रूसी हमले में चार भारतीय नाविकों की मौत पर भारत ने कड़ा रुख अपनाया, है नाराज

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Update: 2026-07-21 05:54 GMT

नई दिल्ली: युद्ध के मोर्चों पर मर्चेंट नेवी के कॉमर्शियल जहाजों को निशाना बनाए जाने से भारतीय नाविकों की जान पर बन आई है। पिछले कुछ हफ्तों में भारतीय नाविकों को दो अलग-अलग जगहों पर जान गंवानी पड़ी है। हाल ही में यूक्रेन के तट पर एक मालवाहक जहाज पर हुए रूसी मिसाइल हमले में 4 भारतीय नाविकों की मौत हो गई। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि मालवाहक जहाज पर रूसी हमले में चार भारतीय क्रू सदस्यों की मौत के बाद, भारत ने मंगलवार को एक वरिष्ठ रूसी राजनयिक को तलब किया। इस दौरान भारत ने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

इससे ठीक पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी हमले में 3 भारतीयों की जान चली गई थी। भारत सरकार ने इन दोनों ही घटनाओं पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला, कौन थे ये नाविक और सरकार ने इस पर क्या कहा है...
रविवार शाम यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से मक्के की खेप लेकर निकले एक मालवाहक जहाज 'एमवी गोल्डन लियो' पर रूस ने क्रूज मिसाइलों से हमला कर दिया। यूक्रेन की वायुसेना ने भी रूसी मिसाइलों से हमले की पुष्टि की है।
गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले इस जहाज पर कुल 17 क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें 5 भारतीय थे। इस हमले में 10 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 4 भारतीय नागरिक शामिल हैं, जबकि एक भारतीय नाविक गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। यह पहली बार है जब रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच किसी हमले में भारतीय नाविकों की जान गई है। हालांकि इससे पहले रूसी सेना में शामिल किए गए भारतीयों के मारे जाने की खबरें आई हैं।
रूसी हमले में जान गंवाने वाले नाविकों में केरल के कासरगोड जिले के रहने वाले 26 वर्षीय अखिल जोयन भी शामिल हैं। अखिल अपने माता-पिता (जोयन और सैली) की इकलौती संतान थे। उनके पिता एक इलेक्ट्रिक दुकान पर काम करते हैं और मां इंश्योरेंस एजेंट हैं। परिवार का भविष्य काफी हद तक अखिल पर ही निर्भर था। वो इलाके के जाने-माने रस्साकशी खिलाड़ी भी थे।
19 साल की उम्र में मर्चेंट नेवी जॉइन करने वाले अखिल करीब तीन महीने पहले अपनी सगाई के लिए घर आए थे। उनकी शादी दो महीने बाद ही होने वाली थी। शिपिंग कंपनी ने सोमवार शाम एक ईमेल के जरिए परिवार को उनके निधन की दुखद खबर दी।
रूस से पहले अमेरिका की सैन्य कार्रवाई में भी भारतीय नाविकों को जान गंवानी पड़ी है। पिछले हफ्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नाकेबंदी के दौरान एक कॉमर्शियल ऑयल टैंकर पर मिसाइल स्ट्राइक की थी। इस हमले में 3 भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। हैरानी की बात यह है कि अमेरिका ने इस घटना पर माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे प्रतिबंधों का उल्लंघन बताते हुए अमेरिकी कार्रवाई को सही ठहराया।
निर्दोष नाविकों की मौत ने भारतीय कूटनीति और राजनीति दोनों को गर्मा दिया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि एम.वी. गोल्डन लियो नामक इस व्यापारिक जहाज पर चालक दल के 17 सदस्य सवार थे, जिनमें पांच भारतीय नागरिक शामिल थे। भारत ने इस हमले की निंदा करते हुए कहा कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना और निर्दोष नागरिक चालक दल के सदस्यों की जान खतरे में डालना ''निंदनीय है और इससे बचा जाना चाहिए।''
विदेश मंत्रालय ने कहा, ''19 जुलाई की शाम एमवी गोल्डन लियो पर ओडेसा बंदरगाह से रवाना होते समय हमला हुआ। घटना के समय जहाज पर चालक दल के 17 सदस्य सवार थे, जिनमें पांच भारतीय नागरिक शामिल थे।'' मंत्रालय ने कहा, ''उपलब्ध जानकारी के अनुसार, चार भारतीय नागरिकों की दुखद मृत्यु हो गई है, जबकि एक भारतीय नागरिक गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है।''
विदेश मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास कर रहा है। मंत्रालय ने कहा, ''हम मृत भारतीय नागरिकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और घायल भारतीय नागरिक के शीघ्र एवं पूर्ण स्वस्थ होने की कामना करते हैं।''
विदेश मंत्रालय ने रूस का प्रत्यक्ष रूप से नाम लिए बिना कहा, ''भारत ऐसे हमलों की निंदा करता है और दोहराता है कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना, निर्दोष चालक दल के सदस्यों की जान जोखिम में डालना या जहाजरानी और व्यापार की आज़ादी में बाधा डालना निंदनीय है और ऐसा नहीं किया जाना चाहिए।''
इससे पहले अमेरिकी हमले पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सीधे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात की और सख्त संदेश दिया कि कॉमर्शियल जहाजों पर इस तरह की जानलेवा कार्रवाई किसी भी तरह से जायज नहीं है।
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