तसलीमा नसरीन का बड़ा बयान, सभी नागरिकों के लिए एक जैसे कानून की वकालत

Update: 2026-08-02 16:21 GMT

नई दिल्ली :   बांग्लादेश से निर्वासित प्रसिद्ध लेखिका तसलीमा नसरीन ने भारत में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की जोरदार वकालत की है। उन्होंने कहा कि समाज में समानता स्थापित करने और खासकर महिलाओं के खिलाफ होने वाले भेदभाव को खत्म करने के लिए समान नागरिक संहिता बेहद जरूरी है। तसलीमा ने भारत के साथ-साथ बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी ऐसे कानून की आवश्यकता बताई है।

तसलीमा नसरीन ने रविवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वह पिछले करीब 40 वर्षों से समान नागरिक संहिता की मांग करती रही हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी आधुनिक और सभ्य देश में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना चाहिए। उनके अनुसार, अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग कानून होने से कई बार महिलाओं को असमानता और भेदभाव का सामना करना पड़ता है।

लेखिका ने कहा, "मैं पिछले 40 सालों से यूसीसी के लिए लड़ रही हूं। किसी भी सभ्य देश में इसकी बहुत जरूरत है। बांग्लादेश, पाकिस्तान और भारत को समान नागरिक संहिता की जरूरत है। सभी के लिए एक जैसे कानून होने चाहिए। महिलाओं को बहुत भेदभाव का सामना करना पड़ता है और यूसीसी के जरिए इस भेदभाव को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।"

तसलीमा का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता के मसौदे की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है। सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि प्रस्तावित कानून के व्यापक प्रभाव और इसके दायरे को देखते हुए समिति बनाई गई है। समिति मसौदा विधेयक की समीक्षा करेगी और इसके बाद ही आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।

तसलीमा नसरीन ने बांग्लादेश में महिलाओं की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि समानता किसी भी सभ्य समाज की नींव होती है। उन्होंने दावा किया कि वहां अब भी कई महिलाओं को समान अधिकार नहीं मिले हैं। उन्होंने विशेष रूप से हिंदू महिलाओं के अधिकारों का मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा, "बांग्लादेश में हिंदू महिलाओं को समान अधिकार नहीं हैं। वह अपने पिता की संपत्ति की उत्तराधिकारी नहीं बन सकतीं। अगर हिंदू महिलाओं को आजादी और समान अधिकार चाहिए, तो यूसीसी जरूरी है।"

गौरतलब है कि तसलीमा नसरीन करीब 19 साल बाद शनिवार को कोलकाता लौटी थीं। यहां राज्य सरकार के एक कार्यक्रम में उन्हें सम्मानित किया गया। हालांकि, इसी कार्यक्रम के दौरान एक विवाद भी सामने आया, जिस पर तसलीमा ने नाराजगी जताई।

दरअसल, कार्यक्रम में जब तसलीमा ने प्रसिद्ध कवि जॉय गोस्वामी को मंच पर बुलाकर संबोधन के लिए आमंत्रित किया, तो दर्शकों के एक वर्ग ने विरोध शुरू कर दिया। विरोध के कारण जॉय गोस्वामी को बिना भाषण दिए मंच छोड़ना पड़ा। इस घटना पर दुख जताते हुए तसलीमा ने कहा कि इससे उन्हें अपमान महसूस हुआ।

तसलीमा ने कहा, "न केवल जॉय का अपमान हुआ, बल्कि मेरा भी अपमान हुआ क्योंकि मैंने ही उन्हें आमंत्रित किया था।" उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है और हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपने विचार व्यक्त करने से रोकना सही नहीं है। तसलीमा ने अपने भाषण में भी अभिव्यक्ति की आजादी के महत्व पर जोर दिया था। उन्होंने कहा कि समाज में विचारों की विविधता को स्वीकार करना जरूरी है।

तसलीमा नसरीन लंबे समय से महिला अधिकारों, समानता और सामाजिक सुधारों से जुड़े मुद्दों पर मुखर रही हैं। उनके हालिया बयान के बाद समान नागरिक संहिता को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज होने की संभावना है। वहीं, उनके समर्थकों का कहना है कि यूसीसी महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिलाने में मदद कर सकता है, जबकि इस मुद्दे पर देश में अलग-अलग विचार भी सामने आते रहे हैं।

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