समुद्री अर्थव्यवस्था को मजबूती: ₹69,725 करोड़ के पैकेज का ऐलान

Update: 2026-07-25 08:03 GMT
नई दिल्ली: सरकार ने भारत के जहाज निर्माण उद्योग को बेहतर बनाने के उपायों के तहत घरेलू जहाज निर्माण क्षमता, समुद्री फाइनेंसिंग और स्किलिंग को मजबूत करने के लिए 69,725 करोड़ रुपये के एक बड़े पैकेज को मंज़ूरी दी है।
केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने लोकसभा में बताया कि इस पैकेज में 'जहाज निर्माण वित्तीय सहायता योजना' (Shipbuilding Financial Assistance Scheme) शामिल है, जिसके लिए 24,736 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इसका मकसद वैश्विक यार्ड्स की तुलना में भारतीय यार्ड्स को लागत के मामले में होने वाले नुकसान को दूर करना है।
इस पैकेज का एक अहम हिस्सा 'समुद्री विकास कोष' (Maritime Development Fund) है, जिसके लिए 25,000 करोड़ रुपये का फंड बनाया गया है। यह फंड जहाज निर्माण और समुद्री क्षेत्र को लंबे समय के लिए फाइनेंसिंग सपोर्ट देगा। इसमें 20,000 करोड़ रुपये का 'समुद्री निवेश कोष' (Maritime Investment Fund) और 5,000 करोड़ रुपये का 'ब्याज प्रोत्साहन कोष' (Interest Incentivisation Fund) शामिल है।
सरकार ने 'जहाज निर्माण विकास योजना' (SbDS) को भी मंज़ूरी दी है, जिसके लिए 19,989 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसका मकसद ग्रीनफील्ड क्लस्टर और ब्राउनफील्ड विस्तार के ज़रिए सालाना उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 4.5 मिलियन ग्रॉस टनेज (GT) तक पहुंचाना है।
बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के बयान में कहा गया है, "ये लक्ष्य 'मैरिटाइम इंडिया विज़न 2030' और 'मैरिटाइम अमृत काल विज़न 2047' दस्तावेज़ों में शामिल विज़न के अनुरूप भारत को जहाज निर्माण के क्षेत्र में एक प्रतिस्पर्धी वैश्विक ताकत के तौर पर स्थापित करने के लिए तय किए गए हैं।"
जहाज निर्माण उद्योग को बेहतर बनाने के लिए कई नीतिगत सुधार भी किए गए हैं, जिनमें बड़े जहाजों को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा देना और मांग को एक साथ लाना (demand aggregation) शामिल है।
19 सितंबर, 2025 को 10,000 ग्रॉस टनेज (GT) और उससे ज़्यादा क्षमता वाले भारतीय झंडे वाले कमर्शियल जहाजों के लिए, और भारत में बने 1,500 GT और उससे ज़्यादा क्षमता वाले जहाजों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा अधिसूचित किया गया था।
मांग को एक साथ लाने की प्रक्रिया के तहत, 400 से ज़्यादा जहाजों के बेड़े को खरीदने की योजना तैयार की गई है, जिससे भारतीय जहाज निर्माण यार्ड्स को लंबे समय तक ऑर्डर मिलने की उम्मीद बनी रहेगी।
सरकार ने 'जहाज निर्माण विकास योजना' (SbDS) के तहत आंध्र प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु में तीन ग्रीनफील्ड जहाज निर्माण क्लस्टर विकसित करने के लिए सैद्धांतिक मंज़ूरी दे दी है।
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