बारिश के दौरान 6 वर्षीय दिव्यांग बच्चा 8 फीट गहरे नाले में बहा, SDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

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Update: 2026-07-29 08:54 GMT
Bareilly. बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के आंवला कस्बे में मंगलवार शाम हुई तेज बारिश के दौरान एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। मोहल्ला खेड़ा निवासी छह वर्षीय दिव्यांग बच्चा प्रीत बारिश के पानी में नहाते समय अचानक पैर फिसलने से करीब आठ फीट गहरे नाले में गिर गया और तेज बहाव में बह गया। घटना के बाद परिजनों में चीख-पुकार मच गई, जबकि स्थानीय लोगों, नगर पालिका, पुलिस, फायर ब्रिगेड और बाद में एसडीआरएफ की टीम ने देर रात तक बच्चे की तलाश जारी रखी, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उसका कोई सुराग नहीं मिल सका। जानकारी के अनुसार, प्रीत के पिता नन्दराम प्रजापति मिट्टी के बर्तन बनाने का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि उनका छह वर्षीय बेटा प्रीत एक पैर से दिव्यांग था और वॉकर की सहायता से चलता था। मंगलवार शाम करीब चार बजे के बाद हुई बारिश के दौरान वह मोहल्ले के अन्य बच्चों के साथ गमाडेट मंदिर के पास बारिश के पानी में नहा रहा था।

इसी दौरान अचानक उसका पैर फिसल गया और वह पास से गुजर रहे गहरे नाले में जा गिरा। बारिश के कारण पूरे मोहल्ले का पानी उसी नाले में तेजी से बह रहा था, जिससे बच्चा देखते ही देखते तेज बहाव में लापता हो गया। घटना के समय मौजूद अन्य बच्चों ने तुरंत परिजनों और आसपास के लोगों को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और अपने स्तर पर बच्चे की तलाश शुरू कर दी। कुछ ही देर में घटना की जानकारी प्रशासन को भी दी गई, जिसके बाद राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। सूचना मिलते ही एसडीएम सुशील कुमार मिश्रा, तहसीलदार अतुल सेन सिंह, नायब तहसीलदार दीप्ति पाल, नगर पालिका अध्यक्ष सैय्यद आबिद अली, ईओ प्रदीप गिरि, कोतवाल बीनू सिंह, लेखपाल राहुल शर्मा सहित कई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। नगर पालिका की पांच अलग-अलग टीमों, पुलिस बल और फायर ब्रिगेड के जवानों को बच्चे की तलाश में लगाया गया। नाले की सफाई और खोज अभियान को तेज करने के लिए दो जेसीबी मशीनों की भी मदद ली गई, ताकि बहाव में आई गाद और मलबे को हटाया जा सके। लगातार कई घंटों तक चले खोज अभियान के बावजूद देर शाम तक बच्चे का कोई पता नहीं चल सका।

इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष संजीव सक्सेना ने कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह को घटना की जानकारी दी। मंत्री ने तत्काल जिलाधिकारी से बातचीत कर विशेष बचाव दल भेजने के निर्देश दिए। इसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीआरएफ की टीम को तुरंत आंवला रवाना किया गया। रात में एसडीआरएफ के जवानों ने मौके पर पहुंचकर आधुनिक उपकरणों के साथ नाले में व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया। टीम ने देर रात तक नाले के विभिन्न हिस्सों की जांच की, लेकिन बच्चे का कोई पता नहीं चल पाया। प्रशासन ने बताया कि तलाश अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक बच्चे का पता नहीं चल जाता। नगर पालिका परिषद आंवला के अधिशासी अधिकारी प्रदीप गिरि ने बताया कि बच्चे की तलाश के लिए नगर पालिका की पांच टीमें लगातार काम कर रही हैं। एसडीआरएफ, पुलिस और अन्य विभागों के कर्मचारी भी अभियान में जुटे हुए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही बच्चे का पता लगा लिया जाएगा। इस घटना के बाद नगर में खुले नालों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि आंवला नगर में कई बड़े और गहरे नाले खुले पड़े हैं, लेकिन उनके किनारों पर न तो सुरक्षा फेंसिंग लगाई गई है और न ही सुरक्षा दीवार बनाई गई है। बरसात के मौसम में ये खुले नाले लगातार हादसों का कारण बनते हैं। लोगों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायतों के बावजूद सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए। गौरतलब है कि लगभग छह वर्ष पहले भी बारिश के दौरान मोहल्ला भुर्जीटोला से विलायतगंज जाने वाले मार्ग पर एक बालक खुले नाले में गिर गया था, जिसकी मौत हो गई थी। इसके बावजूद प्रशासन और नगर पालिका द्वारा स्थायी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए। ताजा घटना के बाद एक बार फिर खुले नालों की सुरक्षा और बरसात के दौरान एहतियाती इंतजामों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए सभी खुले नालों पर सुरक्षा जाल, फेंसिंग या दीवार का निर्माण कराया जाए।
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