रूस नहीं, भारत निशाने पर! ट्रंप के 100% टैरिफ बिल से मचा हड़कंप

भारत पर मंडराया 100% टैरिफ का खतरा, रूस के बहाने अमेरिका का बड़ा दांव

Update: 2026-08-10 14:09 GMT
Delhi दिल्ली: अमेरिकी सीनेट ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एक्ट ऑफ 2026 को 86-11 मतों से पारित कर दिया है। इस बिल को लेकर भारत में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इसके प्रावधानों के तहत रूस से बड़े पैमाने पर तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिका भारी टैरिफ लगा सकता है। बिल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ऐसे देशों के आयात पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है।
बताया जा रहा है कि भारत और चीन समेत पांच देशों को रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदारों के तौर पर निशाने पर रखा गया है। सूची में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं। हालांकि, सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद भी यह बिल अभी कानून नहीं बना है। इसे अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से मंजूरी और अन्य विधायी तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।
इस बिल को लेकर भारतीय इक्विटी स्ट्रेटिजिस्ट और फंड मैनेजर हर्ष गुप्ता मधुसूदन ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि रूस पर दबाव बनाने के नाम पर तैयार किया गया यह कानून व्यवहार में भारत को भी बड़े आर्थिक दबाव में डाल सकता है। उन्होंने सवाल किया कि रूस से अलग-अलग तरह का व्यापार करने वाले अन्य देशों को इसी तरह क्यों निशाना नहीं बनाया जा रहा है।
मधुसूदन के मुताबिक, भारत के लिए यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रूसी तेल भारत की ऊर्जा जरूरतों और आयात लागत को प्रभावित करता है। यदि भारत रूसी तेल की खरीद कम करता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, रूस अपना तेल चीन जैसे दूसरे बड़े खरीदारों को अधिक मात्रा में बेच सकता है।
भारत के लिए चुनौती यह है कि उसे एक तरफ सस्ती और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखनी है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के साथ व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को भी संतुलित करना है। ऐसे में 100 फीसदी तक संभावित अमेरिकी टैरिफ का मुद्दा आने वाले समय में भारत-अमेरिका संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बन सकता है।
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