दिल्ली। भारत में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी गायिका और अभिनेत्री मैरी मिलबेन के एक बयान ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। मैरी मिलबेन ने आरोप लगाया है कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उससे जुड़े नेता अभिजीत दिपके को अमेरिका में मौजूद कुछ दानदाताओं से आर्थिक मदद मिल रही है। उनका दावा है कि ये दानदाता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का विरोध करते हैं। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित प्रमाण सामने नहीं आया है। मैरी मिलबेन ने बुधवार, 14 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए भारतीय युवाओं से अपील की कि वे सीजेपी की विचारधारा के खिलाफ शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाएं। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं को अपने देश के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर जागरूक रहना चाहिए।
मिलबेन ने दावा किया कि अमेरिका में कुछ ऐसे दानदाता सक्रिय हैं, जो दुनिया के विभिन्न देशों में रूढ़िवादी राजनीतिक नेताओं के खिलाफ गतिविधियों को आर्थिक सहायता देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे समूह युवाओं को प्रभावित करके राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने का प्रयास करते हैं। हालांकि, उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई ठोस वित्तीय दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया।  अमेरिकी गायिका ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन भी किया। उन्होंने मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय युवाओं को देश में शांति और लोकतांत्रिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए आगे आना चाहिए। मैरी मिलबेन का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब दिल्ली सहित देश के विभिन्न हिस्सों में चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
सीजेपी और अन्य छात्र संगठनों के कार्यकर्ता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अनियमितताओं के आरोपों से इनकार किया है। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में मिलबेन ने सीजेपी को मिलने वाली कथित विदेशी फंडिंग का मुद्दा उठाया है। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर संगठन की गतिविधियों और आर्थिक सहायता के स्रोतों को लेकर चर्चा शुरू हो गई। हालांकि, सीजेपी से जुड़े अभिजीत दिपके ने विदेशी फंडिंग के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया कि भारत के घरेलू राजनीतिक मुद्दों में अमेरिकी हस्तक्षेप की जरूरत क्यों होनी चाहिए। उन्होंने भारतीयों से विदेशी हस्तक्षेप का विरोध करने की भी अपील की।
गौरतलब है कि मैरी मिलबेन पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपना समर्थन व्यक्त कर चुकी हैं। वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिका दौरे के दौरान उन्होंने भारतीय राष्ट्रगीत और धार्मिक भजन की प्रस्तुति दी थी। मैरी मिलबेन के ताजा आरोपों के बाद भारत में विदेशी फंडिंग और राजनीतिक आंदोलनों के संबंधों पर नई बहस छिड़ गई है। हालांकि, किसी विदेशी साजिश या सीजेपी को अवैध आर्थिक सहायता मिलने की पुष्टि करने वाली जांच रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। ऐसे में अमेरिकी गायिका के बयान को राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। विदेशी फंडिंग और सरकार को अस्थिर करने के कथित प्रयासों की वास्तविकता स्वतंत्र जांच तथा प्रमाण सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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