नई दिल्ली। बाल विवाह रोकने और बेटियों के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में भारत के प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। संयुक्त राष्ट्र ने भारत की प्रशंसा करते हुए कहा है कि लगातार निवेश, मजबूत सरकारी नीतियों और बड़े पैमाने पर सामुदायिक भागीदारी से समाज में वास्तविक और सार्थक बदलाव लाया जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) की उप कार्यकारी निदेशक हनान सुलेमान ने कहा कि भारत ने पिछले एक दशक में बालिकाओं की शिक्षा और बाल विवाह की रोकथाम के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
संयुक्त राष्ट्र में सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका विषय 'बालिकाओं में निवेश : हमारे भविष्य का परिवर्तन' रखा गया था। कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन संयुक्त राष्ट्र में भारत और सिएरा लियोन के स्थायी मिशनों ने किया। इस दौरान बाल विवाह समाप्त करने, लड़कियों की शिक्षा बढ़ाने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और आर्थिक सशक्तीकरण के मुद्दों पर चर्चा हुई।
भारत के प्रयासों की संयुक्त राष्ट्र ने की सराहना
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यूनिसेफ की उप कार्यकारी निदेशक हनान सुलेमान ने भारत की उपलब्धियों का विशेष उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि भारत ने दिखाया है कि लंबे समय तक निवेश जारी रखने, समुदायों को साथ जोड़ने और प्रभावी नीतियां लागू करने से सकारात्मक परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
सुलेमान के अनुसार, पिछले दस वर्षों में भारत में लड़कियों की शिक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। परिवारों में बेटियों की शिक्षा और उनके भविष्य को लेकर जागरूकता भी बढ़ी है।उन्होंने कहा कि बाल विवाह में कमी लाने के प्रयासों में सरकार के साथ स्थानीय समुदायों की भागीदारी महत्वपूर्ण रही है।25.3 करोड़ किशोर-किशोरियों वाला देश भारतहनान सुलेमान ने भारत की जनसंख्या और युवाओं की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 25.3 करोड़ किशोर-किशोरियां हैं। इतनी बड़ी आबादी के कारण भारत में बालिकाओं के अधिकारों से जुड़ी प्रगति का महत्व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी है।
उनके अनुसार, यदि लड़कियों को शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए, तो इसका लाभ केवल व्यक्तिगत स्तर पर नहीं, बल्कि पूरे समाज को मिलता है।बालिकाओं के सशक्त होने से परिवारों की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियां बेहतर बनाने में भी मदद मिल सकती है।
बाल विवाह मुक्त भारत अभियान का उल्लेख
संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रम में भारत के 'बाल विवाह मुक्त भारत' अभियान का भी जिक्र किया गया।भारत सरकार ने 27 नवंबर 2024 को इस राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की थी।
इसका उद्देश्य बाल विवाह रोकने के लिए जागरूकता बढ़ाना, परिवारों और समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना तथा जोखिम में रहने वाली किशोरियों को शिक्षा और सहायता से जोड़ना है।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, फरवरी 2026 तक अभियान के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रमों की पहुंच छह करोड़ से अधिक नागरिकों तक हो चुकी थी।इसके अलावा बाल विवाह के खिलाफ 28 लाख से अधिक संकल्प पोर्टल पर दर्ज किए गए थे।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना की चर्चासंयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने देश की विभिन्न पहलों की जानकारी दी।उन्होंने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य बेटियों के प्रति सामाजिक भेदभाव कम करना और शिक्षा के अवसर बढ़ाना है।
हरीश ने बताया कि भारत ने सरकारी नेतृत्व, सामुदायिक भागीदारी और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के माध्यम से बालिकाओं के विकास को प्राथमिकता दी है।उनके अनुसार, लड़कियों की शिक्षा पर किया गया निवेश आने वाली पीढ़ियों के लिए भी
लाभकारी
होता है।शिक्षित महिलाएं रोजगार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में अधिक भागीदारी कर सकती हैं।
बालिकाओं की शिक्षा से बदल सकता है समाज
