BREAKING: ममता के करीबी नेता अनुब्रत मंडल बागी गुट में शामिल

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Update: 2026-07-11 13:04 GMT
Kolkata. कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी उठापटक के बीच एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले बीरभूम के प्रभावशाली नेता अनुब्रत मंडल के रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। बागी गुट के नेताओं की ओर से दिए गए बयानों के बाद राज्य की राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है। ईएम बाईपास स्थित एक निजी होटल में बागी गुट की राष्ट्रीय कार्य समिति की दो दिवसीय बैठक आयोजित की जा रही है। बैठक के पहले दिन रितब्रत बनर्जी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए दावा किया कि उनकी अनुब्रत मंडल से लगातार बातचीत हो रही है।

रितब्रत बनर्जी का बड़ा दावा
रितब्रत बनर्जी ने कहा कि 4 मई के बाद से उनकी अनुब्रत मंडल से कई बार बातचीत हुई है। उन्होंने दावा किया, "4 मई से मेरी अनुब्रत मंडल के साथ कम से कम 30 बार बातचीत हो चुकी है।" उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या अनुब्रत मंडल जल्द ही बागी गुट के साथ खुलकर नजर आएंगे। वहीं, बागी विधायक अक्रूज्जमान ने भी इस मामले को लेकर सस्पेंस बढ़ा दिया। उन्होंने कहा, "बस एक दिन और इंतजार कीजिए, सब कुछ साफ हो जाएगा।" इन बयानों के बाद माना जा रहा है कि अनुब्रत मंडल को लेकर जल्द कोई बड़ा राजनीतिक ऐलान हो सकता है।

अनुब्रत मंडल ने साधी चुप्पी
हालांकि, खुद अनुब्रत मंडल ने इस पूरे मामले पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है। मीडिया द्वारा सवाल पूछे जाने पर उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया। अनुब्रत मंडल लंबे समय तक ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के भरोसेमंद नेताओं में शामिल रहे हैं। बीरभूम जिले में उनका मजबूत राजनीतिक प्रभाव माना जाता है। 4 मई को आए राजनीतिक परिणामों के बाद से ही अनुब्रत मंडल ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चुप्पी बनाए रखी है। उनकी खामोशी के बीच अब बागी गुट के नेताओं के दावों ने बंगाल की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

बीरभूम के कई नेता पहले ही छोड़ चुके हैं साथ
अनुब्रत मंडल के संभावित पाला बदलने की चर्चा ऐसे समय में सामने आई है, जब बीरभूम जिले के कई प्रमुख नेता पहले ही बागी गुट के साथ जुड़ चुके हैं। इन नेताओं में पूर्व मंत्री चंद्रनाथ सिन्हा और काजल शेख जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इनके बागी गुट में शामिल होने के बाद अब अनुब्रत मंडल को लेकर भी राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना जताई जा रही है।

गो-तस्करी मामले में रहे थे जेल में
अनुब्रत मंडल का नाम कथित गो-तस्करी मामले में भी सामने आया था। इस मामले में उन्हें करीब 25 महीने जेल में रहना पड़ा था। सितंबर 2024 में उन्हें जमानत मिली थी। जेल से बाहर आने के बाद से ही उनकी राजनीतिक सक्रियता और भविष्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। अब बागी गुट के नेताओं के दावों के बाद यह मामला बंगाल की राजनीति में केंद्र बिंदु बन गया है।

बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल
पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल के अंदर चल रही खींचतान के बीच अनुब्रत मंडल जैसे
प्रभावशाली नेता
को लेकर सामने आए संकेतों ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। अगर अनुब्रत मंडल वास्तव में रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के साथ जाते हैं तो इसका असर बीरभूम जिले की राजनीति के साथ-साथ राज्य स्तर पर भी देखने को मिल सकता है। फिलहाल सभी की नजर अनुब्रत मंडल के अगले कदम पर टिकी हुई है। बागी गुट के नेताओं के दावों और अनुब्रत मंडल की चुप्पी के बीच आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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