Mumbai. मुंबई। देश की मशहूर पहलवान और ‘दंगल गर्ल’ के नाम से पहचान बनाने वाली बबीता फोगाट के घर एक बार फिर खुशियों ने दस्तक दी है। बबीता फोगाट दूसरी बार मां बनी हैं। उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया है। खास बात यह है कि बबीता ने इस खुशखबरी को शिवरात्रि के पावन अवसर पर अपने प्रशंसकों के साथ साझा किया। सोशल मीडिया पर नन्हीं बेटी की पहली झलक साझा करते हुए उन्होंने अपनी खुशी जाहिर की और बेटी को ‘पार्वती स्वरूप’ बताया। बबीता फोगाट ने बेटी के जन्म को भगवान महादेव का आशीर्वाद बताया। उन्होंने भावुक संदेश के जरिए कहा कि महादेव की कृपा से शिवरात्रि के पवित्र दिन उनके जीवन में एक नन्हीं परी के रूप में बेटी का आगमन हुआ है। बेटी को परिवार के लिए अनमोल आशीर्वाद बताते हुए उन्होंने इस खुशी को शब्दों से परे बताया। बेटी के जन्म की खबर सामने आने के बाद उनके प्रशंसकों और शुभचिंतकों की ओर से बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया।
बबीता फोगाट और उनके पति विवेक सुहाग की शादी 1 दिसंबर 2019 को हुई थी। शादी के करीब दो साल बाद 2021 में दोनों पहली बार माता-पिता बने थे। उस समय उनके घर बेटे का जन्म हुआ था। अब करीब पांच साल बाद बेटी के जन्म से परिवार में खुशियां और बढ़ गई हैं। बबीता और विवेक अपने पारिवारिक जीवन के साथ-साथ सोशल मीडिया के माध्यम से भी प्रशंसकों से जुड़े रहते हैं। हरियाणा के चरखी दादरी जिले के बलाली गांव से ताल्लुक रखने वाली बबीता फोगाट ने कुश्ती के क्षेत्र में देश को गौरवान्वित किया है। उनका नाम उन महिला खिलाड़ियों में शामिल है जिन्होंने सामाजिक बंदिशों और चुनौतियों के बावजूद खेल के मैदान में अपनी अलग पहचान बनाई। बबीता के पिता महावीर सिंह फोगाट ने अपनी बेटियों को कुश्ती की ट्रेनिंग दी। उस दौर में लड़कियों का अखाड़े में उतरना आसान नहीं था, लेकिन परिवार के समर्थन और अपनी मेहनत के दम पर फोगाट बहनों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।
बबीता फोगाट के साथ उनकी बड़ी बहन गीता फोगाट और बहन संगीता फोगाट ने भी कुश्ती में देश का नाम रोशन किया। उनकी चचेरी बहन विनेश फोगाट ने भी अंतरराष्ट्रीय कुश्ती में भारत का प्रतिनिधित्व किया। फोगाट परिवार की बेटियों की खेल यात्रा ने देशभर में महिला खिलाड़ियों और बेटियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। बबीता ने कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय कुश्ती में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन शुरू कर दिया था। साल 2006 में उन्होंने महज 17 वर्ष की उम्र में राष्ट्रमंडल खेलों में सिल्वर मेडल जीतकर अपनी पहचान बनाई। इसके बाद 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में भी उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया। वर्ष 2014 के ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में बबीता ने 55 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर बड़ी उपलब्धि हासिल की।
वह अपनी बड़ी बहन गीता फोगाट के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला पहलवान बनीं। इसके अलावा बबीता ने एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप और वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी पदक हासिल किए। उन्होंने वर्ष 2016 के रियो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उनकी खेल यात्रा ने उन्हें देश की चर्चित महिला पहलवानों में शामिल कर दिया। कुश्ती से संन्यास लेने के बाद बबीता फोगाट ने राजनीति में भी कदम रखा। वर्ष 2019 में उन्होंने अपने पिता महावीर सिंह फोगाट के साथ भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इसके बाद वह सार्वजनिक जीवन में भी सक्रिय रहीं।
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