शिवा शर्मा हत्याकांड में कोर्ट का बड़ा एक्शन, तीन आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चर्चित कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अदालत ने मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। इससे पहले हजरतगंज पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य होने का दावा करते हुए अदालत में वारंट जारी करने की अर्जी दाखिल की थी। मामले में श्रद्धा दुबे, उनकी बहन रश्मि और एक अन्य आरोपी की तलाश की जा रही है।
तीन आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट
पुलिस ने शिवा शर्मा की मौत से जुड़े मामले में मॉडल श्रद्धा दुबे, उनकी बहन रश्मि और ड्राइवर आदिल उर्फ दानिश की भूमिका की जांच की है। पुलिस ने अदालत को बताया था कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य जुटाए गए हैं। इसके बाद न्यायालय से गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग की गई थी। 17 अक्टूबर को सामने आई जानकारी के मुताबिक, अदालत ने तीन आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी कर दिया है।
चौथी मंजिल से गिरने के बाद हुई थी मौत
लखनऊ के कारोबारी शिवा शर्मा की 9 अक्टूबर को एक अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। घटना के बाद परिजनों ने उनकी मौत को संदिग्ध बताते हुए गंभीर आरोप लगाए थे। परिजनों का आरोप है कि शिवा को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। पुलिस ने शिकायत के आधार पर हत्या सहित अन्य आरोपों में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
श्रद्धा दुबे समेत आरोपियों की तलाश
मामले में पुलिस ने श्रद्धा दुबे, रश्मि और एक अन्य आरोपी की जानकारी देने पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। जांच के दौरान आरोपियों के नेपाल की ओर जाने की आशंका भी सामने आई। पुलिस को सीमा क्षेत्र से जुड़े कुछ सीसीटीवी फुटेज मिलने की जानकारी है। इनकी जांच के आधार पर आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
आत्महत्या के दावे और हत्या के आरोप की जांच
मामले में श्रद्धा दुबे ने शिवा की मौत को आत्महत्या बताया है। दूसरी ओर, शिवा के परिजनों ने हत्या और प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच पुलिस साक्ष्यों और घटनाक्रम की जांच कर रही है।
अब गिरफ्तारी पर पुलिस का जोर
गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयासों को कानूनी आधार मिला है। पुलिस के सामने अब आरोपियों का पता लगाकर उन्हें अदालत में पेश करने की चुनौती है। हालांकि, वारंट जारी होने का अर्थ आरोपियों का दोष सिद्ध होना नहीं है। मामले में अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।