कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच राज्य सरकार की ओर से एक अनोखी पहल सामने आई है। शहरी विकास एवं नगरपालिका मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने शहर की हवा में मौजूद धूल के कणों को नियंत्रित करने के लिए मिस्ट स्प्रे के पानी में गुलाब जल मिलाने का प्रस्ताव रखा है। यह व्यवस्था काली पूजा, दिवाली और अन्य विशेष आयोजनों के दौरान लागू करने की योजना है। मंत्री का दावा है कि इससे हवा में मौजूद धूल के कणों को नीचे बैठाने में मदद मिलेगी और त्योहारों के दौरान आसपास के वातावरण में गुलाब की खुशबू भी फैलेगी।
हालांकि, मंत्री के इस प्रस्ताव पर पर्यावरणविदों ने सवाल उठाए हैं। पर्यावरणविद् सोमेंद्र मोहन घोष ने इसे दिखावटी कदम बताते हुए कहा कि कोलकाता की हवा को परफ्यूम की नहीं, बल्कि प्रदूषण के वास्तविक स्रोतों पर कार्रवाई की जरूरत है। उनका कहना है कि गुलाब जल की खुशबू से कुछ समय के लिए वातावरण अच्छा महसूस हो सकता है, लेकिन इससे प्रदूषण की मूल समस्या का समाधान नहीं होगा।
क्या है अग्निमित्रा पॉल का गुलाब जल वाला प्लान?
मंत्री अग्निमित्रा पॉल के अनुसार, कोलकाता नगर निगम (KMC) पहले से ही शहर के अलग-अलग हिस्सों में पानी का मिस्ट स्प्रे करवा रहा है। खासतौर पर उन इलाकों में इन मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI अपेक्षाकृत अधिक दर्ज किया जाता है।अब सरकार की योजना है कि काली पूजा, दिवाली और अन्य विशेष आयोजनों के दौरान मिस्ट स्प्रे में सामान्य पानी के साथ गुलाब जल भी मिलाया जाए।मंत्री का कहना है कि पानी की महीन बूंदें हवा में मौजूद धूल के कणों को नीचे बैठाने में सहायता कर सकती हैं। वहीं गुलाब जल मिलाने से आयोजन स्थलों और आसपास के वातावरण में खुशबू फैलेगी।
AQI कम करने के लिए पहले से चल रहा है मिस्ट स्प्रे
अग्निमित्रा पॉल ने बताया कि कोलकाता नगर निगम शहर के अलग-अलग हिस्सों में नियमित रूप से पानी का मिस्ट स्प्रे करवा रहा है। इसका उद्देश्य हवा में मौजूद धूल के कणों को नियंत्रित करना और प्रदूषण के स्तर को कम करने में मदद करना है।मंत्री के अनुसार, शहर के जिन इलाकों में AQI अपेक्षाकृत अधिक रहता है, वहां विशेष रूप से इन मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका कहना है कि सरकार अपनी क्षमता के अनुसार शहर की हवा को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
विक्टोरिया मेमोरियल समेत कई जगहों पर स्प्रे की व्यवस्था
कोलकाता में त्योहारों के दौरान साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण अभियान के तहत विशेष पानी छिड़कने वाली मशीनों का इस्तेमाल भी किया जा रहा है।
जिन प्रमुख स्थानों पर स्प्रे की व्यवस्था की गई है, उनमें शामिल हैं:
मैदान क्षेत्र
विक्टोरिया मेमोरियल
विजय स्मारक
ईस्टर्न कमांड मैदान
फोर्ट विलियम
कालीसिंह ग्राउंड
शहर के प्रमुख और व्यस्त बाजार क्षेत्र
पर्यावरणविद् सोमेंद्र मोहन घोष ने बताया दिखावटी कदम
