Kolkata. कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा सियासी उलटफेर सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी को झटका देते हुए पार्टी के तीन वरिष्ठ नेताओं और राज्यसभा सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। बीजेपी ने तीनों नेताओं का औपचारिक रूप से स्वागत करते हुए इसे पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम बताया है। बीजेपी में शामिल होने वाले नेताओं में सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक के नाम शामिल हैं। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने तीनों नेताओं के पार्टी में शामिल होने की जानकारी दी।
बताया गया कि बीजेपी में शामिल होने से पहले तीनों नेताओं ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की। शमिक भट्टाचार्य ने तीनों नेताओं को पार्टी का पट्टा पहनाकर उनका स्वागत किया। इस दौरान बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक चली राजनीतिक व्यवस्था ने राज्य के विकास को प्रभावित किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और केंद्र के बीच सहयोग की जगह टकराव की राजनीति हावी रही, जिससे विकास कार्यों को नुकसान पहुंचा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और विकसित भारत के विजन से प्रभावित होकर तीनों नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने का फैसला लिया है। उन्होंने तीनों नेताओं को अनुभवी राजनेता बताते हुए कहा कि राज्यसभा में उनका प्रदर्शन सभी के सामने रहा है। शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि इन नेताओं का बीजेपी में शामिल होना पार्टी के लिए खुशी का अवसर है। उन्होंने कहा कि बीजेपी संगठन, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से तीनों नेताओं का स्वागत किया गया है। बीजेपी में शामिल होने के बाद पूर्व टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर राय ने भी पार्टी छोड़ने के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को लेकर ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा। सुखेंदु शेखर राय ने दावा किया कि राज्य में राजनीतिक बदलाव की स्थिति बन चुकी है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी और उनकी पार्टी का प्रभाव खत्म हो चुका है और अब इस पर ज्यादा चर्चा करने का कोई अर्थ नहीं है। उन्होंने पश्चिम बंगाल के विकास को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में केंद्र सरकार के साथ सहयोग करने के बजाय विरोध की राजनीति को प्राथमिकता दी गई। उनके मुताबिक, इसका असर राज्य के विकास और रोजगार के अवसरों पर पड़ा। उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के रोडमैप के साथ आगे बढ़ने का प्रयास किया, लेकिन पश्चिम बंगाल में अलग तरह की राजनीति देखने को मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में भ्रष्टाचार और अपराध से जुड़े मामलों को लेकर सरकार की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं।
हालांकि, तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर अभी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, तीन वरिष्ठ नेताओं का पार्टी छोड़ना टीएमसी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि ये नेता लंबे समय से पार्टी की राजनीति का हिस्सा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में आने वाले समय में चुनावी राजनीति को देखते हुए यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीजेपी लगातार राज्य में अपना संगठन मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जबकि टीएमसी राज्य में अपनी पकड़ बनाए रखने के प्रयास में जुटी है। तीन राज्यसभा नेताओं के बीजेपी में शामिल होने से बंगाल की राजनीतिक तस्वीर में नया समीकरण बन सकता है। अब नजर इस बात पर होगी कि आने वाले दिनों में दोनों प्रमुख दलों की रणनीति क्या रहती है और इसका असर राज्य की राजनीति पर कितना पड़ता है।