BREAKING: ईरान पर रहस्यमयी हवाई हमले, हमलावर को लेकर बढ़ा सस्पेंस
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New Delhi. नई दिल्ली। अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने की घोषणा के बाद भी इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान पर हुए रहस्यमयी हवाई हमलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चिंता पैदा कर दी है। बिना किसी दावे वाले इन हमलों को लेकर अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ईरान को निशाना बनाने वाला कौन है। हमलों के बाद ईरानी प्रशासन में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जानकारी के अनुसार, गुरुवार को उस समय ईरान के कई इलाकों में हवाई हमले हुए, जब देश दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटा था। इन हमलों में दक्षिणी ईरान के कई क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। हालांकि ईरान ने अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी देश या संगठन को इन हमलों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया है।
ईरानी सरकारी मीडिया और समाचार एजेंसियों ने बताया कि बुशहर, सिस्तान-बलूचिस्तान, अहवाज और चाबहार समेत कई क्षेत्रों में धमाकों और हवाई हमलों की सूचना मिली। इन घटनाओं के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड से इन हमलों को लेकर प्रतिक्रिया मांगी गई, लेकिन फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इन हमलों की टाइमिंग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ हमले रोकने की घोषणा के कुछ समय बाद ही नए हमले सामने आए। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर इन हमलों के पीछे कौन है और इसका उद्देश्य क्या है।
ईरान के एक सांसद ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर आरोप लगाया है कि उसने कथित तौर पर अमेरिका के ईरान विरोधी अभियान में सहयोग किया है। हालांकि UAE की ओर से इन आरोपों पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। ईरान का दावा है कि सऊदी अरब और UAE ने भी उसके खिलाफ हवाई हमलों में भूमिका निभाई है। इस बीच ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए मध्य पूर्व के कुछ देशों को निशाना बनाया। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की ओर से बहरीन, जॉर्डन, कुवैत और कतर में हमले किए गए, जिसके बाद इन देशों में मिसाइल अलर्ट सायरन बजने लगे। सुरक्षा कारणों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई।
ईरान की कार्रवाई के बाद खाड़ी क्षेत्र में कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान कुवैत पहुंचे और वहां के नेतृत्व से मुलाकात की। वहीं खाड़ी देशों ने कतर के विदेश मंत्री के साथ भी क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बातचीत की। दूसरी ओर, इजरायल की भूमिका को लेकर भी चर्चा हो रही है। हालांकि इजरायल ने जून के बाद से ईरान पर किसी नए हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। आमतौर पर इजरायल अपने सैन्य अभियानों की जानकारी सार्वजनिक रूप से देता रहा है। इजरायल सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार रात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत की, जिसमें खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी गतिविधियों को लेकर चर्चा हुई।
इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा है कि उनका देश जरूरत पड़ने पर ईरान के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तैयार है। उन्होंने सैन्य कार्यक्रम में कहा कि इजरायली सेना सतर्क है और जरूरत पड़ने पर ईरान के खिलाफ अभियान दोबारा शुरू किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इजरायल को वापस कार्रवाई करनी पड़ी तो वह पहले से ज्यादा ताकत के साथ जवाब देगा।
क्षेत्रीय तनाव के बीच सबसे बड़ा मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य बना हुआ है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अमेरिका और अरब देश चाहते हैं कि यह मार्ग अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खुला और सुरक्षित रहे। वहीं ईरान का कहना है कि इस क्षेत्र पर उसका नियंत्रण होना चाहिए और यहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लिया जाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान पर हुए इन अघोषित हमलों से मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर है कि इन हमलों की जिम्मेदारी कौन लेता है और आने वाले दिनों में अमेरिका, इजरायल और ईरान की रणनीति क्या होगी।