मंत्री के गुलाब जल वाले प्रस्ताव पर पर्यावरणविद् सोमेंद्र मोहन घोष ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कोलकाता में वायु प्रदूषण की समस्या का समाधान सुगंधित पानी का छिड़काव करने से नहीं होगा।उन्होंने कहा कि गुलाब जल छिड़कने से हवा में कुछ समय के लिए अच्छी खुशबू जरूर फैल सकती है, लेकिन इससे प्रदूषण फैलाने वाले वास्तविक कारण समाप्त नहीं होंगे।घोष ने मंत्री के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गुलाब की खुशबू कुछ ही देर में खत्म हो जाएगी। उनके मुताबिक, कोलकाता की हवा को परफ्यूम की नहीं, बल्कि प्रदूषण के स्रोतों पर ठोस कार्रवाई की जरूरत है।
पुराने वाहन और सड़क किनारे जलने वाले कोयले पर कार्रवाई की मांग
सोमेंद्र मोहन घोष ने प्रदूषण के वास्तविक स्रोतों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए पुराने पेट्रोल और डीजल वाहनों को भी बड़ी समस्या बताया।उनके अनुसार, पुराने वाहनों से निकलने वाला धुआं पीएम 2.5, पीएम 10 और ब्लैक कार्बन जैसे प्रदूषकों की मात्रा बढ़ाने में योगदान देता है। इसलिए ऐसे वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करना जरूरी है।इसके अलावा उन्होंने सड़क किनारे लगने वाले खाने-पीने के ठेलों और दुकानों पर कोयले से खाना पकाने की प्रथा पर रोक लगाने की मांग की। उनका सुझाव है कि छोटे दुकानदारों को एलपीजी या बिजली से चलने वाले स्वच्छ खाना पकाने के विकल्प अपनाने में आर्थिक और व्यावहारिक सहायता दी जानी चाहिए।
100 वॉटर कैनन लगाने का दिया सुझाव
पर्यावरणविद् ने कोलकाता में धूल नियंत्रण के लिए एक और सुझाव दिया है। उन्होंने शहर में करीब 100 वॉटर कैनन लगाने की बात कही है।उनका कहना है कि इन मशीनों की मदद से सड़कों, फ्लाईओवर और धूल वाले प्रमुख रास्तों की नियमित धुलाई की जा सकती है। इससे सड़कों पर जमा धूल को हटाने और पेड़ों की पत्तियों पर जमे धूल के कणों को साफ करने में मदद मिल सकती है।
दिवाली और काली पूजा पर प्रदूषण नियंत्रण की चुनौती
कोलकाता में काली पूजा और दिवाली के दौरान पटाखों के इस्तेमाल से भी वायु प्रदूषण बढ़ने की चिंता रहती है। त्योहारों के समय बड़ी संख्या में लोग सार्वजनिक स्थानों और पूजा पंडालों में पहुंचते हैं।इस दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं और अन्य प्रदूषक हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। पश्चिम बंगाल पुलिस ने त्योहारों के लिए ग्रीन पटाखों की बिक्री और निर्धारित समय में आतिशबाजी को लेकर नियम भी लागू किए हैं।
गुलाब जल से बदलेगी कोलकाता की हवा या बढ़ेगी बहस?
मंत्री अग्निमित्रा पॉल का प्रस्ताव जहां त्योहारों के दौरान धूल नियंत्रण और वातावरण को सुगंधित बनाने की पहल के रूप में सामने आया है, वहीं पर्यावरणविद् इसे प्रदूषण की मूल समस्या से ध्यान हटाने वाला कदम मान रहे हैं।एक तरफ सरकार मिस्ट स्प्रे और गुलाब जल के इस्तेमाल से सार्वजनिक स्थानों को साफ और सुगंधित बनाने की योजना पर काम कर रही है। दूसरी तरफ पर्यावरणविद् पुराने वाहनों के उत्सर्जन, कोयले से खाना पकाने और सड़कों की धूल जैसे स्रोतों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।कुल मिलाकर, कोलकाता में बढ़ता वायु प्रदूषण अब एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी मुद्दा बन गया है। गुलाब जल वाले मिस्ट स्प्रे का प्रस्ताव कितना प्रभावी साबित होगा, यह इसके वास्तविक क्रियान्वयन और प्रदूषण के आंकड़ों से ही स्पष्ट होगा। फिलहाल मंत्री की पहल और पर्यावरणविद् की आलोचना ने शहर में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर नई बहस छेड़ दी है।