसूस न हो।
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