नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में 2.21 लाख रुपये की साइबर जालसाजी की जांच करते हुए दक्षिण-पश्चिम जिला साइबर पुलिस को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ठगी नेटवर्क का सुराग मिला है। शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने अपनी पड़ताल का दायरा बढ़ाया तो 10 करोड़ रुपये से अधिक की कथित साइबर धोखाधड़ी से जुड़े नेटवर्क की जानकारी सामने आई। इस मामले में मध्य प्रदेश के जबलपुर से मिले सुराग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक अपेक्षाकृत छोटी रकम की शिकायत से शुरू हुई जांच अब बड़े पैमाने पर साइबर अपराध और अंतरराज्यीय तथा अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की पड़ताल तक पहुंच गई है।
जानकारी के अनुसार, दिल्ली में एक व्यक्ति से 2.21 लाख रुपये की साइबर ठगी की शिकायत सामने आई थी। मामले की जांच दक्षिण-पश्चिम जिला साइबर पुलिस को सौंपी गई। पुलिस ने शिकायत से जुड़े वित्तीय लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल शुरू की। इसी दौरान जांच की कड़ियां मध्य प्रदेश के जबलपुर से जुड़ती दिखाई दीं।जबलपुर से मिले सुराग के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई तो पुलिस को कथित तौर पर ऐसे नेटवर्क की जानकारी मिली, जिसका संबंध 10 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी से बताया जा रहा है।
फर्जी ट्रैफिक चालान के लिंक से हुई थी ठगी
दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस उपायुक्त अमित गोयल के अनुसार, 28 नवंबर 2025 को साइबर थाने में 2.21 लाख रुपये की ठगी की ई-एफआईआर दर्ज हुई थी। पीड़ित को यातायात नियमों के उल्लंघन का चालान भरने के नाम पर एक एसएमएस भेजा गया था। संदेश में दिए गए लिंक पर क्लिक करने के बाद उसके क्रेडिट कार्ड से 2.21 लाख रुपये की अनधिकृत निकासी हो गई।पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की तो पता चला कि इसी तरह के फर्जी संदेश बड़ी संख्या में लोगों को भेजे जा रहे थे। जांच में लगभग 3,300 संदिग्ध एसएमएस भेजे जाने की जानकारी सामने आई।
जबलपुर के स्कूली छात्र के मोबाइल से खुला राज
पुलिस ने फर्जी संदेश भेजने वाले मोबाइल नंबर की जांच की तो उसका कनेक्शन मध्य प्रदेश के जबलपुर से मिला। सिम कार्ड नितेश पटेल के नाम पर पंजीकृत था, लेकिन उसका इस्तेमाल उनका स्कूली छात्र भांजा कर रहा था।छात्र के मोबाइल की जांच में 'विंगो कैश' नाम का एक एप मिला। यह एप उसे एक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से मिला था। जांच में पता चला कि मोबाइल से करीब 3,300 फर्जी चालान संदेश अपने आप भेजे जा चुके थे।पुलिस के मुताबिक, एप इस्तेमाल करने वाले लोगों को छोटे-छोटे रिवॉर्ड दिए जाते थे। जब उपयोगकर्ता रिवॉर्ड हासिल करने की प्रक्रिया पूरी करते थे, तब उनके मोबाइल की स्क्रीन लगभग 30 सेकंड के लिए लॉक हो जाती थी। इसी दौरान एप फोन से नौ से 12 फर्जी एसएमएस भेज देता था।
एक से तीन रुपये का लालच देकर मोबाइल का इस्तेमाल
जांच में सामने आया कि विंगो कैश एप के माध्यम से लोगों को एक से तीन रुपये तक का रिवॉर्ड दिया जाता था। उपयोगकर्ताओं को यह जानकारी नहीं होती थी कि उनके मोबाइल से दूसरे लोगों को संदिग्ध लिंक वाले संदेश भेजे जा रहे हैं।इन संदेशों में ट्रैफिक चालान, डिलीवरी पते के सत्यापन और रिवॉर्ड प्वाइंट के नाम पर लिंक भेजे जाते थे। लिंक खोलने वाले लोगों को फर्जी वेबसाइटों पर ले जाकर उनकी बैंकिंग और कार्ड संबंधी जानकारी हासिल करने का प्रयास किया जाता था।इस तरीके से साइबर अपराधियों ने सामान्य मोबाइल उपयोगकर्ताओं के फोन को अपने फिशिंग नेटवर्क का हिस्सा बना लिया था।
कुवैत के बैंक खाते तक पहुंची जांच
पुलिस ने जब पीड़ित के 2.21 लाख रुपये के लेनदेन की जांच की तो उसका वित्तीय सुराग नेशनल बैंक ऑफ कुवैत के एक खाते तक पहुंचा।इसके बाद जांचकर्ताओं ने अपनी रणनीति बदली और यह पता लगाना शुरू किया कि रिवॉर्ड एप के उपयोगकर्ताओं को भुगतान कहां से किया जा रहा था।इस पड़ताल में मुंबई की श्री बालाजी एंटरप्राइजेज के नाम पर संचालित बैंक खाते की जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार, इस खाते से केवल तीन दिनों में 41 हजार से अधिक उपयोगकर्ताओं को छोटे-छोटे भुगतानों के रूप में लगभग दो करोड़ रुपये भेजे गए थे।इस लेनदेन की जांच से गिरोह के बैंकिंग नेटवर्क का पता चला।
पांच राज्यों में छापेमारी, पांच आरोपी गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर मुंबई, लखनऊ, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान और पंजाब में कार्रवाई की।पुलिस ने राजस्थान के उदयपुर निवासी मोती सिंह बघेला, उत्तर प्रदेश के हरदोई निवासी हर्षपाल, दिल्ली निवासी विक्की, उदयपुर निवासी विशाल दास वैष्णव और पंजाब के मलेरकोटला निवासी बृजेश कुमार को गिरफ्तार किया है।पुलिस के अनुसार, आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाएं थीं। कुछ बैंक खाते संचालित करते थे, जबकि अन्य कथित तौर पर फर्मों के दस्तावेज तैयार कराने, कमीशन पर खाते खुलवाने और बैंकिंग सामग्री उपलब्ध कराने में शामिल थे।
544 शिकायतों से जुड़ा नेटवर्क
जांच में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज 544 शिकायतों का संबंध इस नेटवर्क से सामने आया है। पुलिस के अनुसार, संबंधित खातों में 10 करोड़ रुपये से अधिक के ठगी से जुड़े लेनदेन की जानकारी मिली है।आरोपियों के कब्जे से 15 मोबाइल फोन और टैबलेट, 59 डेबिट कार्ड, 52 पासबुक और चेकबुक, 14 कंपनियों की मुहरें, पांच पीओएस मशीनें, आठ क्यूआर स्कैनर, एक सोने की चेन और एक कार बरामद की गई है।
साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्कता जरूरी
पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, संदिग्ध बैंक खातों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संपर्कों की जांच कर रही है। कुवैत से जुड़े लेनदेन की पूरी श्रृंखला स्पष्ट होना अभी बाकी है।इस मामले ने दिखाया है कि छोटे रिवॉर्ड देने वाले संदिग्ध मोबाइल एप भी साइबर अपराध का माध्यम बन सकते हैं। लोगों को अनजान लिंक खोलने, अविश्वसनीय एप डाउनलोड करने और एसएमएस से आए चालान भुगतान लिंक पर बैंकिंग जानकारी दर्ज करने से बचना चाहिए।