स्पोर्ट्स। न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में भारतीय तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की वापसी चर्चा का विषय बनी हुई है। लंबे समय से अपनी स्विंग गेंदबाजी और सटीक लाइन-लेंथ के लिए पहचाने जाने वाले भुवनेश्वर शुरुआती दो मुकाबलों में उम्मीद के मुताबिक प्रभाव नहीं छोड़ सके। पहले मैच में उन्हें कोई विकेट नहीं मिला, जबकि दूसरे मुकाबले में भी उन्हें विकेट हासिल करने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। ऐसे में भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल की सलाह को भुवनेश्वर के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, मोर्कल ने उन्हें किन शब्दों में सलाह दी, इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
पहले दो मैचों में नहीं दिखा पुराना असर
भुवनेश्वर कुमार भारतीय क्रिकेट के अनुभवी तेज गेंदबाजों में गिने जाते हैं। नई गेंद से स्विंग कराने और डेथ ओवरों में नियंत्रित गेंदबाजी करने की उनकी क्षमता लंबे समय तक भारतीय टीम की ताकत रही है।न्यूजीलैंड के खिलाफ वापसी के बाद उनसे उम्मीद थी कि वह शुरुआती ओवरों में बल्लेबाजों पर दबाव बनाएंगे। हालांकि, दिए गए मैच विवरण के अनुसार, पहले मुकाबले में उन्हें एक भी विकेट हासिल नहीं हुआ।दूसरे मैच में भी उनकी गेंदबाजी उतनी प्रभावशाली नहीं रही, जितनी टीम प्रबंधन और प्रशंसकों को उम्मीद रही होगी। इससे उनकी लय और आगामी मुकाबलों में प्रदर्शन को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
दो मैचों में 99 रन खर्च, मिला सिर्फ एक विकेट
न्यूजीलैंड के खिलाफ शुरुआती दो टी20 मुकाबलों में भुवनेश्वर कुमार ने कुल आठ ओवर गेंदबाजी की और 99 रन खर्च किए। पहले मैच में उन्होंने चार ओवर में 49 रन दिए और कोई विकेट नहीं लिया। दूसरे मुकाबले में उन्होंने चार ओवर में 50 रन देकर एक विकेट हासिल किया।इन दो मैचों में उनकी इकॉनमी रेट 12.37 रही। ऐसे प्रदर्शन के बाद अनुभवी गेंदबाज की वापसी पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, टीम प्रबंधन ने उन पर भरोसा जताया है।
मोर्ने मोर्कल ने दी खास सलाह
भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल ने भुवनेश्वर कुमार को बाहरी दबाव और उम्मीदों से दूर रहने की सलाह दी है।मोर्कल का संदेश है कि भुवनेश्वर किसी विशेष उपलब्धि के पीछे भागने के बजाय अपने स्वाभाविक खेल पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि चार साल बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी करना आसान नहीं होता और खिलाड़ी को अपनी लय हासिल करने के लिए कुछ मुकाबलों का समय मिलना चाहिए।मोर्कल ने भुवनेश्वर की क्षमता और अनुभव पर भरोसा जताते हुए स्पष्ट किया कि उन्हें जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है।
चार साल बाद हुई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी
भुवनेश्वर कुमार ने इससे पहले नवंबर 2022 में न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला था। इसके बाद वह लंबे समय तक भारतीय टी20 टीम से बाहर रहे।इस दौरान उन्होंने घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में अपनी गेंदबाजी से प्रभावित किया। विशेष रूप से आईपीएल के पिछले दो सीजन में उनका प्रदर्शन शानदार रहा।2025 के आईपीएल में उन्होंने 17 विकेट लिए, जबकि 2026 के सीजन में 28 विकेट हासिल किए। इसी प्रदर्शन के आधार पर उन्हें भारतीय टीम में वापसी का अवसर मिला।
मैच अभ्यास की कमी भी बनी चुनौती
