राजकोट। गुजरात के राजकोट जिले में लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वाले 17 फर्जी डॉक्टरों का पर्दाफाश हुआ है। राजकोट ग्रामीण स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की टीम ने अलग-अलग इलाकों में छापेमारी कर बिना मेडिकल डिग्री और लाइसेंस के इलाज करने वाले 17 लोगों को पकड़ा है। हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें कोई 10वीं पास है तो कोई 11वीं या 12वीं तक पढ़ा है। कुछ आरोपी सामान्य ग्रेजुएट हैं, लेकिन किसी के पास भी एलोपैथिक चिकित्सा की मान्यता प्राप्त डिग्री नहीं मिली।
एक ही दिन में 17 फर्जी डॉक्टर पकड़े गए
राजकोट जिला पुलिस प्रमुख विजय सिंह गुर्जर के अनुसार, ग्रामीण और औद्योगिक क्षेत्रों में बिना वैध योग्यता के क्लीनिक चलाने वालों के खिलाफ विशेष अभियान शुरू किया गया था। एसओजी की अलग-अलग टीमों ने एक ही दिन में 17 लोगों को पकड़ा। पाटनवाव और जसदन सहित जेतपुर, शापर, कोटडासांगाणी, मेटोडा जीआईडीसी, पडधरी और गोंडल तालुका जैसे इलाकों में कार्रवाई की गई।
कंपाउंडर से बन गए डॉक्टर, मरीजों को लगाते थे इंजेक्शन
जांच में सामने आया कि पकड़े गए लोगों में तीन आरोपी 10वीं पास, आठ 12वीं पास, तीन 11वीं पास और तीन सामान्य ग्रेजुएट हैं। इनमें से कई पहले डॉक्टरों के सहायक यानी कंपाउंडर या मेडिकल स्टोर पर काम करते थे। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने खुद के क्लीनिक खोल लिए और बिना आवश्यक चिकित्सा योग्यता के मरीजों का इलाज शुरू कर दिया। आरोपी बुखार, सर्दी और खांसी जैसी बीमारियों का इलाज करने के साथ एलोपैथिक दवाएं देते और इंजेक्शन भी लगाते थे।
25 साल से चला रहा था क्लीनिक
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि एक आरोपी करीब 25 वर्षों से और दूसरा लगभग 20 वर्षों से क्लीनिक चला रहा था। बाकी आरोपी भी अलग-अलग अवधि से अवैध रूप से चिकित्सा का काम कर रहे थे। कुछ ने हाल ही में प्रैक्टिस शुरू की थी।
कई फर्जी डॉक्टर क्लीनिक बंद कर फरार
पुलिस अभियान की जानकारी मिलने के बाद कुछ अन्य संदिग्ध अपने क्लीनिक बंद करके फरार हो गए। पुलिस अब उनकी तलाश कर रही है। पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ संबंधित चिकित्सा कानूनों के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू की गई है। पुलिस ने साफ किया है कि जिले में फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।
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