देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के समरवैली स्कूल में कक्षा 11वीं की छात्रा से कथित छेड़छाड़ का मामला सामने आने के बाद शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को जमकर हंगामा हुआ। छात्रा की मां ने स्कूल के भौतिक विज्ञान के शिक्षक पर बेटी को अनुचित तरीके से छूने और लंबे समय से परेशान करने का गंभीर आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन को लिखित शिकायत देने के बावजूद आरोपी शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। इसके उलट छात्रा पर शिकायत वापस लेने और मामले को दबाने का दबाव बनाया गया।
मामले को लेकर शुक्रवार को छात्रा की मां स्कूल पहुंचीं, जहां प्रबंधन के साथ विवाद हो गया। आरोप है कि इस दौरान स्कूल के मुख्य गेट बंद कर दिए गए और परिजनों को बाहर निकलने से रोका गया। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों से जानकारी ली। हालांकि, शिक्षक और स्कूल प्रबंधन पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
फिजिक्स शिक्षक पर डेढ़ महीने से परेशान करने का आरोप
छात्रा की मां के अनुसार, उनकी बेटी कक्षा 11वीं में पढ़ती है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल में भौतिक विज्ञान पढ़ाने वाला शिक्षक पिछले करीब डेढ़ महीने से बेटी के साथ अनुचित व्यवहार कर रहा था।मां का कहना है कि शिक्षक छात्रा को गलत तरीके से छूता था और उसके व्यवहार से बेटी असहज महसूस करती थी।छात्रा ने इसकी जानकारी अपनी मां को दी थी। परिजनों के अनुसार, संबंधित शिक्षक के व्यवहार को लेकर अन्य छात्राओं ने भी आपत्ति जताई थी।हालांकि, ये सभी आरोप शिकायतकर्ता पक्ष के बयान पर आधारित हैं। मामले की वास्तविक परिस्थितियां निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगी।
15 छात्राओं के हस्ताक्षर से दी थी शिकायत
छात्रा की मां ने दावा किया है कि उन्होंने 15 अक्टूबर को स्कूल की प्रधानाचार्य को लिखित शिकायत दी थी।इस शिकायत पत्र पर उनकी बेटी समेत कुल 15 छात्राओं के हस्ताक्षर होने की बात कही गई है।परिजनों के अनुसार, शिकायत में शिक्षक के कथित अनुचित व्यवहार का उल्लेख करते हुए कार्रवाई की मांग की गई थी।मां का कहना है कि प्रधानाचार्य ने शुरुआत में छात्रा की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संबंधित शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था।लेकिन बाद में परिवार को किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली। इससे परिजनों की नाराजगी बढ़ गई।
14 अक्टूबर की घटना के बाद बढ़ा विवाद
छात्रा की मां के अनुसार, 14 अक्टूबर को उनकी बेटी स्कूल पहुंचने में देर हो जाने के कारण शिक्षक के संपर्क में आई थी।आरोप है कि इस दौरान शिक्षक ने छात्रा को धक्का देते हुए प्रधानाचार्य के कार्यालय तक पहुंचाया।इसके बाद छात्रा ने अपनी मां को स्कूल में हो रहे कथित व्यवहार की जानकारी विस्तार से दी।मां ने बताया कि बेटी की बात सुनने के बाद उन्होंने अगले दिन स्कूल जाकर शिकायत दर्ज कराने का निर्णय लिया।उनका कहना है कि परिवार ने शुरुआत में बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को देखते हुए मामला स्कूल स्तर पर ही सुलझाने का प्रयास किया था।
स्कूल प्रबंधन पर छात्रा को डराने का आरोप
इस मामले में स्कूल प्रबंधन के रवैये पर भी गंभीर सवाल उठे हैं।छात्रा की मां का आरोप है कि लिखित शिकायत के बाद उनकी बेटी को प्रधानाचार्य कार्यालय में बुलाया गया।वहां मौजूद अधिकारियों ने कथित तौर पर छात्रा की शिकायत पर सवाल उठाए और उससे अनुचित व्यवहार का विवरण देने को कहा।परिवार का आरोप है कि छात्रा को यह कहकर दबाव में लेने का प्रयास किया गया कि बीच शैक्षणिक सत्र में दूसरे स्कूल में दाखिला मिलना मुश्किल हो सकता है।मां ने यह भी दावा किया कि उनकी बेटी और बेटे की पढ़ाई प्रभावित होने का डर दिखाया गया।हालांकि, इन आरोपों पर स्कूल प्रबंधन का विस्तृत और स्वतंत्र रूप से सत्यापित पक्ष सामने आना बाकी है।
शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने का दावा
परिजनों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने शिकायत पर उचित कार्रवाई करने के बजाय मामले को खत्म कराने का प्रयास किया।मां का कहना है कि बेटी की शिकायत के संबंध में कुछ बाहरी लोगों को भी शामिल किया गया, जिससे परिवार की निजी बात अन्य लोगों तक पहुंच गई।परिवार ने इस पर नाराजगी व्यक्त की है।छात्रा की मां ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई करने और स्कूल प्रबंधन से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है।परिजनों का कहना है कि किसी भी छात्रा की शिकायत को गंभीरता से लेना और उसे सुरक्षित माहौल देना विद्यालय की जिम्मेदारी है।
शुक्रवार को स्कूल पहुंची मां, जमकर हुआ हंगामा
शुक्रवार को छात्रा की मां दोबारा स्कूल पहुंचीं।जानकारी के अनुसार, वह पहले दी गई शिकायत पर हुई कार्रवाई की जानकारी लेने और शिकायत की प्राप्ति का प्रमाण हासिल करने गई थीं।इस दौरान स्कूल प्रशासन के साथ उनकी बहस हो गई।परिवार का आरोप है कि स्कूल के मुख्य गेट बंद कर दिए गए और उन्हें परिसर से बाहर जाने से रोका गया।
गेट बंद किए जाने के बाद विवाद और बढ़ गया।
घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। उस समय स्कूल परिसर में परिजन और पुलिसकर्मी मौजूद थे।हालांकि, गेट किन परिस्थितियों में बंद किए गए और किसी व्यक्ति को जानबूझकर बाहर जाने से रोका गया था या नहीं, इसकी पुष्टि जांच से होगी।पुलिस ने मौके पर पहुंचकर ली जानकारीस्कूल में हंगामे की सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनाक्रम की जानकारी जुटाई।शुक्रवार दोपहर की रिपोर्ट के अनुसार, सीओ डालनवाला ने बताया कि उस समय तक पुलिस को मामले में औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई थी।उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।अन्य स्थानीय रिपोर्टों में पुलिस द्वारा संबंधित पक्षों से बातचीत किए जाने की जानकारी दी गई है।फिलहाल आरोपी शिक्षक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने या गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।
छात्रा की सुरक्षा को लेकर परिवार चिंतित
घटना के बाद छात्रा के परिवार ने उसकी मानसिक स्थिति और सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।मां का कहना है कि बेटी स्कूल जाने से घबरा रही है।परिजनों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और छात्राओं को सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाए।इस प्रकार की शिकायतों में विद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि छात्रा की बात संवेदनशीलता से सुनी जाए और उसकी गोपनीयता बनाए रखी जाए।किसी शिकायतकर्ता पर दबाव डालना या उसे प्रताड़ित करना गंभीर चिंता का विषय हो सकता है।
नाबालिगों की सुरक्षा के लिए बने हैं सख्त कानून
स्कूलों में बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न की शिकायतों पर कार्रवाई के लिए पॉक्सो अधिनियम के तहत विशेष कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।यदि शिकायत में नाबालिग के खिलाफ यौन अपराध की जानकारी सामने आती है, तो संबंधित प्रावधानों के अनुसार पुलिस को सूचना देना आवश्यक होता है।ऐसे मामलों में बच्चे की पहचान और गोपनीयता बनाए रखना भी जरूरी है।कानून का उद्देश्य पीड़ित बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ आरोपों की निष्पक्ष जांच करना है।इस मामले में भी संबंधित अधिकारियों के लिए छात्राओं की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा।
स्कूल प्रबंधन के जवाब पर टिकी निगाहें
समरवैली स्कूल में सामने आए इस विवाद के बाद अब स्कूल प्रबंधन की आधिकारिक प्रतिक्रिया और पुलिस की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।परिवार ने शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं, आरोपों की सत्यता जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्धारित होगी।