New Delhi. नई दिल्ली। भारत में इस साल का पहला चक्रवर्ती तूफ़ान अर्नब आ रहा है। जो कि ओडिशा सहित भारत के प्रमुख राज्यों को साथ से 75 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ़्तार से अटैक करने जा रहा है। बंगाल की खाड़ी में ये चक्रवाती तूफ़ान असर दिखाते हुए आ रहा है। वही देश के IMD सभी राज्यों को अलट जारी किया आंध्र सहित तटीय इलाक़ों भारत में तूफ़ान तभाही लिए कितना असर होता है और कहा-कहा इसका प्रभाव पड़ेगा ये अब देखने की ज़रूरत है। बंगाल की खाड़ी में बना शक्तिशाली गहरा दबाव उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तट को पार कर गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार मौसम प्रणाली 23 और 27 सितंबर की दरमियानी रात कलिंगपट्टनम के पास तट से गुजरी। इस दौरान 55 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं, जबकि हवा के झोंकों की रफ्तार 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंची। इस मौसम प्रणाली को कई जगह संभावित चक्रवाती तूफान ‘अर्णब’ के रूप में बताया जा रहा था।
लेकिन IMD के आधिकारिक बुलेटिन में इसे Deep Depression यानी गहरा दबाव बताया गया है। मौसम विभाग ने पहले ही इसके विशाखापत्तनम और गोपालपुर के बीच उत्तर आंध्र प्रदेश-दक्षिण ओडिशा तट को पार करने का अनुमान जताया था। गहरे दबाव के तट से टकराने के बाद आंध्र प्रदेश और ओडिशा के कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हुई। आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम सहित उत्तर तटीय जिलों पर इसका खासा प्रभाव पड़ा। मौसम खराब होने के कारण प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। IMD के मुताबिक 24 सितंबर की सुबह 5:30 बजे गहरे दबाव का केंद्र उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश में कलिंगपट्टनम से करीब 50 किलोमीटर पश्चिम और विशाखापत्तनम से लगभग 80 किलोमीटर उत्तर-उत्तरपूर्व में था। सिस्टम जमीन पर आने के बाद आगे बढ़ रहा है और इसके धीरे-धीरे कमजोर होने की संभावना है।
ओडिशा में स्कूल बंद, प्रशासन अलर्ट
मौसम प्रणाली के प्रभाव को देखते हुए ओडिशा के कई प्रभावित जिलों में स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद रखे गए। दक्षिण ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन ने पहले से तैयारियां तेज कर दी थीं। कई संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव टीमों को भी तैयार रखा गया। समुद्र में खराब मौसम को देखते हुए मछुआरों को समुद्र से दूर रहने की सलाह दी गई। IMD के तटीय मौसम बुलेटिन के अनुसार दक्षिण ओडिशा तट पर समुद्र की स्थिति बहुत खराब से ऊंची लहरों वाली बनी हुई थी। ओडिशा के बंदरगाहों पर स्थानीय चेतावनी संकेत संख्या तीन भी जारी रखा गया था।
आंध्र प्रदेश में भी भारी बारिश
आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भी गहरे दबाव का व्यापक असर देखने को मिला। श्रीकाकुलम, विजयनगरम, पार्वतीपुरम मन्यम, विशाखापत्तनम, अल्लूरी सीताराम राजू और अनकापल्ली जैसे जिलों में भारी बारिश की आशंका को देखते हुए स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद रखने जैसे एहतियाती कदम उठाए गए। कलिंगपट्टनम और आसपास के इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। मौसम विभाग ने तटीय क्षेत्रों में समुद्र की स्थिति खराब रहने की चेतावनी जारी की थी। कलिंगपट्टनम, भीमुनिपटनम, विशाखापत्तनम, गंगावरम और काकीनाडा बंदरगाहों पर भी चेतावनी संकेत जारी किए गए थे।
पश्चिम बंगाल समेत दूसरे राज्यों पर भी असर
बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसम प्रणाली के कारण पूर्वी और मध्य भारत के मौसम में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। गहरे दबाव के जमीन के अंदर बढ़ने के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग लगातार इसकी दिशा और तीव्रता पर नजर रख रहा है। गहरे दबाव के कारण सबसे अधिक खतरा भारी बारिश से जुड़ा है। लगातार बारिश होने पर निचले इलाकों में जलभराव, स्थानीय बाढ़, पेड़ गिरने और यातायात प्रभावित होने जैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं। प्रशासन की ओर से लोगों को मौसम विभाग और स्थानीय अधिकारियों की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है।
कैसे बनता है चक्रवात?
समुद्र के गर्म पानी के ऊपर चक्रवाती मौसम प्रणालियां विकसित होती हैं। गर्म समुद्री सतह के संपर्क में आने वाली नम हवा ऊपर उठती है, जिससे नीचे कम दबाव का क्षेत्र बनता है। आसपास की हवा इस कम दबाव वाले क्षेत्र की ओर बढ़ती है और गर्म होकर फिर ऊपर उठने लगती है। इस प्रक्रिया से बड़ी मात्रा में बादल बनते हैं। पृथ्वी के घूर्णन के कारण मौसम प्रणाली घूमने लगती है और अनुकूल परिस्थितियां मिलने पर धीरे-धीरे मजबूत हो सकती है। हालांकि हर डिप्रेशन या गहरा दबाव चक्रवाती तूफान में तब्दील हो, यह जरूरी नहीं है।
मौजूदा मौसम प्रणाली के मामले में भी यही स्थिति रही। इसे संभावित रूप से ‘अर्णब’ नाम मिलने की चर्चा थी, लेकिन आधिकारिक रूप से यह चक्रवाती तूफान की श्रेणी तक नहीं पहुंचा और गहरे दबाव के रूप में ही तट पार कर गया। फिलहाल मौसम विभाग गहरे दबाव की आगे की गतिविधि पर नजर बनाए हुए है। आंध्र प्रदेश और ओडिशा में इसके प्रभाव से भारी बारिश और तेज हवाओं का खतरा बना हुआ है। तटीय तथा निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करने और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।