BJP में बगावत, नरोत्तम मिश्रा समर्थकों का विरोध तेज, जिलाध्यक्ष समेत नेताओं ने दिया इस्तीफा
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Datia. दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। पार्टी की ओर से पूर्व संभागीय संगठन मंत्री आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद दतिया में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने उम्मीदवार चयन के फैसले का विरोध करते हुए सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रत्याशी चयन को लेकर नाराज भाजपा कार्यकर्ताओं ने दतिया शहर में कई स्थानों पर बाजार बंद कराया। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने मुख्य हाईवे पर जाम लगाकर टायर जलाए और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हालात बिगड़ने के बाद स्थानीय प्रशासन को भी सतर्क रहना पड़ा।
जिलाध्यक्ष समेत कई पदाधिकारियों का सामूहिक इस्तीफा
विरोध प्रदर्शन के बीच भाजपा संगठन को बड़ा झटका तब लगा, जब दतिया भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह ने प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को सामूहिक इस्तीफा भेज दिया। इस्तीफे में उन्होंने प्रत्याशी चयन को लेकर कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप लगाया है। रघुवीर सिंह कुशवाह ने पत्र में लिखा कि पार्टी द्वारा दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए लिया गया निर्णय "एकतरफा" है और इससे पार्टी के कार्यकर्ताओं की भावनाओं की उपेक्षा हुई है। उन्होंने कहा कि निर्णय लेने से पहले स्थानीय कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से राय नहीं ली गई।
281 बूथ अध्यक्षों समेत पदाधिकारियों के इस्तीफे की चेतावनी
भाजपा जिलाध्यक्ष ने अपने इस्तीफे पत्र में जिला पंचायत अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, नगर पालिका अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधियों के नाम शामिल किए हैं। उन्होंने दावा किया कि दतिया विधानसभा क्षेत्र के 6 मंडल अध्यक्ष, मोर्चा अध्यक्ष, पार्षद और 281 बूथों के अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी के लोग सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफा देने को तैयार हैं। पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि 24 घंटे के भीतर प्रत्याशी बदलकर डॉ. नरोत्तम मिश्रा को उम्मीदवार नहीं बनाया गया तो बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे सकते हैं।
नरोत्तम मिश्रा समर्थकों की नाराजगी बनी चुनौती
दतिया विधानसभा सीट लंबे समय से डॉ. नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता रहा है। ऐसे में उनके समर्थकों की नाराजगी भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। उपचुनाव से पहले पार्टी के अंदर इस तरह का विरोध चुनावी रणनीति पर असर डाल सकता है। भाजपा नेतृत्व अब इस विवाद को शांत करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की कोशिश में जुट सकता है। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को मनाकर चुनावी मैदान में मजबूती से उतरने की होगी।
उपचुनाव से पहले सियासी हलचल तेज
दतिया उपचुनाव की घोषणा के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। जहां भाजपा उम्मीदवार चयन को लेकर विवादों में घिर गई है, वहीं विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर निशाना साधने की तैयारी कर रहा है। आने वाले दिनों में दतिया की सियासत और अधिक गरमा सकती है।