36 मिनट में 7 विधेयक पारित मानसून सत्र में नहीं हुआ प्रश्नकाल
36 मिनट में 7 बिल पास सदन में नहीं हुआ प्रश्नकाल
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान सदन में सिर्फ 36 मिनट में 7 विधेयक पारित किए जाने की बात सामने आई है। इस दौरान कई विधेयक पेश किए गए और उन पर सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी, लेकिन प्रश्नकाल आयोजित नहीं हो सका।
संसदीय कार्यवाही के इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। प्रश्नकाल को सांसदों के लिए सरकार से सीधे सवाल पूछने और विभिन्न मुद्दों पर जवाब मांगने का महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। ऐसे में प्रश्नकाल नहीं होने को लेकर विपक्ष की ओर से सवाल उठाए जा सकते हैं।
मानसून सत्र में सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश किए गए। इनमें अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े प्रस्ताव शामिल रहे। निर्धारित समय में विधायी कार्य तेजी से आगे बढ़ने के कारण सदन में कम अवधि के भीतर कई विधेयकों को पारित किया गया।
36 मिनट में सात विधेयक
संसदीय कार्यवाही के दौरान महज 36 मिनट के भीतर सात विधेयकों का पारित होना इस सत्र की तेज विधायी प्रक्रिया को दर्शाता है। आमतौर पर किसी विधेयक पर चर्चा, सदस्यों की राय और जवाब के लिए पर्याप्त समय दिया जाता है, लेकिन इस दौरान कार्यवाही अपेक्षाकृत तेजी से आगे बढ़ी।
वहीं, प्रश्नकाल न होने के कारण सांसदों को सरकार से अपने सवालों के जवाब मांगने का नियमित अवसर नहीं मिल पाया। प्रश्नकाल के दौरान सांसद विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से जुड़े सवाल उठाते हैं और सरकार की ओर से आधिकारिक जवाब दिए जाते हैं।
विपक्ष उठा सकता है सवाल
प्रश्नकाल के नहीं होने और विधेयकों को तेजी से पारित किए जाने के मुद्दे पर विपक्ष सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा सकता है। विपक्ष अक्सर यह मांग करता रहा है कि महत्वपूर्ण विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा और सांसदों को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। संसद में विधायी कामकाज और प्रश्नकाल दोनों लोकतांत्रिक जवाबदेही के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। ऐसे में 36 मिनट में सात विधेयकों का पारित होना और प्रश्नकाल का नहीं होना मानसून सत्र की कार्यवाही का प्रमुख घटनाक्रम बन गया है।