नई दिल्ली। नकली और मिलावटी पनीर को लेकर लगातार सामने आ रही शिकायतों के बीच भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने बड़ा कदम उठाया है। एनालॉग पनीर को सामान्य ‘पनीर’ के नाम से बनाने और बेचने पर रोक लगाने के लिए नियमों में संशोधन का मसौदा जारी किया गया है। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य उपभोक्ताओं को असली दूध से बने पनीर और उसके विकल्प के रूप में तैयार एनालॉग उत्पाद के बीच स्पष्ट अंतर बताना है।

FSSAI ने खाद्य सुरक्षा और मानक (बिक्री पर प्रतिषेध और निर्बंधन) विनियम, 2011 में संशोधन का मसौदा तैयार किया है। इससे एनालॉग डेयरी उत्पादों की पहचान और उनकी बिक्री को लेकर नियम अधिक स्पष्ट किए जाने की तैयारी है। अधिसूचना 22 सितंबर को जारी की गई, जबकि 23 सितंबर को इसे भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया गया। FSSAI की अधिसूचना सूची में इसे 24 सितंबर को दर्ज किया गया है।

हालांकि महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अभी मसौदा अधिसूचना है। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने और अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही संशोधित नियम प्रभावी होंगे।

क्या है एनालॉग पनीर

सामान्य पनीर मुख्य रूप से दूध से तैयार किया जाता है। इसके विपरीत एनालॉग उत्पादों में दूध से मिलने वाली कुछ सामग्री को अन्य स्रोतों से प्राप्त सामग्री से पूरी तरह या आंशिक रूप से बदला जा सकता है। ऐसे उत्पाद दिखने, स्वाद या बनावट में पनीर जैसे हो सकते हैं, जिससे सामान्य ग्राहक के लिए दोनों के बीच अंतर करना मुश्किल हो सकता है।

सबसे बड़ी समस्या तब पैदा होती है जब एनालॉग उत्पाद को उसकी वास्तविक पहचान बताए बिना केवल ‘पनीर’ के नाम से ग्राहक को बेचा जाता है। ऐसी स्थिति में ग्राहक यह समझ सकता है कि उसे पारंपरिक दूध से तैयार पनीर दिया जा रहा है।

प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य इसी भ्रम को दूर करना है। यदि कोई खाद्य पदार्थ निर्धारित पनीर मानकों के अनुरूप नहीं है तो उसे सामान्य पनीर के रूप में पेश नहीं किया जा सकेगा।

गलत नाम से बिक्री पर होगी सख्ती

नियमों में बदलाव के बाद एनालॉग उत्पादों को निर्धारित डेयरी उत्पादों के नाम से बेचने पर प्रतिबंध का स्पष्ट आधार तैयार होगा। इसका असर निर्माण इकाइयों से लेकर थोक और खुदरा बाजार तक दिखाई दे सकता है।

होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैटरिंग प्रतिष्ठान और अन्य खाद्य कारोबार भी इस व्यवस्था के दायरे में आएंगे। यदि किसी प्रतिष्ठान में एनालॉग उत्पाद का इस्तेमाल किया जा रहा है तो उसे उपभोक्ता के सामने वास्तविक उत्पाद के अनुरूप ही प्रस्तुत करना होगा।

नियमों के उल्लंघन की स्थिति में खाद्य सुरक्षा कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकेगी। इससे उन कारोबारियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है जो सस्ते विकल्प को असली पनीर के रूप में बेचकर ग्राहकों को भ्रमित करते हैं।

नकली और मिलावटी पनीर को लेकर बढ़ी चिंता

त्योहारी सीजन, शादी-विवाह और अन्य बड़े आयोजनों के दौरान पनीर की मांग तेजी से बढ़ जाती है। इसी दौरान बाजार में पनीर की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें भी बढ़ती हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से समय-समय पर नमूने लेकर उनकी जांच भी की जाती है।

