भारतीय बैडमिंटन में डबल धमाका, लक्ष्य सेन और पीवी सिंधु बने चैंपियन
हाइलो ओपन में रचा नया इतिहास
दिल्ली। भारतीय बैडमिंटन स्टार लक्ष्य सेन ने जर्मनी में आयोजित हाइलो ओपन 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुष एकल का खिताब अपने नाम कर लिया है। रविवार को खेले गए फाइनल मुकाबले में लक्ष्य सेन ने इंडोनेशिया के दिग्गज खिलाड़ी और गत चैंपियन जोनाथन क्रिस्टी को सीधे गेमों में 21-17, 21-10 से हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इस उपलब्धि के साथ लक्ष्य सेन दो बार हाइलो ओपन खिताब जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। इससे पहले उन्होंने 2019 में भी यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट जीता था।
25 वर्षीय लक्ष्य सेन ने फाइनल मुकाबले में शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। पहले गेम में जोनाथन क्रिस्टी ने उन्हें कड़ी चुनौती दी, लेकिन लक्ष्य ने शानदार स्मैश, बेहतरीन कोर्ट कवरेज और सटीक शॉट्स के दम पर 21-17 से जीत हासिल की। दूसरे गेम में भारतीय खिलाड़ी पूरी तरह हावी नजर आए और उन्होंने 21-10 से मुकाबला जीतकर चैंपियनशिप अपने नाम कर ली। इस जीत के साथ लक्ष्य सेन का लंबे समय से चला आ रहा खिताबी इंतजार भी समाप्त हो गया। यह वर्ष 2026 में उनका पहला बीडब्ल्यूएफ खिताब है। इससे पहले वह इसी वर्ष प्रतिष्ठित ऑल इंग्लैंड ओपन के फाइनल तक पहुंचे थे, लेकिन खिताब जीतने से चूक गए थे।
जर्मनी के सारब्रुकेन में आयोजित इस टूर्नामेंट में लक्ष्य सेन का सफर शानदार रहा। सेमीफाइनल मुकाबले में उन्होंने फ्रांस के टोमा जूनियर पोपोव को 21-17, 21-13 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया था। इसके बाद खिताबी मुकाबले में इंडोनेशियाई खिलाड़ी के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की। लक्ष्य सेन की यह उपलब्धि भारतीय बैडमिंटन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हाइलो ओपन जैसे अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में दो बार चैंपियन बनना उनकी निरंतर मेहनत, तकनीकी क्षमता और बड़े मुकाबलों में दबाव झेलने की योग्यता को दर्शाता है।
भारत के लिए यह दिन दोहरी खुशी लेकर आया। महिला एकल वर्ग में दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु ने भी हाइलो ओपन 2026 का खिताब अपने नाम किया। सिंधु ने डेनमार्क की लाइन होजमार्क केजर्सफेल्ड को 21-12, 21-14 से हराकर महिला एकल में शानदार जीत दर्ज की। यह सिंधु का इस सीजन का दूसरा बीडब्ल्यूएफ खिताब है। इससे पहले उन्होंने जुलाई में जापान ओपन जीता था। लक्ष्य सेन और पीवी सिंधु की इस दोहरी सफलता ने अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन में भारत की मजबूत उपस्थिति को एक बार फिर उजागर किया है। दोनों खिलाड़ियों की जीत भारतीय खेल प्रेमियों के लिए यादगार उपलब्धि बन गई है।