कोलकाता: सरकारी वकील ने शनिवार को कोलकाता की एक निचली अदालत को बताया कि यूनेस्को ने कोलकाता पुलिस को पुष्टि की है कि उसका 'मास आर्ट' (Mass Art) नाम की संस्था के साथ कोई समझौता नहीं है। 'मास आर्ट' पश्चिम बंगाल के पूर्व सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के मंत्री इंद्रनील सेन से जुड़ी एक संस्था है, जिसके जरिए यूनेस्को के नाम वाले दुर्गा पूजा पास बेचे गए थे।
सरकारी वकील द्वारा अदालत को दी गई जानकारी के अनुसार, कोलकाता पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) - जो यूनेस्को के नाम वाले फर्जी दुर्गा पूजा पास बेचे जाने के मामले की जांच कर रही है - ने हाल ही में यूनेस्को को एक ईमेल भेजकर स्पष्टीकरण मांगा था कि क्या उनका 'मास आर्ट' के साथ इस संबंध में कोई समझौता है या नहीं। सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि यूनेस्को ने SIT को पुष्टि की है कि इस अंतरराष्ट्रीय संस्था का 'मास आर्ट' के साथ कोई समझौता नहीं है। 'मास आर्ट' की मालकिन मधुछंदा सेन हैं, जो पश्चिम बंगाल के पूर्व पर्यटन मंत्री और पूर्व सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के राज्य मंत्री इंद्रनील सेन (जो गायक से राजनेता बने हैं) की पत्नी हैं।
इस मामले में कोलकाता पुलिस ने पिछले महीने इंद्रनील सेन को गिरफ्तार किया था और इससे पहले इसी अदालत ने उन्हें 10 नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया था। हालांकि, शनिवार को पुलिस ने इंद्रनील सेन को उनकी पुलिस हिरासत की अवधि खत्म होने से तीन दिन पहले ही उसी अदालत में पेश किया और सरकारी वकील ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की।
सरकारी वकील ने कहा, "आरोपी के दो खातों में फिलहाल 27 लाख रुपये हैं। इस मामले से जुड़े 27 फ्रीज किए गए बैंक खातों से कुल 10 करोड़ रुपये जब्त किए गए हैं। पुलिस ने मामले से जुड़े 13 महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त किए हैं, जिनका सत्यापन किया जाना बाकी है। त्योहारों की छुट्टियों के कारण, राज्य सरकार से मांगे गए दस्तावेजों को जांच अधिकारियों तक पहुंचने में समय लग सकता है। इसलिए, आरोपी को पुलिस हिरासत में रखकर समय बर्बाद करने के बजाय, हम अब उसके लिए न्यायिक हिरासत की मांग कर रहे हैं।"
उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि इस मामले की जांच अभी एक अहम चरण में है, इसलिए आरोपी को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। अपने जवाबी तर्क में, सेन के वकील ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि राज्य उनके मुवक्किल की न्यायिक हिरासत क्यों मांग रहा है। सेन के वकील ने आगे कहा, "हालांकि, मेरे मुवक्किल को जेल में 'फर्स्ट-क्लास कैदी' (प्रथम श्रेणी के कैदी) का दर्जा दिया जाना चाहिए। साथ ही, उन्हें वे सभी दवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जानी चाहिए, जिनका वे सेवन करते हैं।"
सरकारी वकील ने सेन को 'फर्स्ट-क्लास कैदी' का दर्जा देने की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पहले इस बात पर अलग से सुनवाई होनी चाहिए कि आरोपी न्यायिक हिरासत में इस विशेष दर्जे का हकदार क्यों है। इसके बाद, सेन के वकील ने कहा कि पश्चिम बंगाल के पूर्व अग्निशमन सेवा मंत्री सुजीत बसु को भी उनके राजनीतिक और सामाजिक दर्जे को ध्यान में रखते हुए न्यायिक हिरासत में 'फर्स्ट-क्लास कैदी' का दर्जा दिया गया था। इसके बाद, निचली अदालत के जज ने सेन को 'फर्स्ट-क्लास कैदी' का दर्जा देने की अपील को मंजूरी दे दी और उन्हें 21 नवंबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया।