इस्लामाबाद। पाकिस्तान में पत्रकारों और स्वतंत्र मीडिया संस्थानों के सामने चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। कानूनी कार्रवाई, सरकारी दबाव, धमकियों, शारीरिक हमलों और डिजिटल उत्पीड़न के कारण देश में पत्रकारिता का माहौल मुश्किल होता जा रहा है। पत्रकारों के खिलाफ मानहानि, फर्जी खबरें फैलाने और ऑनलाइन उत्पीड़न जैसे आरोपों के तहत मामले दर्ज किए जा रहे हैं। वहीं, कई पत्रकारों को जांच एजेंसियों के नोटिस, पूछताछ और गिरफ्तारी का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच पाकिस्तान में मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर जारी एक नई रिपोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है।इस्लामाबाद स्थित मीडिया निगरानी संगठन फ्रीडम नेटवर्क की 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025-26 के दौरान पाकिस्तान में पत्रकारिता और मीडिया कर्मियों के लिए माहौल बेहद प्रतिकूल बना रहा। रिपोर्ट का शीर्षक 'फ्रॉम वायलेंस टू लॉफेयर: प्रोसेस ऐज पनिशमेंट फॉर जर्नलिस्ट्स' है। इसका अर्थ है कि पत्रकारों के खिलाफ हिंसा के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया को भी सजा के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच पत्रकारों और मीडिया कर्मियों के खिलाफ कुल 97 हमलों और अन्य उल्लंघनों के मामले दर्ज किए गए। संगठन ने कहा कि मामलों की संख्या में पिछली अवधि की तुलना में कमी आने का मतलब यह नहीं है कि पत्रकारों की सुरक्षा बेहतर हो गई है। रिपोर्ट में हर महीने औसतन करीब 10 मामले सामने आने को चिंताजनक बताया गया है।
पत्रकारों के खिलाफ दर्ज हुए 97 मामले
फ्रीडम नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच पत्रकारों के खिलाफ एक काम से संबंधित हत्या, तीन हत्या के प्रयास, जान से मारने या नुकसान पहुंचाने की 18 धमकियां, 11 शारीरिक हमले, 13 कानूनी कार्रवाइयां और कानूनी कार्रवाई की 32 धमकियां दर्ज की गईं।रिपोर्ट में बताया गया है कि इन घटनाओं का असर देश के अलग-अलग हिस्सों में देखने को मिला। पंजाब प्रांत में सबसे अधिक 49 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद खैबर पख्तूनख्वा, इस्लामाबाद और बलूचिस्तान में पत्रकारों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आईं।रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल और स्वतंत्र पत्रकारों को सबसे अधिक निशाना बनाया गया। कई मामलों में पीड़ित पत्रकारों या उनके परिवारों ने सरकारी अधिकारियों और संस्थानों से जुड़े लोगों पर घटनाओं के पीछे होने का आरोप लगाया। रिपोर्ट में ऐसे आरोप करीब दो-तिहाई मामलों में सामने आने की बात कही गई है। हालांकि, यह आरोप हैं और प्रत्येक मामले में संबंधित पक्ष की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
PECA कानून बना पत्रकारों के लिए बड़ी चुनौती
रिपोर्ट में पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक अपराध निवारण अधिनियम (PECA) को पत्रकारों के खिलाफ कानूनी दबाव का प्रमुख माध्यम बताया गया है। इस कानून में 2025 की शुरुआत में संशोधन किए गए थे। फ्रीडम नेटवर्क का आरोप है कि संशोधित कानून का इस्तेमाल ऑनलाइन अभिव्यक्ति और सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों को निशाना बनाने के लिए बढ़ा है।इस कानून के तहत राष्ट्रीय साइबर अपराध जांच एजेंसी (NCCIA) की भूमिका भी रिपोर्ट में सवालों के घेरे में है। संगठन के मुताबिक, पत्रकारों को सोशल मीडिया पोस्ट, खबरों और सरकारी कामकाज पर की गई टिप्पणियों के कारण नोटिस तथा पूछताछ का सामना करना पड़ रहा है।रिपोर्ट में बताया गया है कि पत्रकारों के खिलाफ मानहानि, गलत जानकारी फैलाने, उत्पीड़न और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोपों को साइबर अपराध संबंधी प्रक्रियाओं के माध्यम से आगे बढ़ाया जाता है। यहां तक कि सार्वजनिक खर्च, भ्रष्टाचार और सरकारी अधिकारियों के कामकाज पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।फ्रीडम नेटवर्क के अनुसार, कई मामलों में एफआईआर या दोषसिद्धि से पहले ही कानूनी प्रक्रिया पत्रकारों के लिए दंड जैसी बन जाती है। नोटिस, बार-बार पूछताछ, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच, अदालतों के चक्कर, यात्रा खर्च और वकीलों की फीस के कारण पत्रकार आर्थिक और मानसिक दबाव का सामना करते हैं।
हिंसा के साथ आर्थिक दबाव भी बढ़ा