मोर्ने मोर्कल ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी के समय भुवनेश्वर के सामने मैच अभ्यास की कमी भी एक चुनौती थी।उनके अनुसार, अभ्यास सत्र में गेंदबाजी करना और अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में दबाव के बीच प्रदर्शन करना अलग-अलग परिस्थितियां हैं।भुवनेश्वर को वापसी से पहले सीमित तैयारी का अवसर मिला था। ऐसे में टीम प्रबंधन का मानना है कि लगातार मुकाबले खेलने से उनकी लय बेहतर हो सकती है।
स्विंग गेंदबाजी रही है भुवी की सबसे बड़ी ताकत
भुवनेश्वर कुमार को भारतीय क्रिकेट में स्विंग गेंदबाजी के लिए विशेष पहचान मिली है। वह नई गेंद को दोनों दिशाओं में स्विंग कराने की क्षमता रखते हैं।पावरप्ले में उनकी सटीक लाइन-लेंथ बल्लेबाजों के लिए चुनौती बनती रही है। इसके अलावा डेथ ओवरों में धीमी गेंद और यॉर्कर का इस्तेमाल भी उनकी गेंदबाजी का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।हालांकि, आधुनिक टी20 क्रिकेट में बल्लेबाज शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाते हैं। ऐसे में गेंदबाजों के लिए रन रोकना और विकेट हासिल करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।
न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में भी करना पड़ा संघर्ष
न्यूजीलैंड की पिचों और मौसम को आमतौर पर स्विंग गेंदबाजों के लिए मददगार माना जाता है। यही वजह थी कि भुवनेश्वर की वापसी से भारतीय टीम को शुरुआती ओवरों में सफलता मिलने की उम्मीद थी।लेकिन क्राइस्टचर्च में खेले गए शुरुआती दो मुकाबलों में न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी की।पहले मुकाबले में न्यूजीलैंड ने चार विकेट पर 225 रन बनाए, जबकि दूसरे मैच में पांच विकेट पर 180 रन बनाए। इससे भारतीय गेंदबाजी आक्रमण पर दबाव बना रहा।
युवा गेंदबाजों को लेकर भी बोले मोर्कल
भुवनेश्वर के अलावा मोर्ने मोर्कल ने भारतीय टीम के युवा तेज गेंदबाजों की भूमिका पर भी बात की।दूसरे टी20 मुकाबले में मयंक यादव की जगह प्रिंस यादव को मौका देने के फैसले को उन्होंने रणनीतिक बदलाव बताया।मोर्कल के अनुसार, प्रिंस यादव डेथ ओवरों में सटीक यॉर्कर डालने की क्षमता रखते हैं। मैदान की परिस्थितियों और संभावित ओस को ध्यान में रखते हुए उन्हें टीम में शामिल किया गया था।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मयंक यादव को बाहर रखने का फैसला केवल उनके प्रदर्शन के कारण नहीं लिया गया था।
तीसरे टी20 में भुवनेश्वर पर रहेंगी निगाहें
भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज में भारतीय टीम शुरुआती दो मुकाबले जीतकर 2-0 से आगे है।अब तीसरे मुकाबले में भुवनेश्वर कुमार के प्रदर्शन पर विशेष नजर रहेगी। टीम प्रबंधन चाहेगा कि अनुभवी तेज गेंदबाज नई गेंद से विकेट हासिल करें और रन गति पर नियंत्रण रखें।जसप्रीत बुमराह की अनुपस्थिति में भुवनेश्वर का अनुभव भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण के लिए महत्वपूर्ण है। वह युवा गेंदबाजों का मार्गदर्शन भी कर सकते हैं।
वापसी के बाद खुद को साबित करने की चुनौती
36 वर्षीय भुवनेश्वर कुमार के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी महत्वपूर्ण अवसर है। शुरुआती दो मुकाबलों में उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, लेकिन गेंदबाजी कोच ने उनका समर्थन किया है।मोर्ने मोर्कल का मानना है कि भुवनेश्वर के पास अनुभव और कौशल दोनों मौजूद हैं। जरूरत केवल अपनी स्वाभाविक गेंदबाजी पर भरोसा बनाए रखने और लगातार मैच खेलकर लय हासिल करने की है।
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