तेहरान। ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को गुरुवार को उनके गृहनगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। इसके साथ ही ईरान और इराक में पिछले छह दिनों से चल रहे उनके अंतिम विदाई कार्यक्रमों का समापन हो जाएगा। खामेनेई के अंतिम संस्कार से पहले उनके पार्थिव शरीर को लेकर विमान मशहद पहुंचा। रिपोर्ट के अनुसार, मशहद पहुंचने के दौरान ताबूत ले जा रहे विमान को लड़ाकू विमानों ने एस्कॉर्ट किया। सुप्रीम लीडर की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी वीडियो फुटेज में इस दृश्य को दिखाया गया है।
अयातुल्ला अली खामेनेई के ताबूत के साथ उनके परिवार के कुछ सदस्यों के ताबूत भी रखे गए थे। बताया जा रहा है कि उनके परिवार के इन सदस्यों की भी मौत 28 फरवरी को हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों में हुई थी। ईरान में खामेनेई को लेकर आयोजित अंतिम विदाई कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। देश के कई हिस्सों में उनके समर्थकों ने श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए। अंतिम संस्कार को लेकर सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
मशहद शहर ईरान के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। यहां स्थित इमाम रजा दरगाह शिया समुदाय के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखती है। इसी स्थान पर खामेनेई को दफनाया जाएगा। गौरतलब है कि 28 फरवरी को ईरान पर हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद मध्य-पूर्व में तनाव और बढ़ गया था। इन हमलों के बाद क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हुई थीं और संघर्ष की स्थिति बनी थी।
अयातुल्ला अली खामेनेई ईरान के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक और धार्मिक नेताओं में शामिल रहे। उन्होंने लंबे समय तक देश की सर्वोच्च सत्ता का नेतृत्व किया। उनके निधन के बाद ईरान में सत्ता और राजनीतिक व्यवस्था को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। छह दिनों तक चले अंतिम विदाई कार्यक्रमों में ईरान और इराक के कई स्थानों पर श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की गईं। अब मशहद में अंतिम संस्कार के साथ यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
अंतिम संस्कार को लेकर ईरानी प्रशासन ने विशेष सुरक्षा व्यवस्था की है। बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके। मशहद में होने वाले इस अंतिम कार्यक्रम पर दुनियाभर की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि खामेनेई का राजनीतिक और धार्मिक प्रभाव ईरान की आंतरिक राजनीति के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी रहा है। उनके अंतिम संस्कार के बाद ईरान की आगे की राजनीतिक दिशा को लेकर चर्चाएं और तेज हो सकती हैं।