पाकिस्तान में पत्रकारों पर दबाव केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं है। मीडिया संस्थानों को विज्ञापन रोकने, आर्थिक सहायता और सरकारी भुगतान में देरी जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है।इससे पहले पाकिस्तान प्रेस फाउंडेशन (PPF) की मई 2026 में जारी रिपोर्ट में जनवरी 2025 से अप्रैल 2026 के बीच पत्रकारों को निशाना बनाने की कम से कम 233 घटनाएं दर्ज की गई थीं। इनमें 67 शारीरिक हमले, 67 आपराधिक शिकायतें, 11 गिरफ्तारियां, 11 हिरासत और तीन अपहरण के मामले शामिल थे।रिपोर्ट के मुताबिक, इन 67 आपराधिक शिकायतों में से 34 मामले PECA कानून के तहत दर्ज किए गए थे। इसके अलावा पत्रकारों को साइबर अपराध जांच एजेंसी की ओर से नोटिस और समन मिलने की घटनाएं भी सामने आईं।PPF ने मीडिया संस्थानों पर आर्थिक दबाव और सरकारी विज्ञापनों के इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई थी। संगठन का कहना था कि विज्ञापन रोकने और नियामक संस्थाओं की कार्रवाई के जरिए मीडिया की संपादकीय स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
पत्रकार सुरक्षा आयोगों की कार्यप्रणाली पर सवाल
पाकिस्तान में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कानूनी प्रावधान और संस्थागत व्यवस्थाएं मौजूद हैं। नवंबर 2025 में संघीय स्तर पर पत्रकारों और मीडिया पेशेवरों की सुरक्षा के लिए आयोग की स्थापना भी की गई थी। इसके बावजूद पत्रकारों को सुरक्षा और न्याय दिलाने की व्यवस्था प्रभावी साबित नहीं हो पा रही है।फ्रीडम नेटवर्क की रिपोर्ट में कहा गया है कि संघीय पत्रकार सुरक्षा तंत्र प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रहा है। वहीं, सिंध प्रांत में गठित आयोग की गतिविधियां दिखाई देने के बावजूद कराची के बाहर इसका प्रभाव सीमित है।रिपोर्ट के लेखकों में पत्रकार अदन रहमत और फ्रीडम नेटवर्क के कार्यकारी निदेशक इकबाल खट्टक शामिल हैं। इसे इंटरनेशनल मीडिया सपोर्ट (IMS) की तकनीकी सहायता से तैयार किया गया है।इकबाल खट्टक ने भी पत्रकारों की सुरक्षा के लिए बनाए गए आयोगों की प्रभावशीलता पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि जब पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कानून मौजूद हैं, तब भी लगातार उल्लंघन सामने आना संबंधित संस्थाओं के लिए गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए।
महिला पत्रकारों को भी झेलना पड़ रहा उत्पीड़न
पाकिस्तान में महिला पत्रकारों के सामने चुनौतियां और भी जटिल हैं। उन्हें पेशेवर दबाव के साथ ऑनलाइन उत्पीड़न, व्यक्तिगत हमलों और एआई से तैयार की गई फर्जी तस्वीरों तथा वीडियो के जरिए बदनाम करने की कोशिशों का सामना करना पड़ रहा है।पाकिस्तान प्रेस फाउंडेशन की रिपोर्ट में महिला पत्रकारों को निशाना बनाकर फर्जी एआई सामग्री प्रसारित किए जाने की घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है। नवंबर 2025 में पत्रकार बेनजीर शाह ने उनके नाम से बनाए गए एआई वीडियो को लेकर शिकायत की थी।ऐसे मामलों में पत्रकारों की पेशेवर रिपोर्टिंग पर सवाल उठाने के बजाय उनके निजी जीवन और छवि को निशाना बनाया जाता है। इससे महिला पत्रकारों की सुरक्षा के साथ उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा पर भी असर पड़ता है।
2 नवंबर को मनाया जाएगा पत्रकारों के खिलाफ अपराधों की समाप्ति का अंतरराष्ट्रीय दिवस
संयुक्त राष्ट्र की ओर से 2 नवंबर को पत्रकारों के खिलाफ अपराधों के लिए दंडमुक्ति समाप्त करने का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य पत्रकारों की हत्या, हमले, धमकी और उत्पीड़न के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करना तथा प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करना है।ऐसे समय में फ्रीडम नेटवर्क की नई रिपोर्ट ने पाकिस्तान में पत्रकारिता की स्थिति पर फिर से अंतरराष्ट्रीय बहस को तेज कर दिया है। संगठन का मानना है कि पत्रकारों के खिलाफ हिंसा और कानूनी उत्पीड़न के मामलों में निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है।कुल मिलाकर, पाकिस्तान में पत्रकारों के सामने अब केवल खबर जुटाने और प्रकाशित करने की चुनौती नहीं है, बल्कि कानूनी कार्रवाई, आर्थिक दबाव और व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़े खतरे भी बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मामलों की संख्या में कमी को प्रेस की आजादी में सुधार नहीं माना जा सकता। इसके लिए पत्रकारों को वास्तविक सुरक्षा, स्वतंत्र कानूनी व्यवस्था और मीडिया संस्थानों को बिना दबाव काम करने का अवसर देना जरूरी है।
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