धर्म : प्रकाश और खुशियों का पर्व दिवाली हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस दिन घरों को रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों और मिट्टी के दीपकों से सजाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि दिवाली की रात दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि आती है और अंधकार पर प्रकाश की विजय का संदेश मिलता है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। घर के मुख्य द्वार से लेकर मंदिर, आंगन, छत और बालकनी तक दीपक जलाने की परंपरा है।
साल 2026 में दिवाली का त्योहार 8 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा।
त्योहार नजदीक आते ही घरों में साफ-सफाई और सजावट की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस दौरान लोग बाजार से नए मिट्टी के दीये खरीदते हैं। हालांकि, कई घरों में पिछले साल के इस्तेमाल किए हुए दीये भी रखे होते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या दिवाली पर पुराने मिट्टी के दीयों को दोबारा इस्तेमाल करना चाहिए? क्या ऐसा करना शुभ होता है या अशुभ? आइए जानते हैं इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और जरूरी नियम।
दिवाली पर दीपक जलाने का क्या है धार्मिक महत्व?
हिंदू धर्म में दीपक को प्रकाश, ज्ञान, सकारात्मकता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपक की लौ अज्ञानता और नकारात्मकता के अंधकार को दूर करने का संदेश देती है। यही वजह है कि किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत दीप प्रज्वलित करके की जाती है।दिवाली पर दीपक जलाने का महत्व विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और स्वच्छ, प्रकाशमय घरों में उनका स्वागत किया जाता है। इसलिए लोग घर के हर कोने में दीपक जलाते हैं। मुख्य द्वार, पूजा घर, आंगन और तुलसी के पास दीपक रखने की परंपरा भी प्रचलित है।
क्या पुराने मिट्टी के दीये दोबारा जला सकते हैं?
दिवाली पर पुराने मिट्टी के दीयों को दोबारा इस्तेमाल करने को लेकर अलग-अलग धार्मिक और पारिवारिक मान्यताएं प्रचलित हैं। पारंपरिक मान्यता के अनुसार, दिवाली की मुख्य लक्ष्मी पूजा में नए और साफ मिट्टी के दीये जलाना अधिक शुभ माना जाता है। कुछ परंपराओं में पूजा में एक बार इस्तेमाल किए गए मिट्टी के दीपक को दोबारा प्रयोग करने से बचने की सलाह दी जाती है।ऐसी लोक मान्यता है कि पूजा में इस्तेमाल किए गए मिट्टी के दीये को दोबारा जलाने के बजाय उसे अलग कर देना चाहिए। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि पुराने मिट्टी के दीये को हर परिस्थिति में दोबारा इस्तेमाल करना अशुभ है, ऐसा कोई सर्वमान्य धार्मिक नियम नहीं है।अगर आपके घर में पिछले साल के मिट्टी के दीये साबुत और अच्छी स्थिति में रखे हैं, तो कुछ परंपराओं के अनुसार उन्हें अच्छी तरह साफ करके दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। यह पूरी तरह परिवार की धार्मिक परंपरा और व्यक्तिगत श्रद्धा पर निर्भर करता है।
पीतल और तांबे के दीपक दोबारा जला सकते हैं?
मिट्टी के दीयों के मुकाबले पीतल, तांबे और चांदी जैसे धातुओं से बने दीपकों का बार-बार इस्तेमाल सामान्य धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। घरों के मंदिरों में प्रतिदिन पूजा के दौरान ऐसे दीपक जलाए जाते हैं।
इन दीपकों को दोबारा इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह साफ करना चाहिए। पुराने तेल, घी और कालिख को पूरी तरह हटा दें। इसके बाद साफ बाती और ताजा घी या तेल डालकर दीपक जलाया जा सकता है।
धातु के दीपक टिकाऊ होते हैं और नियमित सफाई के साथ लंबे समय तक उपयोग किए जा सकते हैं। यही वजह है कि रोजाना की पूजा में इनका इस्तेमाल काफी प्रचलित है।
पुराने दीये इस्तेमाल करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप दिवाली पर पुराने दीयों का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।
- मिट्टी का दीया इस्तेमाल करने से पहले उसकी अच्छी तरह सफाई करें।
- दीये में पुराना तेल या घी बचा हो तो उसे पूरी तरह निकाल दें।
- हर बार दीपक जलाने के लिए नई और साफ रुई की बाती का इस्तेमाल करें।
- दीपक में हमेशा ताजा घी या तेल डालें।
- टूटे, चटके या दरार वाले मिट्टी के दीयों का इस्तेमाल करने से बचें।
- पीतल और तांबे के दीपकों को साफ करके दोबारा पूजा में इस्तेमाल किया जा सकता है।
धार्मिक मान्यताओं में पूजा की सामग्री की स्वच्छता को विशेष महत्व दिया गया है। इसलिए दीपक का साफ और अच्छी स्थिति में होना जरूरी माना जाता है।
क्या करना चाहिए पुराने मिट्टी के दीयों का?
दिवाली की पूजा में इस्तेमाल किए गए पुराने मिट्टी के दीयों को लेकर भी कई परंपराएं हैं। कुछ परिवार पूजा के बाद इन दीयों को अलग रख देते हैं, जबकि कुछ लोग उन्हें साफ करके सजावट या अन्य घरेलू उपयोग में लेते हैं।यदि मिट्टी का दीया टूट गया है या दोबारा जलाने योग्य नहीं है, तो उसे घर में पूजा की सामग्री के साथ रखने के बजाय उचित तरीके से मिट्टी में मिलाया जा सकता है। ध्यान रखें कि दीये को इस तरह न फेंकें कि आसपास गंदगी फैले या किसी को चोट लगे।
दिवाली पर कितने दीये जलाना माना जाता है शुभ?
दिवाली पर दीपकों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं हैं। कुछ परिवार पांच, सात, नौ, 11, 21 या 51 दीये जलाना शुभ मानते हैं। वहीं, कई लोग अपनी श्रद्धा और घर की व्यवस्था के अनुसार अधिक संख्या में दीपक जलाते हैं।मुख्य द्वार, घर के मंदिर, आंगन और तुलसी के पास दीपक जलाने की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है। हालांकि, दीपकों की संख्या से अधिक महत्व श्रद्धा, स्वच्छता और पूजा की भावना को दिया जाता है।
दिवाली पर पुराने मिट्टी के दीये इस्तेमाल करने को लेकर कोई एक सर्वमान्य नियम नहीं है। मुख्य पूजा के लिए नए मिट्टी के दीये जलाना पारंपरिक पसंद है, जबकि साबुत पुराने दीयों का साफ-सफाई के बाद दोबारा इस्तेमाल भी कुछ परिवारों में स्वीकार्य है। पीतल, तांबे और अन्य टिकाऊ धातुओं के दीपक सामान्य रूप से बार-बार इस्तेमाल किए जा सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण है कि दीपक स्वच्छ हो और उसे श्रद्धा के साथ प्रज्वलित किया जाए।