NIT में पीएचडी स्कॉलर-असीस्टेंट प्रोफेसर में विवाद

Update: 2026-07-27 11:40 GMT
Hamirpur. हमीरपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान हमीरपुर एक बार फिर सुर्खियों में आया है। दरअसल यहां अध्ययनरत एक 30 वर्षीय पीएचडी स्कॉलर ने अपनी सुपरवाइजर (असीस्टेंट प्रोफेसर) पर मानसिक उत्पीडऩ के अलावा अपने अन्य कार्य कराने और संबंधित सुपरवाइजर के पति द्वारा भी उस पर दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं। हालांकि सुपरवाजर का पति संस्थान का हिस्सा ही नहीं है। मामला शिक्षा मंत्रालय के पास भी पहुंचा, लेकिन अंदरखाते जारी लीपापोती के कारण बिगड़ते-बिगड़ते बात पुलिस थाने तक जा पहुंची। जानकारी है कि ने कुछ समय पहले वूमन सैल में इसकी शिकायत लगाते हुए असीस्टेंट प्रोफेसर द्वारा पीचडी स्कॉलर पर आरोप लगाए गए। उसके बाद पीएचडी स्कॉलर ने भी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। बताते हैं कि दस मई को पीएचडी स्कॉलर द्वारा संस्थान प्रबंधन को इसकी लिखित शिकायत दी गई थी, जिसके बाद वास्तुकला विभाग की ओर से सुपरवाइजर को बदलने की सिफारिश भी एनआईटी प्रशासन को चली गई, लेकिन यह निर्णय
लागू नहीं हो सका।


25 मई को शोधार्थी ने इस विषय पर शिक्षा मंत्रालय को औपचारिक शिकायत भेजी। मंत्रालय ने संस्थान के नोडल अधिकारी को जांच के निर्देश दिए। छह जुलाई को एनआईटी ओर से गठित कमेटी ने इस विषय पर बैठक की, लेकिन उसके बाद इस विषय पर शोधार्थी को संस्थान ने कोई जवाब नहीं दिया। 22 जुलाई को शोधार्थी की ओर से सदर थाना में इसकी शिकायत दी गई। शोधार्थी का कहना कि वर्ष 2025 से वह मानसिक तनाव, डर के माहौल में शोध कार्य करने को मजबूर है। उसका कहना है कि संस्थान के अधिकारियों से शिकायत करने और मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल पर मामला दर्ज कराने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। एनआईटी के डायरेक्टर प्रो. एचएम सूर्चवंशी के अनुसार मामले में जांच कमेटी गठित की गई है। रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम निर्णय लेकर कार्रवाई की जाएगी। शोधार्थी के अनुसार वह वास्तुकला विभाग में एक असीस्टेंट प्रोफसर की सुपरविजन में पीएचडी कर रहा है। शोध के लगभग चार वर्ष पूरे हो चुके है।
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