कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का जलवा, हर्ष सिंह और अस्मिता डे ने जीता गोल्ड

जूडो में भारत को मिले दो स्वर्ण पदक

Update: 2026-07-31 15:59 GMT
Delhi दिल्ली: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीत लिया। गोल्ड मेडल जीतने के बाद अस्मिता भावुक हो गईं और अपने दिवंगत पिता को याद करते हुए कहा कि उनकी सफलता के पीछे सबसे बड़ा योगदान उनके पिता का रहा है।
अस्मिता डे ने कहा कि उनके पिता का दिसंबर 2025 में निधन हो गया था। उन्होंने बताया कि पिता हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे और हर कदम पर उनका साथ देते थे। उनके निधन के बाद उन्हें लगा था कि सब कुछ खत्म हो गया है और आगे बढ़ना बेहद मुश्किल होगा। हालांकि, उन्होंने खुद को संभाला और पिता के सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया।
उन्होंने बताया कि पिता के निधन के केवल दो महीने बाद ही कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स के ट्रायल आयोजित हुए। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने दोनों ट्रायल में हिस्सा लिया और दोनों प्रतियोगिताओं के लिए अपना चयन सुनिश्चित किया। अस्मिता ने कहा कि यह स्वर्ण पदक वह अपने पिता की याद और उनके सपनों को समर्पित करती हैं।
भारतीय खिलाड़ी की इस उपलब्धि पर खेल जगत में खुशी की लहर है। उनकी संघर्षपूर्ण यात्रा और विपरीत
परिस्थितियों
में हासिल की गई सफलता युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है। अस्मिता की जीत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय जूडो की ताकत को साबित किया है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए यह स्वर्ण पदक बेहद अहम माना जा रहा है। अस्मिता डे की भावुक कहानी ने खेल प्रेमियों का दिल भी जीत लिया है और उनकी सफलता को दृढ़ संकल्प, मेहनत और परिवार के समर्थन का प्रतीक माना जा रहा है।
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