एनालॉग पनीर और मिलावटी पनीर को एक ही मानना सही नहीं है। एनालॉग उत्पाद निर्धारित नियमों और सही पहचान के साथ बनाया और बेचा जाए तो वह अलग खाद्य श्रेणी का उत्पाद हो सकता है। समस्या उस समय होती है जब उसे उसकी वास्तविक पहचान छिपाकर असली पनीर के नाम से बेचा जाता है।

यही वजह है कि नए मसौदे में नाम और पहचान को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाने पर जोर दिया गया है।

ग्राहकों को मिलेगी सही जानकारी

प्रस्तावित नियमों का सीधा फायदा उपभोक्ताओं को मिलने की उम्मीद है। बाजार में पनीर खरीदने वाला ग्राहक आमतौर पर यही मानता है कि उसे दूध से बना पारंपरिक पनीर मिल रहा है। यदि उसकी जगह कोई दूसरा उत्पाद दिया जा रहा है तो ग्राहक को इसकी स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।

उत्पाद की सही पहचान होने से ग्राहक अपनी जरूरत, पसंद और कीमत के अनुसार फैसला कर सकेगा। साथ ही केवल कम कीमत देखकर किसी एनालॉग उत्पाद को असली पनीर समझकर खरीदने की आशंका भी कम होगी।

खाद्य पदार्थों के मामले में सही लेबलिंग और पारदर्शिता उपभोक्ता सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रस्तावित बदलाव इसी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में देखा जा रहा है।

कारोबारियों की बढ़ेगी जवाबदेही

नियम अंतिम रूप से लागू होने के बाद खाद्य कारोबारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे जिस नाम से उत्पाद बेच रहे हैं, वह उसके वास्तविक स्वरूप और निर्धारित मानकों के अनुरूप हो।

निर्माताओं के लिए पैकेजिंग और लेबलिंग में स्पष्ट जानकारी देना महत्वपूर्ण होगा। वहीं दुकानदारों और खाद्य प्रतिष्ठानों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि ग्राहकों को किसी उत्पाद की पहचान को लेकर भ्रमित न किया जाए।

खास तौर पर रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबार में पनीर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। इसलिए इन प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल किए जाने वाले उत्पाद की गुणवत्ता और वास्तविक पहचान भी निगरानी के दायरे में आ सकती है।

जांच का दायरा होगा व्यापक

खाद्य सुरक्षा विभाग बाजार से खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच करता है। प्रस्तावित नियमों से एनालॉग डेयरी उत्पादों की पहचान और बिक्री की जांच के लिए अधिक स्पष्ट नियामक आधार मिलने की उम्मीद है।

यदि कोई उत्पाद पनीर के नाम से बेचा जा रहा है लेकिन जांच में वह निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिलता, तो संबंधित कारोबारी के खिलाफ लागू कानून और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

इसके साथ निर्माण इकाइयों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, पैकेजिंग और लेबलिंग की भी जांच महत्वपूर्ण होगी।

अभी मसौदा चरण में है नियम

FSSAI द्वारा जारी संशोधन अभी मसौदा स्तर पर है। मसौदा अधिसूचना पर निर्धारित अवधि के भीतर संबंधित पक्षों से आपत्तियां और सुझाव लिए जाएंगे। इन पर विचार करने के बाद अंतिम नियम अधिसूचित किए जा सकते हैं।

इसलिए एनालॉग पनीर की बिक्री या निर्माण को पूरी तरह प्रतिबंधित मानना सही नहीं होगा। प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य ऐसे उत्पाद को सामान्य पनीर के नाम से बनाने, लेबल करने या बेचने पर रोक लगाना है।

अंतिम नियम लागू होने के बाद एनालॉग उत्पाद बनाने और बेचने वाले कारोबारियों को निर्धारित नाम, पहचान और लेबलिंग संबंधी प्रावधानों का पालन करना होगा। इससे बाजार में असली पनीर और उसके विकल्प के बीच अंतर स्पष्ट होने के साथ उपभोक्ताओं को भी सही उत्पाद चुनने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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