पुलिस के ‘गुडवर्क’ पर उठे सवाल, 4 थाना क्षेत्रों में 6 सिम बॉक्स बरामद लेकिन गिरफ्तारी एक भी नहीं
सिम बॉक्स रैकेट का खुलासा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अपराधियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई और उसके परिणामों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। चार थाना क्षेत्रों के चार अपार्टमेंट से कथित तौर पर 32 सिम स्लॉट वाले छह सिम बॉक्स बरामद होने के बावजूद किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने का दावा किया जा रहा है। इस मामले ने पुलिस की जांच और साइबर अपराधियों तक पहुंचने की क्षमता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। बताया जा रहा है कि इन सिम बॉक्स का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय कॉल को स्थानीय कॉल की तरह रूट करने और दूरसंचार कंपनियों को आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाले कथित रैकेट में किया जा रहा था। ऐसे उपकरणों के जरिए विदेश से आने वाली कॉल को स्थानीय नेटवर्क पर भेजा जा सकता है। इससे कॉल की वास्तविक पहचान छिपने और निर्धारित अंतरराष्ट्रीय कॉल शुल्क से बचने की आशंका रहती है।
मामले में यह भी आरोप सामने आए हैं कि सीबीआई और एनआईए का अधिकारी बताकर लोगों से ठगी करने वाले साइबर अपराधी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। सवाल उठाया जा रहा है कि यदि अपार्टमेंट में चल रहे कथित अवैध नेटवर्क की जानकारी पुलिस को मिल गई थी, तो इसे संचालित करने वाले लोग गिरफ्तारी से पहले कैसे फरार हो गए? बंद पड़े फ्लैटों से उपकरणों की बरामदगी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि केवल उपकरण बरामद करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इनके वास्तविक संचालकों, वित्तीय लेनदेन, सिम कार्ड के स्रोत और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का पता लगाना भी जरूरी है।
पुलिस ने इस कार्रवाई को 'ऑपरेशन डिजिटल कवच' का हिस्सा बताया है। 31 अक्टूबर को हुई छापेमारी में छह 32-पोर्ट सिम बॉक्स यानी कुल 192 सिम स्लॉट, 21 स्मार्ट स्विच, तीन वीपीएन गेटवे और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले। साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। हालांकि, कार्रवाई के दौरान किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से सवाल कायम हैं। इस बीच लखनऊ पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर श्रद्धा दुबे प्रकरण भी चर्चा में रहा। शिवा शर्मा हत्याकांड में आरोपी श्रद्धा दुबे करीब 11 दिनों तक फरार रही। बाद में यूपी एसटीएफ, लखनऊ पुलिस और नागपुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में उसे नागपुर से गिरफ्तार किया गया। इस प्रकरण ने भी आरोपियों की तलाश में लगने वाले समय को लेकर सवाल खड़े किए थे।
वहीं, सुशांत गोल्फ सिटी क्षेत्र में हिंदूवादी नेता की हत्या के मामले में साजिशकर्ता और कथित सुपारी की रकम को लेकर उठ रहे सवालों का भी स्पष्ट जवाब अपेक्षित है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिकन कॉल सेंटर से जुड़े पूर्व गुडवर्क के बाद अब सिम बॉक्स नेटवर्क की बरामदगी को लेकर सवाल है कि पुलिस उपकरणों तक तो पहुंच गई, लेकिन उनके संचालकों तक कब पहुंचेगी? पुलिस के मुताबिक, संदिग्ध सौगात अस्थाना की तलाश जारी है और बरामद उपकरणों की तकनीकी जांच की जा रही है।