भारत और ऑस्ट्रेलिया की सेनाएं एक साथ मैदान में 14 दिनों तक चलेगा युद्धाभ्यास
तिरुवनंतपुरम। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। दोनों देशों की सेनाओं का संयुक्त सैन्य अभ्यास 'ऑस्ट्राहिंद 2026' केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में शुरू हो गया है। इस अभ्यास में भारतीय सेना और ऑस्ट्रेलियाई सेना के लगभग 120-120 जवान भाग ले रहे हैं। कुल 240 सैन्यकर्मी 14 दिनों तक संयुक्त प्रशिक्षण, सामरिक गतिविधियों और विशेष सैन्य अभियानों का अभ्यास करेंगे। इस वर्ष अभ्यास का मुख्य उद्देश्य तटीय और द्वीपीय क्षेत्रों में सैन्य अभियानों के दौरान दोनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है।
19 अक्टूबर से 1 नवंबर तक चलेगा सैन्य अभ्यास
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ऑस्ट्राहिंद सैन्य अभ्यास का यह पांचवां संस्करण है। इसका आयोजन 19 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक किया जाएगा।इस दौरान भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई सैनिक अलग-अलग परिस्थितियों में संयुक्त सैन्य अभियानों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।अभ्यास में निगरानी, टोही अभियान, सामरिक गतिविधियों और संभावित सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।दोनों देशों के सैनिक एक-दूसरे की कार्यप्रणाली, तकनीकों और सैन्य अनुभवों को साझा करेंगे।
गढ़वाल राइफल्स के जवान करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व
संयुक्त सैन्य अभ्यास में भारतीय दल का नेतृत्व गढ़वाल राइफल्स के जवान कर रहे हैं। इनके साथ भारतीय सेना की अन्य शाखाओं और सेवाओं के सैन्यकर्मी भी शामिल हैं।वहीं ऑस्ट्रेलियाई सेना की ओर से 13वीं ब्रिगेड के जवान इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं।दोनों देशों की सेनाओं के सैनिक संयुक्त प्रशिक्षण के माध्यम से सामरिक क्षमताओं को बेहतर बनाएंगे। साथ ही विभिन्न परिस्थितियों में एक-दूसरे के साथ प्रभावी ढंग से काम करने का अभ्यास करेंगे।
तटीय और द्वीपीय क्षेत्रों में अभियान पर जोर
ऑस्ट्राहिंद 2026 की मुख्य थीम संयुक्त राष्ट्र के अधिदेश के अध्याय सात के अंतर्गत द्वीपीय और तटीय वातावरण में संयुक्त सैन्य अभियान है।इसमें सैनिकों को ऐसे वातावरण में काम करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जहां समुद्री और तटीय परिस्थितियां सैन्य संचालन को प्रभावित कर सकती हैं।अभ्यास के दौरान संयुक्त योजना, सामरिक ड्रिल और वास्तविक परिस्थितियों जैसे वातावरण में युद्धाभ्यास किया जाएगा। इसमें हवाई और समुद्री आयामों को भी शामिल किया गया है।इसका उद्देश्य दोनों सेनाओं की परिचालन क्षमता और आपसी समन्वय को मजबूत करना है।
निगरानी और टोही क्षमताओं का होगा अभ्यास
संयुक्त प्रशिक्षण में निगरानी और टोही से जुड़ी गतिविधियों को विशेष महत्व दिया जा रहा हैइन गतिविधियों का उद्देश्य संभावित खतरे की पहचान करना, क्षेत्र की परिस्थितियों का आकलन करना और सैन्य अभियानों के दौरान समय पर महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराना है।दोनों सेनाओं के जवान विभिन्न सामरिक परिस्थितियों में संयुक्त निर्णय लेने और निर्धारित मिशन को पूरा करने का अभ्यास करेंगे।इससे भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों को एक-दूसरे की सैन्य प्रक्रियाओं और संचालन संबंधी अनुभवों को समझने का अवसर मिलेगा।
पिछले साल ऑस्ट्रेलिया में हुआ था अभ्यास
ऑस्ट्राहिंद सैन्य अभ्यास का पिछला संस्करण 13 से 26 अक्टूबर 2025 तक ऑस्ट्रेलिया के पर्थ स्थित इरविन बैरक्स में आयोजित किया गया था।उस दौरान दोनों देशों की सेनाओं ने संयुक्त अभियानों और सामरिक प्रशिक्षण में भाग लिया था।इस वर्ष भारत में आयोजित पांचवें संस्करण के माध्यम से सैन्य सहयोग की इस परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है।नियमित सैन्य अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच विश्वास और आपसी समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा संबंध होंगे मजबूत
भारत और ऑस्ट्रेलिया हिंद-प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार हैं। दोनों देश रक्षा सहयोग, सैन्य प्रशिक्षण और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर मिलकर काम कर रहे हैं।ऑस्ट्राहिंद जैसे संयुक्त सैन्य अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली समझने और संयुक्त अभियानों के लिए बेहतर तैयारी करने का अवसर देते हैं।इसके साथ ही सैन्य प्रशिक्षण में नई तकनीकों और अनुभवों का आदान-प्रदान भी किया जाता है।
दोनों सेनाओं के बीच बढ़ेगा आपसी विश्वास
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अभ्यास का उद्देश्य सैन्य सहयोग, आपसी विश्वास और इंटरऑपरेबिलिटी यानी संयुक्त रूप से अभियान संचालित करने की क्षमता को बढ़ाना है।14 दिनों के प्रशिक्षण के दौरान दोनों देशों के जवान सामरिक गतिविधियों में भाग लेकर अपनी क्षमताओं को और मजबूत करेंगे।तिरुवनंतपुरम में शुरू हुआ ऑस्ट्राहिंद 2026 भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते रक्षा संबंधों का महत्वपूर्ण उदाहरण है। इस अभ्यास से भविष्य में संयुक्त सैन्य अभियानों के लिए बेहतर समन्वय और तैयारियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।