Assam. असम। असम में लगातार हो रही बारिश और बाढ़ ने गंभीर मानवीय संकट पैदा कर दिया है। राज्य के कई जिलों में नदियां उफान पर हैं और हजारों परिवार बाढ़ की मार झेल रहे हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के ताजा बुलेटिन के अनुसार, मंगलवार को सात और लोगों की मौत के बाद बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 75 हो गई है। सभी सात मौतें सिवसागर जिले के नजीरा राजस्व सर्कल में दर्ज की गई हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि प्रभावित आबादी में कुछ कमी आई है और यह घटकर 3.32 लाख रह गई है, लेकिन हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं।
इसी बीच सोशल मीडिया पर असम के सिवसागर जिले का एक भावुक कर देने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक व्यक्ति तेज बहाव वाले बाढ़ के पानी में फंसी एक गाय को बचाने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है। बाढ़ के बीच जान जोखिम में डालकर पशु को बचाने का उसका प्रयास लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। हालांकि वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इसे सिवसागर क्षेत्र का बताया जा रहा है। यह दृश्य बाढ़ से प्रभावित इलाकों में इंसानों के साथ-साथ पशुओं पर आए संकट को भी बयां करता है।
एएसडीएमए के अनुसार, फिलहाल राज्य के सात जिले अब भी बाढ़ की चपेट में हैं। इनमें सिवसागर, चरैदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव, सोनितपुर और कामरूप मेट्रोपॉलिटन शामिल हैं। इन जिलों के 21 राजस्व सर्कल और 622 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। बाढ़ के कारण लाखों लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हुआ है और कई क्षेत्रों में आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है।
सबसे अधिक प्रभावित जिला चरैदेव है, जहां 1,42,756 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। इसके बाद सिवसागर में 97,074 और जोरहाट में 57,371 लोग प्रभावित बताए गए हैं। प्रशासन लगातार प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य चला रहा है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। कई गांवों का संपर्क मुख्य सड़कों से कट चुका है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता के लिए राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने बड़े स्तर पर राहत शिविर संचालित किए हैं। वर्तमान में 81 राहत शिविरों में 32,477 लोग शरण लिए हुए हैं। इसके अलावा 34 राहत वितरण केंद्रों के माध्यम से प्रभावित परिवारों तक भोजन, पेयजल, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाई जा रही है। प्रशासन का कहना है कि जरूरत के अनुसार राहत शिविरों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
बाढ़ ने कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 45,341.98 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो चुकी है, जिससे किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं। इसके अलावा कई मकान, गोशालाएं, स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र और अन्य सार्वजनिक ढांचे भी बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हुए हैं। पशुधन को भी नुकसान पहुंचने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में लोगों की आजीविका पर गहरा असर पड़ा है।
प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं तथा जरूरतमंद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही न करें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और संभावित खतरे वाले इलाकों में पहले से ही एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने भरोसा दिलाया है कि प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी और हालात सामान्य होने तक राहत एवं पुनर्वास कार्य जारी रहेंगे।