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि लड़कियों की शिक्षा केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास का आधार है।शिक्षा मिलने से बालिकाओं को अपने भविष्य के संबंध में बेहतर निर्णय लेने का अवसर मिलता है।इससे कम उम्र में विवाह का जोखिम घटाने, कौशल विकसित करने और रोजगार के अवसर प्राप्त करने में मदद मिलती है।उन्होंने महिला स्वास्थ्य को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से शिशु मृत्यु दर कम करने और परिवारों की स्थिति सुधारने में सहायता मिलती है।
डिजिटल दुनिया में बेटियों की भागीदारी जरूरीकार्यक्रम में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी का मुद्दा भी उठा।पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि डिजिटल क्षेत्र में लड़कियों और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि उभरती तकनीकों, विशेषकर एआई के क्षेत्र में पुरुषों का वर्चस्व दिखाई देता है।
उनके अनुसार, भारत डिजिटल तकनीक को बालिकाओं की शिक्षा और सशक्तीकरण में मददगार बनाने की दिशा में काम कर रहा है।उन्होंने डिजिटल माध्यमों को महिलाओं और लड़कियों के लिए अधिक सुरक्षित एवं अनुकूल बनाने की आवश्यकता बताई।सिएरा लियोन ने भी दिया बालिका शिक्षा पर जोरकार्यक्रम में सिएरा लियोन की विदेश मामलों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की उप मंत्री जेनेबा बंगुरा ने भी विचार रखे।
उन्होंने कहा कि जब किसी लड़की को शिक्षा से वंचित किया जाता है या कम उम्र में विवाह के लिए मजबूर किया जाता है, तो उसके भविष्य की संभावनाएं सीमित हो जाती हैं।वहीं शिक्षित, स्वस्थ और सुरक्षित लड़की अपने परिवार, समुदाय और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।कार्यक्रम में इस बात पर सहमति दिखाई दी कि बाल विवाह रोकने के लिए शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा का विस्तार आवश्यक है।
दुनिया में अब भी गंभीर समस्या है बाल विवाह
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, दुनिया भर में हर साल लगभग 1.2 करोड़ लड़कियों का विवाह 18 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले हो जाता है।संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अपने संदेश में कहा कि बाल विवाह लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्रभावित करता है।उन्होंने बताया कि पिछले 25 वर्षों में किए गए प्रयासों से अनुमानित 6.8 करोड़ बाल विवाह रोके जा सके हैं।
इसके बावजूद वर्तमान गति से बाल विवाह पूरी तरह समाप्त करने में बहुत लंबा समय लग सकता है।उन्होंने सरकारों, सामाजिक संगठनों और निजी क्षेत्र से बालिकाओं के अधिकारों के लिए निवेश बढ़ाने की अपील की।बाल विवाह रोकने के लिए शिक्षा और जागरूकता जरूरीविशेषज्ञों के अनुसार, बाल विवाह रोकने के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है।
इसके लिए लड़कियों की शिक्षा सुनिश्चित करना, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहायता देना और समुदायों में जागरूकता बढ़ाना भी आवश्यक है।भारत में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 लागू है। इसके तहत बाल विवाह रोकने और संबंधित अपराधों पर कार्रवाई के प्रावधान हैं।हालांकि, बाल विवाह की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। इसलिए कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और स्थानीय स्तर पर निरंतर प्रयासों की जरूरत बनी हुई है।
भारत की प्रगति को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
संयुक्त राष्ट्र की ओर से मिली सराहना भारत में बालिकाओं की शिक्षा और बाल विवाह रोकने के प्रयासों के महत्व को रेखांकित करती है।कार्यक्रम में भारत की सरकारी योजनाओं, समुदायों की सक्रिय भागीदारी और डिजिटल तकनीक के उपयोग को महत्वपूर्ण बताया गया।साथ ही यह संदेश भी दिया गया कि बाल विवाह समाप्त करने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने स्पष्ट किया कि लड़कियों को शिक्षा, सुरक्षा और समान अवसर उपलब्ध कराना समाज के समग्र विकास के लिए जरूरी है।भारत की उपलब्धियों की प्रशंसा के साथ अब चुनौती यह है कि इन प्रयासों का लाभ उन सभी बालिकाओं तक पहुंचे, जो शिक्षा और सुरक्षित भविष्य के अवसरों से अब भी वंचित हैं।
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